नासा का यान पार्कर सोलर प्रोव ने भेजी सूर्य की पहली तस्वीर

 नासा का यान पार्कर सोलर प्रोव ने भेजी सूर्य की पहली तस्वीर
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  • अपने अभियान में सूर्य के और करीब पहुंचा यान

  • वाशिंगटन के वैज्ञानिक सम्मेलन में हुई घोषणा

  • पहली बार सूरज को इतने करीब से देखने का मौका

  • इसके ठीक बीच का तापमान तीन सौ गुणा ज्यादा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः नासा का अंतरिक्ष यान पार्कर सोलर प्रोव सूर्य के और करीब पहुंच गया है।

इस यान ने अपनी यात्रा जारी रखते हुए सूर्य के बीच के हिस्से की पहली तस्वीर भेजी है।

इस अंतरिक्ष यान के सामने और पीछे कैमरे लगे हुए हैं।

जिनकी मदद से वह चित्र खींचता और नासा के अनुसंधान केंद्र तक भेजता रहता है।

अपनी इस यात्रा के क्रम में पार्कर ने अब तक के सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं।

वह सबसे तेज गति से चलने वाला अंतरिक्ष यान बन गया है

जबकि वह पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय करने वाला यान भी बना है।

वैज्ञानिकों ने 12 दिसंबर को वाशिंगटन में आयोजित एक वैज्ञानिक सम्मेलन में

नासा के इस यान द्वारा सूर्य की नई तस्वीर भेजे जाने की जानकारी सार्वजनिक की।

इस घोषणा का वहां मौजूद वैज्ञानिकों ने जोरदार तरीके से स्वागत भी किया।

जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के पदार्थ विज्ञानी नोउर रुआफी ने कहा कि

अब हम सूर्य को बिल्कुल नये आयाम से देख और समझ पा रहे हैं।

इससे पहले कभी भी सूरज को इस तरीके से और इतने करीब से नहीं देखा जा सका था।

नासा का यह यान सूर्य के 24 चक्कर लगायेगा

नासा का यह यान अपने मिशन के तहत सूर्य के कुल 24 चक्कर लगायेगा।

इस दौरान उसकी खास जिम्मेदारी सूर्य के ठीक बीच में तथा छोर पर होने वाले तमाम गतिविधियों पर नजर रखने की होगी।

पार्कर सोलर प्रोव अगले सात वर्षों तक इसी धुरी में घूमते हुए सूर्य के तमाम वैज्ञानिक आंकड़े

पृथ्वी पर अवस्थित शोध केंद्र तक भेजता रहेगा।

इस दौरान सूर्य से इस यान की दूरी करीब साठ लाख किलोमीटर की होगी।

गत 6 नवंबर को वह इस धुरी पर पहली बार चक्कर लगाने में कामयाब रहा था।

लेकिन तब वह सूर्य की तस्वीर भेजने की स्थिति में नहीं था।

नासा का यह यान सूर्य की प्रचंड गर्मी झेल सकता है

इस दौरान सूरज से उसकी दूरी करीब 240 लाख किलोमीटर थी।

यान को वहां की गरमी झेलने के लायक बनाकर ही भेजा गया है

क्योंकि वहां के अत्यधिक तापमान में अन्य उपकरण सिर्फ गर्मी की वजह से ही पिघल सकते हैं।

वर्तमान में यह यान पौने चार लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चक्कर लगा रहा है।

सूरज की रोशनी के दायरे में वह पहली बार 7 दिसंबर को आया है।

इस बार वैज्ञानिकों को सूरज के ठीक मध्य को देखने में मदद मिली है।

सूरज के इस बीच के हिस्से को वैज्ञानिक भाषा में कोरोना कहा जाता है।

यान द्वारा भेजी गयी पहली तस्वीर में वहां से उठते प्लाज्मा तरंगों को कैद किया गया है।

अनुमान है कि सूर्य की औसत गर्मी के मुकाबले यह बीच का हिस्सा करीब तीन सौ गुणा अधिक गर्म है।

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इस यान पर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि

यान द्वारा भेजा गये आकड़ों का पांचवा हिस्सा ही अभी मिल पायेगा।

शेष आकड़े अगले वर्ष के मार्च और मई के बीच उपलब्ध होंगे

क्योंकि इस बीच यान फिर से संपर्क माध्यम से दूर अपनी धुरी पर आगे बढ़ जाएगा।

दोबारा इस धुरी पर पृथ्वी के संपर्क में आने के बाद ही शेष आंकड़े पृथ्वी तक पहुंच पायेंगे।

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