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लेवी वसूलने के लिए अब रेकी करने लगे हैं नक्सली संगठन




  • क्रशर और कंस्ट्रक्शन कंपनियों में मजदूर बने हैं नक्सली

रांचीः लेवी वसूलने के लिए नक्सली नये-नये तरीके अपना रहे हैं। राजधानी रांची समेत कई अन्य शहरों में

नक्सली अपनी पहचान छिपा कर बड़े व्यवसायियों, कोयला कारोबारियों एवं रेललाइन,

सड़क और पुल निर्माण करने वाली कंपनियों में मजदूर बनकर काम कर रहे हैं।

ये नक्सली मजदूर बनकर जहां काम करते हैं, वहां की रेकी कर सारी जानकारी हासिल करते हैं।

फिर उगाही का रास्ता तैयार करते है और लेवी के तौर पर मोटी रकम वसूलते है।

झारखंड के जंगलों, कस्बों से निकलकर नक्सली अब शहरों की ओर बढ़ रहे हैं।

लेवी वसूलने के लिए नक्सलियों की इस नई रणनीति में अर्बन नक्सल उनके लिए मददगार साबित हो रहे हैं।

नक्सली संगठन अब झारखंड के सुदूर इलाकों तक सीमित नहीं है,

बल्कि देश के आंतरिक सुरक्षा के लिए घातक नक्सली,झारखंड के शहरी इलाकों में अपने पांव-पसार रहे हैं।

जंगलों में रहने वाले नक्सली अब राजधानी समेत कई अन्य शहरी इलाकों में डेरा जमा रहे हैं।

इतना ही नहीं, शहरों में नक्सलियों को पैर जमाने के लिए अर्बन नक्सली खुलकर इनकी मदद कर रहे हैं।

जिसका खुलासा हाल ही में हुई कुछ गिरफ्तारियां से हुआ।

मिली जानकारी के अनुसार, राजधानी रांची समेत राज्य के कई शहरों में नाम बदलकर रह रहे

नक्सली और नक्सली समर्थक जहां व्यापारियों और ठेकेदारों से लेवी वसूलने का काम करते हैं.

तो वहीं अपने नक्सली संगठनों को पुलिस की गतिविधियों की भी जानकारी देते रहते हैं।

ये लोग अपनी पहचान बदलकर किराये के मकान में रहते हैं और

वह दिनभर पुलिस की गतिविधियों की जानकारी हासिल करते हैं।

फिर फोन कर संगठन के एरिया कमांडर को इसकी जानकारी देते हैं।

पहचान छिपाकर नक्सलियों और नक्सल समर्थक के रहने की बात सामने आने पर

रांची पुलिस समेत राज्य के अन्य जिलों की पुलिस के द्वारा मकान मालिक को कड़े निर्देश दिए गए हैं।

मकान मालिक को स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि जिन्हें वह घर किराये पर दे रहे हैं,

उनके वोटर आइडी, गारंटर समेत कई अन्य डॉक्यूमेंट की जांच कर लें.लेवी वसूलने के लिए अब रेकी करने लगे हैं नक्सली संगठन

इसके अलावा स्थानीय लोग जो पिछले कई सालों से उन्हें जानते हैं,

उनसे भी जानकारी लें. इतना ही नहीं, किरायेदार का विस्तृत विवरण थाने में जमा करें।

अगर कोई मकान मालिक इसका पालन नहीं करता है और उसके घर से

उग्रवादी या उसके समर्थक पकड़े जाते हैं, तो मकान मालिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी।

लेकिन फिर भी इस नियम का कड़ाई से पालन नहीं किया जा रहा है।

रांची के तुपुदाना क्षेत्र से 7 अगस्त को उग्रवादी संगठन पीएलएफआइ के तीन कुख्यात उग्रवादी गिरफ्तार किए गए थे।

तीनों एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में मजदूर के तौर पर काम कर रहे थे, जिससे मौका मिलने पर

उस कंपनी से रंगदारी वसूली जा सके।

मामला सामने आने के बाद रांची एसएसपी अनीश गुप्ता ने जिले के सभी थानेदारों को निर्देश दिया कि

उनके क्षेत्र में जितने भी क्रशर और कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है,

उनके मालिकों से काम कर रहे मजदूरों का ब्योरा लें।

रांची के तुपुदाना ओपी की पुलिस ने तीन पीएलएफआइ संगठन के सदस्यों को गिरफ्तार किया था.

एक साल से तीनों उग्रवादी तुपुदाना इलाके में मजदूर बनकर रह रहे थे।

लोहरदगा शहरी क्षेत्र से पुलिस ने तीन नक्सली समर्थकों को 118 जिंदा कारतूस और

नक्सली पोस्टर-बैनर के साथ गिरफ्तार किया था।

देवघर के कुंडा स्थित एपी ऑथोर्पेडिक्स एंड ट्रॉमा सेंटर में बिहार अंतर्गत

जमुई जिले के चकाई थाना क्षेत्र के गोविंदपुर निवासी नक्सली सदस्य मंटू यादव अपना नाम बदलकर इलाज करा रहा था,

पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की पुलिस टीम ने

रांची के नामकुम से समाजवादी पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष केश्वर यादव उर्फ रंजन यादव को गिरफ्तार कर लिया।

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