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संसद में कृषि कानूनों का उल्लेख कर किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील की

  • सुधारों को मौका दें और देश को आगे बढ़ायें: मोदी

  • राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा में बोले

  • विरोधियों के संशोधन सुझाव अस्वीकृत हुए

  • आंदोलनजीवियों से देश को बचने की जरूरत

एजेंसियां

नयी दिल्ली : संसद में कृषि कानूनों का फिर से उल्लेख करते हुए  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

ने देश तथा किसानों के उज्जवल भविष्य के लिए इसे जरूरी बताते हुए किसानों से

आंदोलन वापस लेने की अपील की। राज्य सभा में आज विपक्षी दलों , विभिन्न संगठनों

और आंदोलनकारियों से अच्छे सुझाव देने तथा बातचीत के जरिये मिलकर मुद्दे का

समाधान कर देश को आगे बढने देने का आह्वान किया। श्री मोदी ने राज्यसभा में

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का सोमवार को जवाब देते हुए

कहा कि ये सुधार कृषि क्षेत्र तथा देश के उत्थान के लिए बेहद जरूरी हैं इसलिए किसी को

भी देश तथा विशेष रूप से आंदोलनकारियों को गुमराह नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें

समझाना चाहिए साथ ही देश के विकास में बाधा बनने वाले लोगों को पहचानने की

जरूरत है। संसद में कृषि कानूनों पर प्रधानमंत्री के जवाब के बाद सदन ने विपक्षी सदस्यों

के सभी संशोधनों को नामंजूर करते हुए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को

ध्वनिमत से पारित कर दिया। विपक्ष के सर्वश्री तिरूचि शिवा, एम षणमुगम , दीपेन्द्र

हुड्डा, विशम्भर प्रसाद निषाद, छाया वर्मा , विकास रंजन और ई करीम सहित अनेक

सदस्यों ने संशोधन के प्रस्ताव दिये थे जिन्हें सदन ने ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।

संसद में कृषि कानूनों पर खास तरीके से अपनी बात रखते हुए श्री मोदी ने कहा कि

कोरोना महामारी के इस कालखंड में दुनिया को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है

लेकिन भारत ने इस चुनौती में भी अवसरों को खोज निकाला और दिखा दिया कि यह

अवसरों की भूमि है।

संसद में कृषि कानूनों के अलावा कोरोना संकट का भी उल्लेख किया

कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाये गये कदमों और उनसे मिली

सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कि यह लड़ाई जीतने का यश किसी सरकार को नहीं

जाता है, किसी व्यक्ति को नहीं जाता है लेकिन हिंदुस्तान को अवश्य जाता है और इस पर

सबको गर्व करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानूनों पर चल रहे किसान आंदोलन

को वापस लेने की अपील करते हुए सोमवार को दोहराया कि उनकी सरकार गरीबों को

समर्पित सरकार है और गरीबी उन्मूलन के लिए कृषि सुधार जरूरी है। किसान आंदोलन

के चलते देश और दुनिया में सरकार की आलोचना करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि लोगों को गुमराह करने वाली ताकतों को

पहचानने तथा इनसे बचने की जरूरत है। श्री मोदी ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि

श्रमजीवी और बुद्धिजीवी जैसे शब्द तो सबने सुने होंगे लेकिन अब एक नयी जमात और

एक नयी बिरादरी सामने आयी है और वह है ‘आंदोलनजीवी’। 

उन्होंने कहा कि ये लोग हर आंदोलन में नजर आयेंगे चाहे वह वकीलों , छात्रों या किसी

अन्य का आंदोलन हो। उन्होंने कहा कि ये हर आंदोलन में घुस जाते हैं कहीं आगे से तो

कहीं पीछे से और यह पूरी टोली है। उन्होंने कहा, ‘‘ ये लोग आंदोलन के बिना नहीं जी

सकते इन्हें पहचानने तथा इनसे बचने की जरूरत है। देश आंदोलनजीवी लोगों से बचें।

उन्होंने कहा कि वैसे तो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से देश में विकास होता है

लेकिन अभी देश को एक नये तरह के एफडीआई से दो-चार होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा

कि यह एफडीआई ‘फोरन डिस्ट्रक्टीव आइडियोलॉजी’ है और देश को इससे बचना है

इसके लिए सभी को जागरूक रहने की जरूरत है

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