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कारोबारी जगत को फिर से राहत देने के उपायों पर विचार जरूरी




कारोबारी जगत जब तक पहली चोट से संभल पाता, अब कोरोना की दूसरी लहर के फिर

से पस्त हो चुका है। कोविड-19 महामारी की दूसरी और ज्यादा घातक लहर से जूझ रहे

देश के कारोबारी जगत को राहत देने के उपायों पर विचार हो रहा है। जानकार मानते हैं कि

पिछले साल के लॉकडाउन के दौरान हर किस्म के  कारोबार पर दबाव बढ़ रहा है और

आतिथ्य यानी होटल-रेस्तरां जैसे क्षेत्रों पर बहुत गहरी चोट पड़ी है। सरकार और रिजर्व

बैंक मौजूदा संकट से निपटने के उपाय खंगाल रहे हैं और यह भी देख रहे हैं कि आपात

ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) को ही आगे बढ़ाने या उसे नए रूप में लाने अथवा

एमएसएमई खातों के पुनर्गठन को मंजूरी देने जैसे कदम उठाने की जरूरत है या नहीं। वे

यह भी देख रहे हैं कि कुछ और कदम भी उठाने की आवश्यकता है या नहीं। अधिकारी ने

कहा कि सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है मगर उद्योग से दबाव के बावजूद

फौरन राहत उपाय करना मुमकिन नहीं है। पिछले साल सरकार ने लघु उद्योगों के लिए 3

लाख करोड़ रुपये की गिरवी मुक्त ऋण गारंटी योजना शुरू की थी और बाद में इसमें अन्य

क्षेत्रों और श्रेणियों को भी शामिल किया गया था। इस योजना का लाभ 30 जून तक लिया

जा सकता है। रिजर्व बैंक ने भी पिछले अगस्त में एमएसएमई के लिए ऋण पुनर्गठन

योजना की घोषणा की थी, जिसके तहत कर्ज देने वाली संस्था कर्जदार से रकम वसूली की

अवधि दो साल बढ़ा सकती थी।

यह योजना इस साल मार्च तक चालू थी।

एक अन्य अधिकारी ने कहा,  पिछले तीन सप्ताह में कारोबार में जबरदस्त रुकावट आई

है और कारोबारियों को मदद की जरूरत है, जिसे सरकार भी समझती है।  अधिकारी ने

कहा कि मार्च के महीने में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का रिकॉर्ड संग्रह रहा। लेकिन

खपत में गिरावट नजर आ रही है और ज्यादातर प्रमुख संकेतक गिर ही रहे हैं।अप्रैल में

वाहनों के  थोक उठान में मार्च के मुकाबले गिरावट आई है।

गूगल मोबिलिटी इंडेक्स बताता है कि आवागमन कोविड से पहले के स्तर पर नहीं पहुंचा

है। उदाहरण के लिए पूर्ण लॉकडाउन लागू करने वाले दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में

सुपरमार्केट और दवा की दुकानों तक पहुंचने के अलावा बाजार में सामान्य आवाजाही 28

अप्रैल को 50 फीसदी से भी ज्यादा गिर चुकी थी। अप्रैल में बिजली की मांग, वाहन

पंजीकरण और जीएसटी ई-वे बिल सृजन में पिछले महीने के मुकाबले गिरावट आ रही है,

जिससे पता चलता है कि कोविड-19 के बढ़ते मामलों और स्थानीय प्रतिबंधों का कितना

अधिक असर है। सरकार ने हाल में कुछ उपायों की घोषणा की है। इनमें कर अनुपालन की

समयसीमा में बढ़ोतरी, पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए राज्यों को 50 साल का कर मुक्त

ऋण देना आदि शामिल हैं। सरकार ने जीएसटी के भुगतान में भी कुछ ढील दी हैं।

कारोबारी जगत के मुश्किलों को देखते हुए सरकार ने जीएसटी के अनुपालन से जुड़ी तारीखें आगे बढ़ा दी हैं

कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से पैदा  हुई मुश्किलों को देखते हुए सरकार ने आयकर

और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के  अनुपालन से जुड़ी तारीखें आगे बढ़ा दी हैं और देर से

भुगतान पर लगने वाला शुल्क भी  खत्म कर दिया है। वित्त मंत्रालय से सूक्ष्म, लघु एवं

मध्यम उद्यम (एमएसएमई) समेत  विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों ने ये तारीखें तीन

महीने आगे खिसकाने का अनुरोध  किया था। देश भर में लगातार बढ़ते कोविड संक्रमण

को देखते हुए यह समयसीमा और  भी बढ़ानी पड़ सकती है। सरकार द्वारा घोषित राहत

कदमों के तहत वर्ष 2019-20 के  लिए विलंबित या संशोधित आयकर रिटर्न,

जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-3बी और  जीएसटीआर-4 जमा करने की तारीख बढ़ाई गई

है तथा किसी भी तरह की अपील, करों के भुगतान, ब्याज दरों को तर्कसंगत बनाने और

देरी से भुगतान पर लगने वाला शुल्क हटाया गया है। सीबीडीटी ने एक बयान में कोविड

महामारी से पैदा हुई मुश्किलों के बीच उद्योगों को राहत पहुंचाने वाले कदमों की जानकारी

दी है। महामारी से पैदा हुई मुश्किलों और करदाताओं, कर सलाहकारों एवं अन्य

हितधारकों से मिले अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुछ समयसीमाओं को

आगे बढ़ाने का फैसला किया है।  सरकार ने समरी रिटर्न जमा करने में इस्तेमाल होने

वाला जीएसटीआर-3बी फॉर्म भरने की तारीख बढ़ा दी है। मार्च एवं अप्रैल महीनों के लिए 5

करोड़ रुपये के कारोबार वाले करदाता 30 दिन और उससे अधिक कारोबार वाले करदाता

15 दिन विलंब से समरी रिटर्न जमा कर सकते हैं। क्षतिपूर्ति डीलरों की तरफ से वार्षिक

रिटर्न जमा करने की तारीख भी 30 अप्रैल से बढ़ाकर 31 मई कर दी गई है। जीएसटीआर-1

यानी बिक्री रिटर्न जमा करने की आखिरी तारीख भी एक महीने बढ़ाकर 26 मई कर दी गई

है। इसलिए अब कारोबारी जगत को जिंदा रखने के लिए सरकारी पहल की आवश्यकता

है।



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