नक्सलियों की जेल ब्रेक की साजिश का भंडाफोड़ साजिश में पूर्व सैनिक शामिल

नक्सलियों की जेल ब्रेक की साजिश
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  • चाईबासा में पहले भी दो बार घटी है घटना

  • बिचौलिये की मदद से रुपया का भुगतान

  • पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था फिर कड़ी की

संवाददाता
रांची: नक्सलियों ने फिर से चाईबासा में जेल तोड़ने की साजिश रची थी।



पुलिस अधीक्षक को इसकी गुप्त सूचना मिलने के बाद इस साजिश का भंडाफोड़ हो गया है।

इस क्रम में पुलिस ने जेल के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत का भी पता लगाया है।

मामला दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस अधीक्षक पश्चिमी सिंहभूम को इसकी सूचना मिली थी कि कुख्यात नक्सली मोतीलाल सोरेन उर्फ संदीप

अपने अन्य नक्सली साथियों के साथ भागने की योजना बना रहा है।

इसी आधार पर पुलिस ने सूचना के आधार पर आगे की कार्रवाई की।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी चाईबासा में एक बार जेल ब्रेक की घटना को अंजाम दिया गया था।

17 जनवरी 2011 में चाईबासा मंडल कारा से मोतीलाल सोरेन उर्फ संदीप, धीरेन दा उर्फ उत्तम उर्फ नारायण दा उर्फ नारायण महतो एवं रघुनाथ हेम्ब्रम उर्फ वीरसेन उर्फ निर्भय जी भाग निकले थे।

उस वक्त इन नक्सलियों ने जेल के सेल की खिड़की का रड काटकर अनाज गोदाम होते हुए भाग निकलने का रास्ता बनाया था।

उसके बाद वर्ष 2014 में भी ऐसी घटना को अंजाम दिया गया था।

इस घटना में कैदी वाहन से उतर कर कोर्ट जाने के क्रम में भगदड़ की स्थिति का लाभ उठाकर नक्सली भाग निकले थे।

नक्सलियों ने सुरक्षाकर्मियों की आंखों में मिर्च झोंककर भागने का काम किया था।

नक्सलियों के मददगार पूर्व सैनिकों की पहचान भी जारी हुई

अब पुलिस अधीक्षक को मिली सूचना के मुताबिक जेल से भागने के फिराक में नक्सलियों ने जेल के कुछ कर्मचारियों को भी अपने साथ मिला लिया था।

पुलिस ने इन कर्मचारियों की पहचान भी जाहिर कर दी है।

इनके नाम विजय खलखो, चामू मुंडा और जुएल होरो बताया गया है।

यह तीनों सेवानिवृत्त सैनिक हैं तथा चाईबासा कारा में वर्तमान में पदस्थापित हैं।

पुलिस की सूचना के मुताबिक इनलोगों को भागने के एवज में चार लाख रुपये भी दिये गये हैं।

नक्सलियों के मददगार हैं भाजपा के नेता रामा पांडेय

इस साजिश में गुवा के रमाशंकर पांडेय का भी नाम आया है, जिसे पुलिस इन नक्सलियों के पैसे का लेनदेन करने वाले के तौर पर पहचान रही है।

रामा पांडेय भाजपा नेता है। सांसद लक्ष्मण गिलवा का करीबी है।

सेल की गुआ किरीबुरु और चिरिया खदानो में झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के नाम से एक मजदूर संगठन चलता है।

पहले भी नक्सलियों के साथ सांठगांठ रखने उनके लिए लूयस वसूलने के मामले में जेल जा चुका है।

नक्सलियों की योजना दुर्गा पूजा के मौके अथवा जाड़े के मौसम में कुहासा अधिक होने की स्थिति में जेल से भाग निकलने का था।

इस बारे नक्सलियों की तैयारी के बारे में पुलिस ने दावा किया है कि

जेल ब्रेक के लिए नक्सली जेल के अंदर बम विस्फोट अथवा गोलीबारी भी कर सकते थे।

दूसरी योजना जेल से अदालत जाने के वक्त भागने की थी।

अब मामले का पता चलने के बाद पुलिस ने अपनी तरफ से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

साथ ही इस साजिश में शामिल सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है।

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