ब्रेन के अंदर में भी लग पायेगा पेस मेकर

ब्रेन के अंदर में भी लग पायेगा पेस मेकर
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• वैज्ञानिकों ने तैयार की मस्तिष्क की नई चिप
• उम्र जनित कई बीमारियों में कारगर होगा
• डाक्टर को लगातार निगरानी से मुक्ति
• कुछ बार के बाद खुद ही काम करता है

नईदिल्लीः ब्रेन के भीतर भी पेस मेकर लगाया जा सकेगा।

वैज्ञानिकों द्वारा तैयार इस चिप को बाहर से नियंत्रित किया जा सकेगा।

इसके माध्यम से खास तौर पर उम्रजनित कुछ बीमारियों को नियंत्रित रखने में काफी मदद मिलेगी।

यह उपकरण दरअसल मनुष्य के दिमाग के अंदर संचालित और निर्देशित होने वाली बिजली के तरंगों को सही तरीके के कायम रख पायेगी।

इससे अधिक उम्र में होने वाली मुर्च्छा अथवा पार्किंसंस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोध दल ने बनाया

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोध दल ने इस उपकरण को तैयार किया है।

इसे बनाने वालों ने इसका नाम अंग्रेजी में वांड (डब्ल्यू ए एन डी) रखा है।

अंग्रेजी में इसका पूरा नाम वायरलेस आर्टिफैक्ट फ्री न्यूरोमॉड्यूलेशन डिवाइस है।

यह दिमाग में होने वाली किसी भी गलत बिजली संकेत को पकड़ सकती है और बाहर से मिले निर्देश के आधार पर उसे सुधार भी देती है।

यानी मनुष्य के दिमाग से होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचने वाले विद्युतीय तरंग सही सही भेजे जा सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने इस चिप को इतना कार्यकुशल बनाया है कि कुछ बार गड़बड़ी के बाद मिले संकेतों को पकड़ने के बाद यह चिप खुद ही वह काम करने लगती है।

तब अंदर की गड़बड़ी को सुधारने के लिए बाहर से संकेत भेजना भी नहीं पड़ता है।

शोध दल के सहायक प्रोफसर रिक्की मूलर का कहना है कि यह उपकरण रियल टाइप यानी वास्तविक समय के हिसाब से काम करता है।

इसके कुशल होने की वजह से प्रारंभिक अवस्था के बाद मरीज को

मशीन खुद ही मुर्च्छा अथवा पार्किंसंस के दौरान होने वाली गड़बड़ियों से बचाता रहता है।

मशीन का कार्यकुशल बनाने के लिए दिमाग के अंदर की न्यूरॉन की गतिविधियों को रिकार्ड किया जाता है।

इन्हीं न्यूरॉन संकेतों के आधार पर मशीन को सही तरीके से काम करने का निर्दश दिया जाता है।

उल्लेखनीय बात यह है कि यह छोटा सा उपकरण दिमाग के अंदर उत्पन्न होने वाले

छोटे और बड़े तमाम विद्युतीय तरंगों को पकड़ सकता है

और उनके विश्लेषण के लिए बाहर लगे उपकरण तक संकेत भेज सकता है।

ब्रेन के इस चिप का बंदरों पर हो चुका प्रयोग

इस छोटे से चिप में फिलहाल 128 चैनल हैं यानी यह चिप दिमाग के 128 स्नायु केंद्रों से संकेत ग्रहण और विश्लेषण कर सकता है।

पूर्व में दिमागी गतिविधियों की जानकारी देने वाले उपकरणों में सिर्फ आठ चैनल हुआ करते थे।

वर्तमान में शोध दल ने बंदरों पर इसका सफल परीक्षण कर लिया है।

इसकी मदद से चिप लगे बंदरों के हाथ की क्रिया को धीमी करने में भी मदद मिली है।

इसकी मदद से कंप्यूटर पर गेम खेलने के लिए इस्तेमाल होने वाले जॉयस्टिक पर भी

बंदरों को सही तरीके से इसे चलाने का निर्देश दिया गया था, जो सफल रहा है।

शोध से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि इस चिप के प्रयोग में आने पर इस किस्म के मरीजों पर डाक्टरों की सतत निगरानी की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगा

क्योंकि मशीन खुद ही ढेर सारा काम खुद कर लेगा और जरूरत पड़ने पर संकेत भेजकर

किसी विशेषज्ञ को बाहर लगे उपकरण में उपलब्ध आंकड़े देखकर अतिरिक्त काम करने का निर्देश भी प्राप्त कर लेगा।

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