नासा का वोयजर 2 यान अब तारा मंडल के करीब 1977 में भेजा गया यान

नासा का वोयजर 2 यान
  • यान पर बढ़ रहा है कॉस्मिक किरणों का प्रभाव

  • 170 खरब किलोमीटर की दूरी तय की यान ने

  • कैसे बनी सृष्टि की गुत्थी सुलझाना चाहते हैं

प्रतिनिधि



नईदिल्लीः नासा का वोयजर 2 यान अब तारों के बीच पहुंच चुका है। इस यान ने वर्ष 1977 में अपनी यात्रा प्रारंभ की थी। निरंतर अंतरिक्ष में सफर करते हुए

उसने अब तक करीब 170 खरब किलोमीटर की दूरी तय की है, जो इस पृथ्वी से सूर्य की दूरी से 118 गुणा है। यानी इतने समय में यह यान पृथ्वी से सूर्य तक की 118 बार यात्रा कर चुका है।

इस यान को अंतरिक्ष की स्थिति के अध्ययन के लिए ही भेजा गया है।

काफी पहले ही वैज्ञानिकों ने इस बात का पता लगा लिया था कि हमारे सौर मंडल के बाहर भी अनेक तारे और आकाश गंगा हैं।

इसके बाद आकाश गंगा के बीच ब्लैक होल की भी पहचान हो चुकी है।

इस ब्लैक होल की विशेषताओं पर लगातार शोध भी चल रहा है, जिसमें नये नये तथ्य निकल रहे हैं।

इसलिए सूर्य के चारों तरफ बना हमारे इस  सौर मंडल के बाहर क्या कुछ संचालित हो रहा है, इससे जानने में वैज्ञानिकों की रूचि है।

उनकी मंशा दरअसल इस पूरे सौरमंडल और बाहरी दुनिया के तैयार होने के असली कारणों को समझना ही है।

इसकी गतिविधियों पर नजर रखने वाले नासा के वैज्ञानिकों की मानें तो

यह यान अब तारों के बीच उस स्थान के करीब है, जिसे वैज्ञानिक इंटरस्टेलर स्पेस कहते हैं।

अब यान को अंतरिक्ष की कॉस्मिक किरणों का बेहतर एहसास भी हो रहा है।

नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक यह यान वर्ष 2007 से ही इस सौर मंडल के सबसे बाहरी आवरण यानी हेलियोस्फेटर के बाहर चला गया था।

इस आवरण को सूर्य और अन्य ग्रहों के घेरकर रखने वाले एक वायुमंडल के बुलबुले की तरह समझा जाता है।

नासा का यह दूसरा यान जो यहां तक पहुंचा है

इस दूरी को लांघ लेने के बाद ऐसा करने वाला यह दूसरा यान होगा।

इसके पूर्व वोयजर 1 भी इस परिधि को पार करने में सफल हुआ था।

इस यान से मिल रहे संकेतों के विश्लेषण के बाद नासा के वैज्ञानिकों ने बताया है कि

अब यान पर पहले के मुकाबले पांच प्रतिशत अधिक कॉस्मिक किरणों का प्रभाव महसूस किया जा रहा है।

इसके लिए यान में एक खास यंत्र लगाया गया है।

कॉस्मिक किरणों का प्रभाव नापने वाले इस यंत्र ने पिछले अगस्त से यह संकेत देना प्रारंभ किया है।

इस सौरमंडल के बाहर यह कॉस्मिक किरणें बहुत ही तेज गति से चलने वाली ऊर्जा है।

यह हमारे सौर मंडल के बाहर से आती हैं।

नासा के वैज्ञानिक संकेतों का अध्ययन कर रहे हैं

नासा के इस अभियान दल के वैज्ञानिक एड स्टोन ने कहा कि वोयजर 2 को मिल रहे संकेतों से हम समझ रहे हैं कि उसके आस-पास का माहौल अब बदल रहा है।

इसलिए उम्मीद है कि आने वाले समय में वैज्ञानिकों को इस सौर मंडल के बाहर की गतिविधियों

और स्थितियों के बारे में इस यान से मिलने वाले आंकड़ों की वजह से अधिक जानकारी मिल सके।



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