नासा के वैज्ञानिकों ने दुनिया के लिए दोहरे खतरे की चेतावनी दी

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  • ग्लेशियर की नीचे बहुत बड़ा गड्डा

  • गर्म समुद्र की वजह से बेमौसम बरसात

  • सैटेलाइट चित्रों से विशाल गड्डे का पता चला

  • 160 किलोमीटर इलाके पर रखी जा रही नजर

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः नासा के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर मंडराते दोहरे खतरे की चेतावनी दी है।

नासा की पहली रिपोर्ट में बताया गया है कि अंटार्कटिका के मुख्य ग्लेशियर के नीचे एक बहुत बड़ा गड्डा हो गया है।

समुद्र के अंदर का यह गड्डा ऊपर से नजर नहीं आता।

लगातार नमकीन समुद्री जल की वजह से यह अंदर से और भी कटता जा रहा है।

इससे कभी भी यह पूरा ग्लेशियर अथवा इसका बहुत बड़ा हिस्सा समुद्र में समा सकता है।

यदि ऐसा हुआ तो समुद्र में काफी दूर तक बड़ी सुनामी का असर पैदा होगा।

नासा के वीडियो में देखिये कैसे पिघल रहा है वहां का बर्फ

दूसरी तरफ नासा ने समुद्र के पानी का तापमान लगातार बढ़ने की वजह से मौसम बिगड़ने की चेतावनी भी दी है।

इसमें बताया गया है कि समुद्र का पानी गर्म होने की वजह से अनेक इलाकों में बेमौसम और भारी बारिश होगी।

इससे भी जनजीवन अस्तव्यस्त हो सकता है।

नासा के मुताबिक अंटार्कटिका के पश्चिम में एक बड़े और मुख्य ग्लेशियर के नीचे बने इस गड्डे का पता सैटेलाइट चित्रों से चला है।

यह करीब तीन सौ मीटर ऊंचा है और काफी गहराई तक है।

यहां का बर्फ तेजी से पिघलने की वजह से भी समुद्र में पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है।

पानी के अंदर ही बर्फ के गलने की वजह से ऊपर से इस खतरे का पता भी नहीं चल पाता है।

लेकिन अंदर ही अंदर ग्लेशियर खोखला होता जा रहा है।

इस वजह से वह कभी भी समुद्र के अंदर समा सकता है।

अब वैज्ञानिक इस बर्फ के पिघलने की गति का आकलन कर रहे हैं

ताकि समय रहते लोगों को अंटार्कटिका के इस बहुत बड़े ग्लेशियर के टूटकर समुद्र में समाने की पूर्व चेतावनी दी जा सके।

वैज्ञानिकों का प्रारंभिक अनुमान है कि इस गड्डे के प्रभाव में आने वाले बड़े ग्लेशियर में करीब 14 खरब टन बर्फ हो सकता है।

इसलिए समझा जा सकता है कि इतना अधिक बर्फ अचानक समुद्र में आने का खतरनाक प्रभाव कैसा होगा।

नासा ने कहा आधुनिक उपकरणों से पहली बार पता चला

नासा के जेट प्रापल्सन लैबोरोटरी के एरिक रिगनॉट ने कहा कि इस बात का अनुमान तो पहले से ही था कि यहां का बर्फ अंदर से पिघल गया है।

लेकिन यह इलाका इतना खोखला हो चुका है, इसका पता आधुनिक सैटेलाइट चित्रों से ही चल पाया है।

जहां यह स्थिति बनी है, वहां बर्फ के पिघलने की वजह से समुद्र में करीब चार प्रतिशत तक पानी जाता है।

इसलिए अगर पूरा ग्लेशियर एकसाथ समुद्र में गिरा तो समुद्र में करीब 2.4 मीटर पानी की ऊंचाई बढ़ जाएगी।

इसके गिरने से उत्पन्न सुनामी की चपेट में समुद्र के किनारे बसे अधिकांश इलाके आयेंगे।

अब उस क्षेत्र के 169 किलोमीटर लंबे इलाके पर लगातार नजर रखी जा रही है

ताकि समुद्र के अंदर होने वाली किसी भी बड़ी हलचल का तुरंत पता लगाया जा सके।

नासा ने कहा समुद्र का तापमान बढ़ा तो होगी बेमौसम बारिश

दूसरी तरफ नासा के इसी प्रयोगशाला ने समुद्र में पानी के तापमान के लगातार बढ़ने पर भी चेतावनी दी है।

कई इलाकों में समुद्री जल का तापमान 28 डिग्री से अधिक हो गया है।

इससे आस-पास के इलाको में बारिश की स्थिति बनेगी क्योंकि गर्म समुद्र का पानी भाप बनकर आसमान में जाने के बाद बादल बनकर ठंडे इलाकों में बारिश बनकर वापस आयेगी।

एक सामान्य आकलन में पाया गया है कि इस तापमान के दायरे में

करीब 25 किलोमीटर का इलाका आता है, जहां तीन मिलीमीटर प्रति घंटे की दर से बारिश होने लगती है।

साथ ही यह भी बताया गया है कि एक डिग्री तापमान बढ़ने की वजह से समुद्र में तूफान आने में भी 21 फीसद की बढ़ोत्तरी होती है।

वैज्ञानिक पहले से इस बात के लिए दुनिया को आगाह कर चुके हैं कि

इस सदी के अंत तक समुद्र के जल का तापमान 2.7 डिग्री तक बढ़ जाएगा।

इसकी वजह से दुनिया के अनेक देशों के बड़े महानगर भी समुद्र के अंदर समा जाएंगे।

कई इलाकों में लगातार समुद्र का पानी महानगरों के अंदर आने की वजह से अब लोग इलाका छोड़ रहे हैं।

कुछ अमेरिकी महानगरों में अब तो समुद्री जीव भी रात के अंधेरे में

पानी के साथ ही शहर के अंदर चले आ रहे हैं। इससे भी जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

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