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सत्ता से प्रत्यक्ष जुड़ाव के नरेंद्र मोदी के दो दशक

सत्ता से प्रत्यक्ष तौर पर उनका जुड़ाव गत सात अक्टूबर 2001 से प्रारंभ हुआ तो अब तक

जारी है। इससे पहले वह गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे और वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री हैं।

लिहाजा इन दो दशकों के घटनाक्रमों पर अगर गौर करें तो हम पाते हैं कि आप नरेंद्र मोदी

के विचारों से असहमत हो सकते हैं लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते। पहले

गुजरात और बाद में देश की जनता जिनकी बातों से प्रभावित हैं, उन्हें नजरअंदाज कर

दरअसल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे बड़ी भूल है। शायद इसी वजह से आज नरेंद्र मोदी

दुनिया के सबसे बड़े नेताओं में से एक बन गये हैं। लेकिन इन दो दशकों में उनकी जो

विशेषता सामने आती है, वह है समय के साथ साथ खुद को और खुद को विचारों को

बदलना और निरंतर परिष्कृत करना है। इस कड़ी में उनका नारा सबका साथ सबका

विकास का उनका सिद्ध मंत्र कारगर सिद्ध हुआ हैं। इस कार्यपद्धति का सबसे बड़ा उदाहरण

है कोरोना काल। कोरोना काल के प्रारंभ से लेकर अनलॉक 5 तक श्री मोदी का यह प्रयास

रहा कि ऐसा क्या किया जाएं जिससे देश का जनमानस महामारी की चपेट से बचें। इस

दिशा में प्रशासनिक के साथ साथ उनके आध्यात्मिक नुस्खो से जनमानस को व्यस्त

रखने में सफल हुए। आलोचना की दृष्टि से हर शासक की गलतियाँ ढूंढना आसान है,

लेकिन सच को स्वीकार करना और पचाना आलोचकों के लिए कठिन है। लेकिन

जनोन्मुखी शासक अपना काम करता है, उस कसोटी पर श्री नरेन्द्र मोदी खरे उतरे हैं। श्री

नरेन्द्र मोदी 7 अक्टूबर 2001 से 2014 तक सतत गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं। 2014 से

अब तक प्रधानमंत्री रहते हुए 7 अक्टूबर 2020 को कामयाब शासन संचालन के 20 वर्ष

पूर्ण किये।

सत्ता से प्रत्यक्ष जुड़ाव की शुरुआत 2001 से

इस अवसर पर एक ट्विट के माध्यम से उन्होंने कहा कि “बचपन से मेरे मन में एक बात

संस्कारित हुई कि जनता जनार्दन ईश्वर का रूप होती हैं और लोकतंत्र में ईश्वर की तरह ही

शक्तिमान होती है। इतने लंबे कालखंड तक देशवासियों ने मुझे जो जिम्मेदारियां सोंपी है,

उन्हें निभाने के लिए मेंने पूरी तरह प्रामाणिक प्रयास किये है। आज जिस प्रकार देश के

कोने-कोने से आप सबने आशीर्वाद और प्रेम बरसाया है, उसका आभार प्रकट करने के लिए

आज मेरे शब्दों की शक्ति कम पड़ रहीं हैं। देश सेवा, गरीबों के कल्याण और भारत को

नयी ऊंचाईयों पर ले जाने का हमारा जो संकल्प हैं, उसे आपका आशीर्वाद, आपका प्रेम

और मजबूत करेगा। श्री नरेन्द्र मोदी के 2001 से लेकर 2020 तक की शासन यात्रा का देश

विदेश के ज्योतिष शास्त्रियों और विद्वानों ने भी अपनी अपनी कसौटी पर परखा है

दूसरी तरफ राजनीतिक समझ रखने वाले यह मानते हैं कि अपने इन्हीं गुणों की वजह से

लंबे समय तक विश्व की राजनीति पर उनका स्थान बना रहेगा, विगत वर्षों में वो नेता के

दर्जे से कहीं उपर उठकर महापुरुष यानि पेट्रियोट के स्थान पर आ गये हैं। भारत में

विभिन्न घटनाओं पर उनकी चुप्पी को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया हैं, लेकिन एक प्रसिद्ध

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार इसे एक अच्छे प्रशासक का अच्छा गुण मानते हैं। चाहे गुजरात के

मुख्यमंत्री का काल हो या भारत के प्रधानमंत्री का कार्यकाल श्री नरेन्द्र मोदी अपने ढंग से

अपने मापदंड के आधार पर शासन करने के लिए भारत में हीं नहीं संपूर्ण विश्व में अपनी

एक अलग छाप बना चुके हैं। कई फैसलों पर आलोचना के बाद भी कई साहसिक फैसलों

की वजह से जनता का बहुमत उन्हें दूसरे नेताओं से अलग मानता है, यह बड़ी बात है।

आज के दौर में सरकार के सबसे बड़े यूएसपी खुद मोदी

सतत चलते रहना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व का यूएसपी है, अविचलित

लेकिन अविरल। ऐसे नेता आलोचना के शिकार भी होते हैं, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के

साथ भी ये बात जुड़ी हुई है नोट बंदी हो या सीएए हो या चीन के साथ अपनी रण नीति पर

चुप्पी या तीन कृषि सुधार कानून वो आलोचना के शिकार हुए। इसके विपरीत राम

जन्मभूमि मे भूमि पूजन उनके कार्यकाल का एक उत्कृष्ट कार्य है, जिसे हमेशा याद रखा

जाएगा। जनसंघ से लेकर भाजपा तक कश्मीर से 370 हटाने का कार्य एक दुरूह स्वप्न

था। उनके साहस ने साकार किया। सत्ता से प्रत्यक्ष जुड़ाव आने वाले समय में राष्ट्र 

निर्माण में एक मिल का पत्थर साबित होगा। 2014 मे सत्ता संभालने के बाद उन्होंने देश

में डिजिटल क्रांति का सूत्रपात किया, तब भी विपक्ष की आलोचना का शिकार होना पङा।

लेकिन लॉकडाउन की विवशता और कोरोना महामारी के दौरान व्यापार को जारी रखकर

जनता को सुविधा उपलब्ध कराने और वर्क टू हम के जरिए रोजगार को बचाने की दिशा में

डिजिटल क्रांति के योगदान को विस्मृत करना नामुमकिन होगा। जैसे श्री राजीव गांधी को

भारत में आई टी क्रांति का जनक माना जाता है, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी डिजिटल

क्रांति के जनक के रूप में जाने जाएंगे।


 

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