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नागालैंड शांति समझौता वार्ता विफल मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ीं

  • अलग झंडा और संविधान की मांग जारी

  • भारत ने दोनों मांग मानने से इंकार किया

  • विद्रोहियों ने कहा कोई करिश्मा ही बचा सकता है

  • राज्यपाल और वार्ताकार के बीच भी मतभेद उजागर

  • मोदी को “गोपनीय” पत्र , “तीसरे देश” में बातचीत करने का प्रस्ताव

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : नागालैंड शांति समझौता वार्ता विफल होने से केंद्र में मोदी सरकार की मुश्किलें

बढ़ती नजर आने लगी हैं। नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इस्साक मुइवा

(एनएससीएन-आईएम) ने अलग ध्वज और संविधान की मांग पर एक बार फिर केंद्र के

साथ महत्वपूर्ण बैठक विफल हो गया।जहां एनएससीएन-आईएम अलग नगा झंडे

और संविधान को लेकर अपने रुख पर कायम है। साथ ही केंद्र अपनी बात पर अड़ा भी है

कि अलग झंडा और संविधान देना संभव नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नगा शांति

समझौते के लिए वार्ताकार और नागालैंड के राज्यपाल आरएन रवि को 31 अक्टूबर तक

का समय दिया था।

हालांकि, सभी नगा आदिवासी समूहों के शीर्ष संगठन, नागा होहो ने आज दावा किया कि

नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इस्साक मुइवा (एनएससीएन-आईएम) ने

एक मसौदा समझौते पर हस्ताक्षर करने के आधार पर एक अलग ध्वज और संविधान की

मांग की थी। लेकिन गृह मंत्रालय और प्रधान मंत्री कार्यालय स्पष्ट करते हैं कि नागालैंड

के लिए अलग झंडा और संविधान संभव नहीं है। नगा होहो ने दावा किया कि इस समझौते

पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में संगठन ने केंद्र के वार्ताकार के साथ 2015 में

हस्ताक्षर किए थे।

नागालैंड शांति समझौता के टूटने से इलाके में हिंसा बढ़ेगी

नगा होहो के प्रमुख एचके झीमोमी ने यह भी कहा कि जब तक कोई करिश्मा नहीं होता,

एनएससीएन-आईएम के शीर्ष नेतृत्व और केंद्र के वार्ताकार एवं नगालैंड के राज्यपाल

आरएन रवि के बीच मौजूदा दौर की वार्ता का कोई नतीजा निकलने की संभावना नहीं है।

नागालैंड का सबसे सशस्त्र विद्रोही समूह एनएससीएन-आईएम (नेशनल सोशलिस्ट

काउंसिल ऑफ नगालैंड- इसाक-मुइवा) ने कहा कि बिना अलग झंडे और संविधान के

भारत की केंद्र सरकार के साथ शांति समझौते का सम्मानजनक समाधान नहीं निकलेगा।

एनएससीएन-आईएम का ये कठोर रुख ऐसे समय में आया है जब नागालैंड के राज्यपाल

और वार्ताकार आरएन रवि के बीच मतभेदों के कारण शांति वार्ता गतिरोध का सामना कर

रही है। एनएससीएन-आईएम ने एक बयान में कहा कि सभा ने सर्वसम्मित से इस

प्रस्ताव को पारित किया है, जो एनएससीएन-आईएम के कथन को दोहराता है।

विद्रोह समूह चाहता है कि नागा राष्ट्रीय झंडा और संविधान, भारत-नागा राजनैतिक

समाधानों का हिस्सा जरूर बनें और सौदे को सम्मानजनक और स्वीकार्य के रूप में योग्य

बनाएं। इस बयान में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार और एनएससीएन-आईएम

अंतिम सहमति पर जरूर पहुंचे जो कि तीन अगस्त 2015 को ऐतिहासिक फ्रेमवर्क

समझौते पर किए गए हस्ताक्षर पर आधारित हो। नागालैंड शांति समझौता में

एनएससीएन-आईएम के तीन ज़ेलियानगॉन्ग क्षेत्रों ने किसी भी कीमत पर नागा ध्वज

और नागा संविधान की रक्षा के लिए एक संकल्प अपनाया।

पूर्वोत्तर का यह इलाका रक्षा कारणों से संवेदनशील है

एक बयान में कहा गया है कि तीन क्षेत्रों-असालु ज़ेलियानग्रोंग क्षेत्र, मकुइलॉन्गदी

ज़ेलियानग्रोंग क्षेत्र और ज़िलाड ज़ेलियानगोंग क्षेत्र ने नागा ध्वज और संविधान का बचाव

करने का संकल्प लिया है। स्टीफन डांगमेई ने तीन ज़ेलियानग्रोंग क्षेत्रों की समन्वय

समिति के संयोजक, बयान में कहा कि वे क्षेत्र जो “तीनों भारतीय क्षेत्रों को स्पर्श करते हैं”

असम, मणिपुर और नागालैंड के राज्यों “नागा राष्ट्रीय सिद्धांत को बनाए रखने और नागा

ध्वज और नागा संविधान“ की रक्षा करने का संकल्प लिया है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का

कहना है कि दूसरे नागा सशस्त्र समूह नागा राष्ट्रीय राजनैतिक समूह ने कहा है कि वो

शांति समझौते पर बिना अलग झंडे और संविधान की मांग के हस्ताक्षर करने के लिए

तैयार हैं। यह उल्लेख करना बहुत महत्वपूर्ण है कि सरकार के साथ शांति वार्ता कर रहे

नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (आईएम) ने कहा कि उसने प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी को फरवरी में पत्र लिखा था और कहा था कि यदि “भारत में उसकी मौजूदगी

का स्वागत नहीं है” तो विदेश में बातचीत की जानी चाहिए। आठ पन्ने के “गोपनीय” पत्र

में वार्ताकारों, नागालैंड के गवर्नर आरएन रवि और गृह मंत्रालय की कड़ी आलोचना करते

हुए समूह ने अलग झंडे और संविधान की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि पत्र पर

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव

टी मुईवाह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा । हमने अब तक चिट्ठी को सार्वजनिक नहीं किया

था क्योंकि हमें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी सकारात्मक जवाब देंगे।

पीएमओ से पत्र नहीं मिला तो विद्रोहियों से जारी कर दी विज्ञप्ति

आज, नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (आईएम) ने नागा लोगों के प्रति

जवाबदेह होने के कारण भारतीय प्रधानमंत्री के कार्यालय की ओर से जवाब नहीं मिलने

और देरी होने के बारे में जानकारी देने के लिए पत्र जारी किया ।मुईवाह ने चिट्ठी में लिखा

“आज, हम आपके संज्ञान में गृह मंत्रालय (एमएचए) और उसकी एजेंसियों एनआईए और

असम राइफल्स सहित अन्य की गतिविधियां लाना चाहते हैं, जो भी गंभीर चिंता का

विषय है। जैसा की आप जानते हैं कि 22 साल से चल रही वार्ता शीर्ष स्तर से शुरू हुई थी।

प्रधानमंत्री स्तर की वार्ता बिना किसी पूर्व शर्त और भारत से बाहर किसी दूसरे देश में शुरू

हुई थी। हम भारत सरकार के बुलावे पर भारत आए थे। हम पूरी तरह से हैरान और

आश्चर्यचकित हैं कि दो दशक से अधिक की राजनीतिक वार्ता के बाद भी, नागालैंड शांति

के मुद्दे पर गृह मंत्रालय और उसकी एजेंसियां का रुख निंदनीय है।

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