किसानों पर तो अब देश की राजनीति को देश के लिए ध्यान देना ही होगा

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किसानों का एक बहुत बड़ा आंदोलन दिल्ली में होने की वजह से पूरी दिल्ली पुलिस सतर्क मुद्रा में रही।

सरकार भाजपा की है, इसलिए इस आंदोलन में भाजपा के नेताओं ने प्रत्यक्ष तौर पर भाग नहीं लिया

जबकि विरोधी दलों के नेताओं को किसानों के बीच से भी अपना चेहरा चमकाने का पूरा अवसर मिला।

लेकिन किसानों के जो मुद्दे हैं, उस पर अब भी सही तरीके से चर्चा नहीं होना ही

भारतीय राजनीतिक की सामाजिक विफलता है।

मौके का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी किसानों के बीच पहुंचे थे।

उन्होंने यहां भी किसानों की बात करते हुए दरअसल वर्तमान सरकार पर ही निशाना साधने का काम किया।

इससे मूल समस्या का समाधान निकलता नजर नहीं आता।

किसान मुक्ति मार्च में राष्ट्रीय लोक दल, तेलगू देशम पार्टी तथा स्वराज अभियान,

नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं सहित 208 संगठनों

और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

किसानों के बीच अन्य राजनीतिक दलों के नेता भी पहुंचे।

श्री गांधी ने मोदी सरकार पर किसानों तथा युवाओं की सुध नहीं लेने

और चंद पूंजीपतियों के हित में काम करने का आरोप लगाया

और उनकी पार्टी विपक्षी दलों के साथ मिलकर किसानों के हक की लड़ाई लड़ेगी।

उन्होंने कहा कि जो सरकार किसान का काम नहीं कर सकती है उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है और उसे रहने भी नहीं दिया जाना चाहिए।

किसानों के मंच से भी सरकार पर ही निशाना साधा राहुल ने

कांग्रेस अध्यक्ष जब किसानों को संबोधित कर रहे थे तो तब मंच पर

उनके साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के

सीताराम येचुरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा, नेशनल कांफ्रेंस के

फारुख अब्दुल्ला, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव,

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार, समाज वादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव सहित कई प्रमुख नेता मौजूद थे।

उन्होंने यह बात सही कहा कि परेशान होने के बाद ही देश भर के किसान अब दिल्ली आने पर मजबूर हुए हैं।

श्री गांधी ने कहा कि मंच पर मौजूद विपक्षी दलों के नेताओं की विचारधारा

एक नहीं हो सकती है लेकिन किसानों और युवाओं के मुद्दे पर हम सब एक हैं

क्योंकि किसान और युवा देश की ताकत हैं।

उन्होंने कहा कि किसान बीमा का पैसा जमा करने का विकल्प भी चहेते पूंजीपंतियों की बीमा कंपनियों को यह काम दे दिया है।

श्री केजरीवाल ने कहा कि देश का किसान दुखी होकर दिल्ली आया है।

किसान अपनी मांगों के लिए अपना काम छोड़कर आया है लेकिन सरकार उनकी नहीं सुनती है।

उन्होंने कहा कि जिस देश में किसान की बात नहीं सुनी जाती है वह देश प्रगति नहीं कर सकता।

श्री शरद यादव ने कहा देश का किसान परेशान है।

पूरे देश में कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा है लेकिन मोदी सरकार चंद पूंजी पतियों को फायदा पहुंचाने में जुटी है।

पूंजीपति बैंक का कर्ज दबाकर विदेश भाग रहे हैं लेकिन सरकार किसानों का कर्ज माफ नहीं कर पा रही है।

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की समस्या नहीं सुनी तो बम से भी ज्यादा आवाज में अब धमाका होगा और इस सरकार को जाना होगा।

किसानों की परेशानी बढ़ी तो देश भी संकट में आया

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में कृषि विकास दर घट गयी है और कृषि उत्पादों का लागत मूल्य लगातार बढने से किसान गहरे संकट में आ गए हैं।

नेशनल कांफ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि किसान देश की ताकत है लेकिन मोदी सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है इसलिए मजबूरन उन्हें अपनी मांग के लिए दिल्ली आना पड़ा है।

यह सरकार सिर्फ वोट के लिए घ्रुवीकरण करने में जुटी है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश का मुसलमान मंदिर बनाने के खिलाफ नहीं है।

उमर ने कहा कि राम सिर्फ हिंदुस्तान के नहीं हैं बल्कि राम पूरी दुनिया के हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर हिंदुस्तान का हिस्सा था, है और इसी का हिस्सा बना रहेगा।

यानी विरोधी दलों ने इस मंच से केंद्र सरकार को निशाने पर लेने का कोई मौका नहीं छोड़ा।

लेकिन केंद्र सरकार द्वारा फसल के समर्थन मूल्य की घोषणा के बाद भी आगे काम क्यों नहीं बढ़ पा रहा है, इस पर किसी का ध्यान नहीं गया। जैसे जैसे दिन बीत रहे हैं यह स्पष्ट होता जा रहा है कि देश के आर्थिक विकास के लिए ग्रामीण विकास जरूरी है।

यह ग्रामीण विकास मुख्य तौर पर कृषि के क्षेत्र में अधिक आर्थिक गतिविधियों से ही संभव है।

खेतों में रोजगार के जितने अवसर हैं, वे सरकारी स्तर पर पैदा ही नहीं किये जा सकते।

दूसरी तरफ खेतों से उपजे अनाज का पैसा जब गांव तक पहुंचता है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

इसलिए राजनीति से परे हटकर भी सिर्फ देश की भलाई और तरक्की के लिए भी किसानों का भला तो करना ही होगा।

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