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नरेंद्र मोदी के बारे में भागलपुर के दो युवा इस कार्यकाल से असंतुष्ट

  • प्रधानमंत्री को अब प्रचार नहीं काम करना चाहिए

  • नीतीश कुमार हमारी व्यक्तिगत पसंद हैं

  • सुशासन बाबू इसबार कमजोर साबित हुए

  • युवाओं को राज्य में अवसर मिलना चाहिए

दीपक नौरंगी

भागलपुरः नरेंद्र मोदी के बारे में आम तौर पर राजनीति से जुड़े लोग सीधा बयान देने से

परहेज करते हैं। लेकिन भागलपुर के दो युवाओं ने इस बारे में सीधी और तीखी टिप्पणी

कर दी है। दोनों की नाराजगी कोरोना काल में परीक्षा लेने से प्रारंभ होकर कोरोना वैक्सिन

पर कोई खास प्रयास नहीं करने को लेकर है।

वीडियो में देखिये दोनों युवा क्या सोचते हैं

इन दोनों से भागलपुर के एक उद्यान में हुई बातचीत का एक खास हिस्सा शुद्ध तौर पर

राष्ट्रीय और प्रादेशिक राजनीति पर आधारित था। दोनों युवा गौतम और अंकित शिक्षित

हैं और इसी वजह से कोरोना काल में अनुरोध के बाद भी जबरन परीक्षा आयोजित कराये

जाने की वजह से भी नरेंद्र मोदी से खफा है। इस बार में गौतम का कहना था कि नरेंद्र मोदी

का इस बार का कार्यकाल निराश करने वाला साबित हो रहा है। उसकी राय में श्री मोदी को

सिर्फ विज्ञापन करने के बदले अब वास्तविकता के धरातल पर उतरकर काम करना

चाहिए। दरअसल जब श्री मोदी किसी बात को कहते हैं तो उसके जैसे अनेक लोग उसे सच

मान लेते हैं। दूसरी तरफ जब वास्तविक परख का वक्त आता है तो पता चलता है कि

धरातल पर ऐसा कुछ भी नहीं है। ऐसी स्थिति में निराशा का भाव उपजता है। प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी का इस बार का कार्यकाल निश्चित तौर पर कुछ ऐसा ही है। इससे उनकी

लोकप्रियता तेजी से घटती जा रही है।

बिहार के मुद्दे पर दोनों ने कहा कि नीतीश कुमार का इस बार का कार्यकाल अपेक्षाकृत

कमजोर साबित हुआ है। इसके बाद भी पहले दो कार्यकाल में नीतीश कुमार ने बिहार के

विकास के लिए जितना कुछ किया है, वह कोई कम नहीं है। सड़कों की दशा सुधारने से

लेकर रोजगार सृजन तक नीतीश कुमार की पिछली सरकारों की उपलब्धि है।

नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भी नीतीश कुमार बेहतर 

दोनों युवक राजनीति के कई मुद्दों पर भिन्न भिन्न राय रखते हैं। वर्तमान राजनीतिक

घटनाक्रमों पर भी उनकी नजर है। इसलिए वह मानते हैं कि अगर नीतीश कुमार इस

गठबंधन से अलग हटकर लड़ते तो शायद उसके निजी चरित्र और उपलब्धियों की वजह से

उनका प्रदर्शन इस बार भी बेहतर होता। बिहार में नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के बीच वे

दोनों नीतीश कुमार के ही पक्षधर हैं। दोनों ने इस बात को भी स्वीकार किया कि चिराग

पासवान के फैसलों से नीतीश कुमार की राजनीति पर प्रभाव पड़ने जा रहा है। लेकिन साथ

ही गौरव यह कहने से नहीं चूके कि नीतीश कुमार के मुकाबले फिलहाल तो चिराग

पासवान की कोई राजनीतिक हैसियत ही नहीं है।

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