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टीकाकरण को और तेज गति देने की आवश्यकता

टीकाकरण का काम यूं तो अब लगता है कि पटरी पर है। एक दिन में कल यानी 21 जून

को देश भर में 75 लाख से अधिक टीके का इंजेक्शन लगाया गया जो अब तक किसी एक

दिन में सबसे अधिक और रोजाना करीब 32 लाख खुराक के साप्ताहिक औसत के दोगुने

से अधिक हैं। यह रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7 जून को घोषित केंद्र के सभी के

लिए मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम के पहले दिन बना। टीका खुराकों की आपूर्ति बढऩे,

संशोधित निर्देशों के तहत ज्यादा केंद्रों और टीकाकरण केंद्रों पर ही पंजीकरण की मंजूरी से

मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश समेत बहुत से राज्यों में टीकाकरण का आंकड़ा

बढ़ा है।

अगर देश में टीकाकरण की यही रफ्तार बनी रही तो दिसंबर, 2021 से जनवरी, 2022 के

बीच पूरी वयस्क आबादी को टीके लगाना मुमकिन होगा। सरकार को भी उम्मीद है कि

जुलाई से टीका आपूर्ति की स्थिति सुधरेगी। अब कुल आपूर्ति में से तीन-चौथाई केंद्र की

खरीद के लिए उपलब्ध हैं और शेष आपूर्ति निजी क्षेत्र के लिए है। इस गति को अगर पहले

ही अमल में लाया जाता तो शायद देश के खाते में जो मौत के आंकड़े जुड़े हैं, वे बहुत कम

होते लेकिन बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता, इसे समझते हुए इस बात का प्रयास

होना चाहिए कि टीकाकरण को अब कमसे कम यह गति हासिल रहे। किसी कारण से

अगर फिर इस अभियान में विलंब हुआ तो हम जिस संकट को टालने की बात कह रहे हैं,

वह संकट निश्चित तौर पर किसी दूसरे स्वरुप में हमारी गतिविधियों को फिर से बाधित

कर देगा। वैसे भी जैसे जैसे लॉकडाउन में रियायतें दी जा रही है, लोग फिर से लापरवाह

होते सड़कों पर नजर आ रहे हैं।

टीकाकरण में तेजी से ही संक्रमण का खतरा कम होगा

यह खतरे की घंटी है। पिछले अनुभव और दूसरी लहर के कहर से मानों हमलोगों ने कोई

सबक नहीं सीखा है। मौजूदा अनुमानों से यह अंदाजा लगता है कि टीकाकरण की रफ्तार

दोगुनी करके जनवरी 2022 तक ही सबको टीका लगाने का काम पूरा हो पाएगा।

टीकाकरण की मौजूदा गति के हिसाब से 15 महीने का वक्त और लगेगा और सितंबर

2022 तक देश की कुल वयस्क आबादी को टीका लग पाएगा। आंकड़ों के मुताबिक देश में

86.5 करोड़ वयस्क हैं जिन्हें दिसंबर तक का लक्ष्य पूरा करने के लिए टीके लगाने की

जरूरत होगी। ऐसे में टीके की दो खुराक के लिहाज से 1.73 अरब टीके की खुराक की

जरूरत होगी। लगभग 5 करोड़ लोगों को पहले ही टीके की दो खुराक मिल चुकी है। बाकी

16-17 करोड़ लोगों को टीके की एक खुराक मिली है। सरकार को 1.63 अरब टीके की

खुराक देने की जरूरत होगी। इसमें कितने दिन लगते हैं यह टीकाकरण की रफ्तार पर

निर्भर करेगा। टीके की आपूर्ति की स्थिति में सुधार की वजह से अप्रैल से ही टीके की

रफ्तार दोगुनी हो गई है और अब भारत में जून की शुरुआत से ही रोजाना 30 लाख से

अधिक टीके लगाए जा रहे हैं। इस दर के लिहाज से टीके की बाकी खुराक को लगाने में

453 दिन लगेंगे। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए सभी को टीका लगाने में 227 दिन लगेंगे।

वर्तमान दर से दोगुनी दर पर टीकाकरण जनवरी 2022 तक पूरा हो जाएगा। हालांकि,

मौजूदा दर पर वयस्क भारतीयों का टीकाकरण सितंबर 2022 तक पूरा किया जा सकता

है। भारत नवंबर तक करीब प्रमुख 50 शहरों की वयस्क आबादी को टीके लगाने में सक्षम

होगा और फरवरी 2022 तक पूरी आबादी को टीके लगा दिए जाएंगे।

इतने टीके जुटाने में भी समय लगता है

देश में टीके तैयार कर देश की 40 फीसदी वयस्क आबादी को नवंबर तक टीके लग जाएंगे

और मार्च 2022 तक भारत के लगभग 80 फीसदी वयस्कों को टीके लग जाएंगे। सीरम

इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) जुलाई तक 7 करोड़ खुराक प्रतिमाह की मौजूदा

क्षमता के मुकाबले 10 करोड़ कोविशील्ड तैयार करेगी जो एस्ट्राजेनेका का टीका है। भारत

बायोटेक कंपनी बेंगलूरु, हैदराबाद और अंकलेश्वर में अपनी क्षमता का विस्तार कर

दिसंबर तक एक अरब खुराक सालाना क्षमता हासिल करने की राह पर है। यह मोटे तौर

पर 3.5 करोड़ प्रतिमाह की मौजूदा अनुमानित क्षमता के मुकाबले 8.3 से 8.5 करोड़ तक

की खुराक तैयार की जाएगी। इनके अलावा भी दूसरे टीकों पर काम चल रहा है। लेकिन

सवाल जस का तस खड़ा है कि टीकाकरण को वर्तमान गति से तेज करने के लिए केंद्र

सरकार के पास क्या अतिरिक्त योजना है। यह प्रश्न इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि जो काम

काफी पहले कर लिया जाना चाहिए था, उसे अब सरकार पूरा कर रही है जबकि कोरोना की

दूसरी लहर अब ढलान पर है और तीसरा लहर की आशंका व्यक्त की जा रही है।

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