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अंतरिक्ष में फिर से दिखा अप्रत्याशित इलाके में नया ब्लैक होल







  • हब्बल टेलीस्कोप की मदद से अजूबा ब्लैक होल दिखा

  • एक के पास नहीं होता दूसरा ब्लैक होल

  • पूर्व की वैज्ञानिक सोच हो गयी गलत प्रमाणित

  • आइनस्टाइन के सापेक्षता के सिद्धांत को परखने की तैयारी


प्रतिनिधि

नयीदिल्ली: अंतरिक्ष में फिर से एक ऐसा ब्लैक होल दिखा है,

जिसके बारे में माना जा रहा है कि उसे वहां नहीं होना चाहिए था।

पूर्व के स्थापित वैज्ञानिक सिद्धांतों के मुताबिक इस स्थान पर ब्लैक होल को नहीं होना चाहिए थे।

लेकिन खगोल दूरबीन हब्बल टेलीस्कोप ने इस ब्लैक होल का पता बताया है।

नासा की इस दूरबीन ने गोल तश्तरी के जैसा यह ब्लैक होल खोजा है।

अजीब स्थिति यह है कि यह ब्लैक होल पास में मौजूद एक अन्य ब्लैक होल के काफी करीब है।


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आम तौर पर खगोल विज्ञान में ऐसी नहीं पहले नहीं पायी गयी है।

आम तौर पर ब्लैक होल एक दूसरे से काफी दूरी पर ही हुआ करते हैं।

लेकिन अब इसका पता लगने की वजह से पूर्व का यह खगोल विज्ञान का सिद्धांत गलत साबित होता नजर आ रहा है।

वैज्ञानिक घोषणा के मुताबिक यह ब्लैक होल स्पाइरल गैलेक्सी एनजीसी 3147 के बीच में है।

य़ह पृथ्वी से करीब 130 लाख प्रकाश वर्ष की दूरी पर होने का अनुमान है।

रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की मासिक पत्रिका में इसके बारे में पहली बार जानकारी दी गयी है।

इसके ईर्द गिर्द टूटते तारों और गैसों की रोशनी भी इतनी कम है कि

सामान्य परिस्थिति में इसके होने का पता भी नहीं चलता है।

इस इलाके में पहले से मौजूद ब्लैक होल एक दूसरे से काफी दूरी पर हैं।

जो अपने प्रचंड गुरुत्वाकर्षण की वजह से आस-पास के तारों को लगातार निगलते जा रहे हैं।

पास में एक ब्लैक होल के होने के बाद भी यह दूसरा ब्लैक होल क्यों है,

यह सवाल वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।

साथ ही काफी करीब सक्रिय रहे दो ब्लैक होलों के आपसी टकराव का नतीजा क्या होगा,

यह भी नया सवाल खगोल वैज्ञानिकों के लिए खड़ा हुआ है।

अंतरिक्ष में फिर से दिखे ब्लैक होल की संरचना से भी वैज्ञानिक हैरान

वैज्ञानिक अंतरिक्ष के संरचना को देखकर भी अचंभित है क्योंकि इस आकार का ब्लैक होल

आम तौर पर काफी विशाल हुआ करता है जो सक्रिय सौर मंडलों में पाया जाता है।

प्रारंभिक जानकारी मिलने के बाद वैज्ञानिकों ने इसकी स्थिति का अध्ययन किया है।

जिसके आधार पर वह इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस अजीब किस्म के

तश्तरीनूमा ब्लैक होल के आस पास जो गैसों का गुबार है

वह भी प्रकाश की गति के दस प्रतिशत गति से चक्कर काट रहा है।

दरअसल इस स्थिति का पता चलने के बाद भी इसके आस पास की रोशनी कम क्यों है,

यह सवाल भी वैज्ञानिकों के मन में हैं।

आम तौर पर ब्लैक होल के आस पास चक्कर काटते गैस जब पृथ्वी की तरफ होते हैं

तो उनकी रोशनी अधिक हो जाती है

लेकिन जब वह दूसरी छोर की तरफ चले जाते हैं तो उनकी रोशनी मद्धिम पड़ जाती है।

लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है।

दोनों ब्लैक होल के गैस भी एक दूसरे के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में

इस वजह से वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि यहां के

आस-पास का गैस भी ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव की वजह से रोशनी तक नहीं फैला पा रहा है।

दूसरी तरफ ध्वनि तरंगों की गणना से इसके सक्रिय होने की पुष्टि हो रही है।

साथ ही ध्वनि तरंगों की गणना की नई तकनीक की बदौलत इसके आकार को भी समझा जा सका है।

वैसे आकार में छोटा बताये जाने के बाद भी यह अपने सूर्य से आकार में

करीब ढाई सौ लाख गुणा बड़ा होने का अनुमान है।

प्रारंभिक परीक्षण में इस बात के

संकेत मिले हैं कि इस ब्लैक होल और पास के एक और ब्लैक होल के

उभार एक दूसरे को आकर्षित भी कर रहे हैं। इसकी वजह से वहां एक नये किस्म की ऊर्जा उत्पन्न हो रही है।

वहां रोशनी के फोटोन भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं।

इस शोध से जुड़े प्रथम लेखक स्टीफानो बियांचि ने यह बात कही है।

वह इटली के रोमा ट्री विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक इस जानकारी से भी उत्साहित हैं कि

इस परिस्थिति में प्रसिद्ध वैज्ञानिक अलबर्ट आइनस्टाइन के सापेक्षता के सिद्धांत को

एक बार फिर से पऱखने का मौका दे दिया है।


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