उल्कापिंड बेन्नू पर उतर गया नासा का यान ओसिरिस रेक्स

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  • वैज्ञानिकों के दीर्घकालीन अनुसंधान का पहला चरण सफल हुआ

  • वर्ष 2016 में रवाना किया गया था

  • उसके अपना ट्विटर एकाउंट भी चालू

  • नमूना लेकर वापस लौटेगा अंतरिक्ष यान

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः उल्कापिंड बेन्नू का पीछा अब वैज्ञानिक आंखें निरंतर करती रहेंगी।

नासा द्वारा छोड़ा गया एक अंतरिक्ष यान इस उल्कापिंड पर सकुशल उतर चुका है।

ओसिरिस रेक्स नामक इस यान को बेन्नू  के नमूने लाने के लिए ही भेजा गया था।

इस काम को पूरा करने के बाद यान को फिर से पृथ्वी पर वापस लौट आना है।

पृथ्वी के अनुसार सोमवार को यह यान पर सफलतापूर्वक उतर गया।

नासा के वीडियो में देखिये अभियान की जानकारी

वह पिछले दो वर्षों से इस उल्कापिंड का पीछा कर रहा था और उसकी धुरी पर आने के बाद उसे उल्कापिंड पर उतरना था।

योजना का यह पहला चरण ठीक ठाक पूरा हुआ है।

नासा की घोषणा के मुताबिक सोमवार को 10 बजकर 40 मिनट (अंतर्राष्ट्रीय स्टैडर्ड टाइम) पर यह यान उतरने में कामयाब हुआ।

इस यान की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले केंद्र के अभियंता सह वैज्ञानिक लॉकहेड मार्टिन ने इसके उतरने की घोषणा की।

कोलाराडो स्थित नियंत्रण केंद्र के लोगों ने इस यान के प्रथम चरण का अभियान सफल होने पर खुशियां भी मनायी।

इस केंद्र में हो रहे घटनाक्रमों का नासा टेलीविजन पर सीधा प्रसारण भी किया गया।

अंतरिक्ष यान के वहां उतरने के बाद जो प्रारंभिक आंकड़े प्राप्त हुए हैं, उसके मुताबिक यह उल्कापिंड करीब पांच सौ मीटर चौड़ा है।

यह आकार में किसी छोटे पहाड़ जैसा है।

आकार में इतने छोटे उल्कापिंड पर किसी यान के उतरने की यह पहली घटना है।

इस उल्कापिंड पर अधिक ध्यान इस वजह से दिया जा रहा है क्योंकि इसके वर्ष 2135 में पृथ्वी से टकराने की आशंका है।

वैसे भी यह आशंका बहुत कम है लेकिन वैज्ञानिक इस अल्पतम आशंका को भी नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं।

उल्कापिंड के नमूने से पता चलेगा सौरमंडल की रचना कैसे हुई

उल्कापिंड पूरी तरह कार्बन से परिपूर्ण है।

इस पर यान उतारने की एक और वजह उसकी धुरी भी है जो पृथ्वी के सूर्य के चारों तरफ चक्कर काटने की धुरी से मिलती जुलती है।

इस उल्कापिंड से नमूना आने के बाद इस पूरे सौर मंडल की रचना के बारे में नई जानकारी भी मिल सकती है।

इसी सोच के साथ यान को वहां भेजा गया है।

नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के प्रवक्ता मिशेल थालेर ने कहा कि

इस एक उल्कापिंड के नमूनों की जांच से हमें करोडों वर्ष के सौर मंडल के इतिहास के

बारे में काफी कुछ नया जानने को मिल सकती है।

इसलिए वैज्ञानिकों की नजर में इसका नमूने सोना से भी बेशकीमती माने जा रहे हैं।

गत सितंबर 2016 में इस अंतरिक्ष यान को रवाना किया गया था।

अपनी तय धुरी पर आगे बढ़ते हुए इस अंतरिक्ष यान ने पहले बेन्नू की धुरी पर खुद को स्थापित किया।

उसके बाद वह उस पर उतर गया जबकि उल्कापिंड की तब पृथ्वी से दूरी करीब 12 करोड़ 90 ला किलोमीटर थी।

वैज्ञानिकों ने पहले से ही इस अंतरिक्ष यान ओसिरिक्स रेक्स का एक ट्विटर एकाउंट भी बना रखा है।

जिसके जरिए यान द्वारा भेजे जा रहे आंकड़ों के आधार पर दुनिया को जानकारी भी दी जा रही है।

अब उल्कापिंड के अंदर का जायजा लेते हुए यह यान नमूने एकत्रित करता रहेगा

और बाद में वहां से उड़कर पृथ्वी पर वापस आयेगा।

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