fbpx Press "Enter" to skip to content

ऑस्ट्रेलिया के नजदीक से नई डीएनए श्रृंखला की खोज की वैज्ञानिकों ने




  • नई इंसानी प्रजाति का पहली बार पता चला

  • मेलानेशिया के इलाके में पाया गया नया डीएनए

  • काफी दूर तक फैला था इस प्रजाति का इलाका

  • पहले इस प्रजाति का पता नहीं चल पाया था

राष्ट्रीय खबर

रांचीः ऑस्ट्रेलिया के नजदीक से यह बात सामने आयी है कि इंसानों की एक और प्रजाति

भी थी। इस प्रजाति के बारे में इससे पहले कभी जानकारी नहीं मिल पायी थी। वर्तमान के

मेलानेशिया के इलाके में यह प्रजाति रहा करती थी। वहां के आदिवासियों के डीएनए की

जांच में इस प्रजाति के प्राचीन काल में मौजूद होने का पता चला है। डीएनए की यह

श्रृंखला अन्य इंसानों में इससे पहले नहीं पायी गयी थी। इसका पता चलने के बाद अब

माना जा रहा है कि चिंपाजी से इंसान बनने के दौर में इंसान जिन प्रजातियों से होकर आज

के दौर तक पहुंचा है, उनमें कई कड़ियां ऐसी भी हैं, जिनका पहले पता नहीं चल पाया था।

जिस इलाके में इस डीएनए श्रृंखला की मौजूदगी पायी गयी है वह दक्षिण प्रशांत महासागर

के इलाके में ऑस्ट्रेलिया के नजदीक और उत्तर पूर्व में स्थित है। इस इलाके में वानातू,

सोलोमन द्वीप, फिजी और पापुआ न्यू गायना के इलाके हैं। यानी इस प्रजाति का दायरा

विस्तृत था, जो आज कई देशों को अलग अलग भौगोलिक सीमाओं में बंट गये हैं। वैसे

इसकी जांच का दायरा बढ़ भी सकता है क्योंकि हाल ही में एक अन्य खोज में इस बात की

पुष्टि हुई है कि प्राचीन पृथ्वी में ऑस्ट्रेलिया का इलाका भी मध्य भारत से सटा हुआ था।

लिहाजा वहां भी डीएनए कड़ी की खोज से इस बात की और बेहतर तरीके से पुष्टि हो

सकती है कि क्या वाकई यह इलाका तब भी एक था, जब इंसानों का क्रमिक विकास हो

रहा था।

ऑस्ट्रेलिया के नजदीक का शोध टेक्सास विश्वविद्यालय का

टेक्सास विश्वविद्यालय के जेनेटिक वैज्ञानिकों के एक दल ने इस पर काम किया है। इस

दल के रियान बोहलेंडर ने बताया है कि इस डीएनए कड़ी के बारे में पूर्व की अन्य मानव

प्रजातियों में जानकारी नहीं मिल पायी थी। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि यह शायद

इंसानों की एक अलग प्रजाति थी, जिसकी खोज अब हो रही है। वरना इससे पूर्व इस इलाके

में भी नियांडेरेथाल्स और डेनिसोवियांस प्रजाति के होने भर की जानकारी वैज्ञानिकों को

थी। फिर से इस तथ्य को स्पष्ट कर दें कि इंसान रातों रात ही अपनी इस अवस्था को

प्राप्त नहीं हुआ है। क्रमिक विकास के दौर में बंदर से इंसान बनने के दौर में वह कई बार

बदलाव के दौर से गुजरा है। यह बदलाव भी कई लाख वर्षों का निरंतर क्रम रहा है। धीरे

धीरे हम अपने वर्तमान स्वरुप तक पहुंचे हैं। इसलिए नई डीएनए श्रृंखला से फिर से यह

बात साबित हो रही है कि चिंपाजी से आधुनिक इंसान बनने के बीच में कई ऐसी कड़ियां

भी मौजूद हैं, जिनके बारे में अब तक जानकारी नहीं मिल पायी थी। इस शोध से जुड़े

वैज्ञानिक मानते हैं कि अभी ऑस्ट्रेलिया के नजदीक जिस नये डीएनए कड़ी का पता चला

है वह शायद एक लाख वर्ष से लेकर साठ हजार वर्ष पुरानी है। जिस क्षेत्र में यह जेनेटिक

संकेत पाया गया है, वह इन इलाकों के आदिवासियों में मौजूद है। हम आज भी अपने

अंदर इन प्राचीन इंसानों की डीएनए पहचान के कुछ हिस्सों को साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

वैज्ञानिक तौर पर यह बात प्रमाणित है कि यूरोप और एशिया के लोगों में प्राचीन डीएनए

संकेतों का 1.5 से 4 प्रतिशत तक साक्ष्य मौजूद है।

डीएनए संकेतों में छिपा होता है जेनेटिक विरासत का राज

शोध से जुड़े वैज्ञानिक इसके माध्यम से प्राचीन पृथ्वी की संरचना के बदलने के साथ साथ

इंसानों के बदलने के रिश्ते को भी समझना चाहते हैं। माना जा रहा है कि अफ्रीका से आगे

बढ़ने वाली प्राचीन इंसानों की एक प्रजाति यूरोशिया में दूसरी प्रजाति से मिली थी। लेकिन

नये डीएनए संकेत बता रहे हैं कि जिन प्राचीन इंसानों की पहचान हो चुकी है, उनसे अलग

भी एक प्रजाति रही थी, जो अब तक विज्ञान की पकड़ में नहीं आ पायी थी। ऑस्ट्रेलिया के

नजदीक के इलाकों में बसने वाले आदिवासियों में इस अनजान डीएनए की कड़ी का पता

चलने के बाद इस तीसरी प्रजाति के प्राचीन इंसान के बारे में भी अधिकाधिक जानकारी

हासिल करने के प्रयास किये जा रहे हैं।



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from अजब गजबMore posts in अजब गजब »
More from आस्ट्रेलियाMore posts in आस्ट्रेलिया »
More from इतिहासMore posts in इतिहास »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

One Comment

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: