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सूर्य की नई तस्वीरें सामने आयी जो वाकई डरावनी लेकिन मोहक हैं

  • यूरोप के सबसे बड़े  टेलीस्कोप से देखा गया

  • स्पेन में स्थापित है यह खगोल दूरबनी

  • जर्मनी के वैज्ञानिक इसमें कर रहे काम

  • टेलीस्कोप में कई बदलाव का परिणाम

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सूर्य की नई तस्वीर लोगों के सामने आयी। इन तस्वीरों को देखकर खुद

वैज्ञानिक भी हैरान हैं। यूरोप के सबसे बड़े सोलर टेलीस्कोप ने सूर्य की नई तस्वीरों को

सार्वजनिक किया है। यूरोप के इस ग्रेगर टेलीस्कोप में आयी सूर्य की इन तस्वीरों को

देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं। स्पेन के टेइड खगोल केंद्र में स्थापित इस टेलीस्कोप को

जर्मनी के वैज्ञानिक संचालित कर रहे हैं। इस टेलीस्कोप से खास तौर पर सिर्फ सूर्य की

गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसका एकमात्र मकसद सूर्य के क्रियाकलापों का पूरे

सौर मंडल और खासकर हमारी धरती पर क्या कुछ असर पड़ता है, उसे देखना और

समझना है। टेलीस्कोप ने इस बार काफी उन्नत किस्म की तस्वीरें लेने में सफलता पायी

है। इन तस्वीरों में सूर्य को और करीब से देख पाना संभव हुआ है। शोध से जुड़े वैज्ञानिक

इन तस्वीरों के माध्यम से सूर्य की आंतरिक संरचना और वहां होने वाले निरंतर विस्फोटों

के बारे में और कुछ शोध कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि किसी यूरोपीय टेलीस्कोप

से ली गयी यह अब तक की सबसे श्रेष्ठ तस्वीरें हैं।

देखें नजदीक से यह कैसा दिख रहा है

दरअसल इन तस्वीरों को देख पाने के पीछे इस टेलीस्कोप में किये गये तकनीकी परिवर्तन

भी हैं। लेबिनिज इंस्टिट्यूट ऑफ सोलर फिजिक्स के इंजीनियरों ने इसके लेंस को ही नये

सिरे से तैयार किया है। इन नये लेंसों की वजह से सूर्य की इन नई तस्वीरों को ले पाना और

उनका विश्लेषण कर पाना संभव हो पाया है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि इस खगोल

दूरबीन का लेंस इतना शक्तिशाली है कि यह सूर्य की जो तस्वीरें खींच रहा है वह तीस

माइल की दूरी से सूरज को देखने जैसी स्थिति है। इसी वजह से वहां के बहुत कुछ साफ

साफ पहली बार देख पाना संभव हो पाया है।

सूर्य की नई तस्वीरों से पहले पार्कर सोलर प्रोब ने भेजी थी तस्वीर

इसके पहले भी नासा के पार्कर सोलर प्रोब ने भी अपने सूर्य अभियान के तहत करीबी फोटो

खींचने में सफलता पायी है। इस बार की तस्वीरों के बारे में वैज्ञानिकों ने बताया है कि इन

तस्वीरों का छोटा का कण भी करीब 865000 मील के व्यास का है। यानी यह स्थिति किसी

फुटबॉल के मैदान में एक किलोमीटर की दूरी से एक सूई को खोजने जैसी है। लेकिन इसके

बाद भी इतने करीब से सूर्य को इससे पहले कभी नहीं देखा जा सका है। तस्वीरों में वे सारे

सन स्पॉट और वहां से उभरते हुए लपटों को भी अच्छी तरह समझा जा सकता है। याद रहे

कि सूर्य की लपटों में जो प्लाज्मा किरणें होती हैं, वे अंतरिक्ष में लाखो किलोमीटर तक

ऊपर जाने के बाद किसी बारिश की तरह फिर से सूर्य पर बरसती रहती हैं। इस बार

तस्वीरों से इन्हीं सौर प्लाज्मा की गतिविधियों को भी समझने में मदद मिली है। तस्वीरों

में जो अंधेरे इलाके नजर आते हैं, व सन स्पॉट हैं जो लगातार बदलते रहते हैं क्योंकि सूर्य

में निरंतर विस्फोट होता रहता है। दरअसल इन्हीं विस्फोटों की वजह से सूर्य के चुंबकीय

क्षेत्र में हर क्षण बदलते हैं और वहां इस किस्म के विस्फोटों का अनवरत सिलसिला चला

आ रहा है।

वहां विस्फोटों का अनवरत सिलसिला साफ समझ में आता है

इस शोध दल के नेता डॉ लुसिया क्लेइंट ने कहा कि इसे पहली बार इस तरीके से देख पाना

एक सुखद अनुभव रहा क्योंकि इससे पहले यह दूरबीन इतने साफ तरीके से सूर्य को नहीं

देख पायी थी। लेकिन अब खगोल दूरबनी के लेंस और अन्य उपकरणों में किये गये

संशोधनों की वजह से सूर्य और साफ नजर आने लगा है। इस शोध के बारे में यह भी

बताया गया है कि बीच की अवधि में कोरोना संकट की वजह से यहां का अनुसंधान रोकना

पड़ा था। पिछले जुलाई में फिर से यह अनुसंधान केंद्र खोले जाने के बाद वहां नये सिरे से

इसकी खोज का कार्य प्रारंभ हो चुका है। केइएस के निदेशक डॉ स्वेतलाना बर्डिगुईना ने

कहा कि इस खगोल दूरबीन में परिवर्तन करना एक चुनौतीपूर्ण काम था और कई बार ऐसे

प्रयोगों में विफलता भी हाथ लगती है। लेकिन उनकी संस्था ने आपसी तालमेल बैठाते हुए

बहुत ही कम समय में यह काम पूरा कर दिखाया है। यह सारा प्रयोग सफल रहा है, वह तो

सूर्य की नई तस्वीरों से ही प्रमाणित हो जाता है।


 

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