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नासा अब मंगल ग्रह पर रोबोट कुत्ता भेजने की तैयारी में

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैश यह यंत्र मानव जांच में सफल

  • आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस से युक्त है यह यंत्र मानव

  • दूसरे रोवरों के मुकाबले अधिक तेज गति से चलेगा

  • चलते वक्त इलाका और परिवेश को भी समझ लेगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः नासा अब मंगल ग्रह पर अपने नये अभियान की तैयारियों में जुटी हुई है। इसके

तहत वहां रोबोट भेजने की योजना है। यह रोबोट भी दरअसल कुत्ते के आचरण को ध्यान

में रखते हुए तैयार किया गया है। इस लिहाज से यह कहा जा सकता है कि नासा अब इस

मंगल अभियान में रोबोट कुत्ता वहां उतरेगी। चार पैरों वाला यह रोबोट कृत्रिम बुद्धिमत्ता

से लैश है। इसलिए हर समय उसे नियंत्रण अथवा संचालित करने के लिए बाहरी निर्देश की

आवश्यकता नहीं पड़ती। इसकी डिजाइन कुछ ऐसी है कि वह मंगल ग्रह के उबड़ खाबड़

इलाको में भी अपने चार पैरों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से न सिर्फ चल पायेगा बल्कि

जिन जिम्मेदारियों के साथ वह जा रहा है, उसे निभा लेगा। गत 14 दिसंबर को इस रोबोट

कुत्ते के एक प्रोटोटाइन का ऑनलाइन प्रदर्शन अमेरिकन जिओफिजिकल यूनियन की

बैठक में किया गया है।

वीडियो में देखिये यह रोबोट कुत्ता कैसे काम करता है

 

मंगल ग्रह पर उसके पूर्व भी कई यान भेजे गये हैं। उनमें से प्रिजरवेंस सबसे नया रोवर है।

इसके पहले स्पीरिट, ऑपुरच्युनिटी और क्यूरिसिटी रोवर भी वहां शोध कर रहे हैं। लेकिन

पूर्व के तमाम रोवरों के मुकाबले यह रोबोट कुत्ता अपनी संरचना की वजह से ज्यादा काम

कर पायेगा। इस रोबोट की तुलना में दूसरे रोवर उतना बेहतर तरीके से चल फिर नहीं पाते

थे। इस कुत्ता रोबोट के बारे में उसे बनाने वालों ने बताया है कि यह अपनी कृत्रिम

बुद्धिमत्ता की वजह से कई आपातकालीन कार्य अपनी दिमाग में बैठे संकेतों की वजह से

खुद ही कर लेता है। साथ ही अपनी चार टांगों और नजर के तालमेल से वह उबड़ खाबड़

इलाको में बेहतर तरीके से चल सकता है। इसमें लगे सेंसर ही उसे यह बता देते हैं कि

सामने किसी किस्म का अवरोध है। लिहाजा अगर अवरोध पार करने के लायक नहीं हुआ

तो यह अपना रास्ता बदलकर आगे बढ़ा है। प्रयोगशाला में कई रास्तों, बंद सुरंगों अथवा

घूमावदार रास्तो में उसकी सफल जांच हो चुकी है। इस रोबोट का नाम एयू स्पॉट रखा

गया है। याद रहे कि इस किस्म के पहले रोबोट का नाम स्पॉट ही था, जिसे बोस्टन

डायनामिक्स ने तैयार किया था। इसे तैयार करने में साठ से अधिक वैज्ञानिकों और

इंजीनियरों ने काम किया है। एक एक कर उसके सारे कल पूर्जे तैयार किये गये हैं और

हरेक को उसकी जरूरत के मुताबिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस से

जोड़ा गया है। इसमें जो खास किस्म के साफ्टवेयर डाले गये हैं, वह इलाके का मैप भी

अपनी दिमाग में दर्ज कर सकता है। साथ ही चलते वक्त अपने आस पास के परिवेश के

आंकड़े भी दर्ज कर लेता है।

नासा अब मंगल पर अधिक जानकारी चाहता है

दरअसल मंगल ग्रह पर अब तक भेजे गये सारे रोवर सिर्फ समतल सतह पर ही चल पाते

थे। लेकिन यह बार बार समझा जा रहा है कि वहां के उबड़ खाबड़ इलाकों से भी आंकड़ों को

हासिल करना उस ग्रह को समझने के लिए जरूरी है। पहले के रोवर इन इलाकों में अगर

चले गये तो उनके उलट जाने का खतरा है लेकिन यह रोबोट कुत्ता इन खतरों से मुक्त है।

यहां तक कि किसी कारण से उलट जाने पर वह खुद को फिर से खड़ा भी कर सकता है।

इसे तैयार करते वक्त इसके वजन पर भी ध्यान रखा गया है। वर्तमान में मंगल ग्रह पर

मौजूद रोवरों के मुकाबले यह 12 गुणा हल्का है। इसलिए उसके आगे बढ़ने की गति भी

तेज हो गयी है। प्रयोग के दौरान यह तीन मील प्रति घंटे की रफ्तार से उबड़ खाबड़ इलाकों

में चलता हुआ पाया गया है। जरूरत पड़ने पर यह अधिक गति भी हासिल करने की

क्षमता रखता है। अभी इसकी जांच चल रही है और उसे मंगल ग्रह पर जाने के बाद

लगातार अनुसंधान के आंकड़े जुटाने के लायक बनाया जा रहा है। इसका मकसद वहां

जाने वाले इस रोबोट कुत्ते की मदद से प्राप्त होने वाले आंकड़ों की बदौलत वहां की स्थिति

के बारे में नासा अब पहले से अधिक जानकारी हासिल कर सके।

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