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नगा समूहों ने केंद्र के अभियान पर नुकसान की चेतावनी दी

  • शांति वार्ता को लेकर फिर से बढ़ रहा तनाव

  • 23 जनवरी को नरेंद्र मोदी का पूर्वोत्तर दौरा

  • सभी मुख्यमंत्रियों होगी इस पर चर्चा

  • आईबी के निदेशक के काम पर नाखुश

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: नगा समूहों की चेतावनी की वजह से पूरे पूर्वोत्तर का तनाव बढ़ने लगा है।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागा शांति समझौते को लेकर इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक

अरविंद कुमार के काम पर असंतोष व्यक्त किया है। वास्तव में, प्रधान मंत्री ने नागा शांति

वार्ता के समाधान के साथ आने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार को

जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन इस विषय पर अब तक कोई विकास नहीं हुआ है। आगामी

23 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वोत्तर का दौरा करेंगे। इस समय प्रधानमंत्री सभी

पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्री से नागा शांति वार्ता के बारे में गंभीर बात करेंगे। दूसरी ओर,

प्रधानमंत्री ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार के साथ बातचीत की और नागा

शांति वार्ता पर चिंता व्यक्त की। गृह मंत्रालय के अधिकारी ने आज कहा कि नॉर्थ ईस्ट

विद्रोही समूहों और नागा शांति वार्ता में केंद्र के वार्ताकार और प्रधान मंत्री ने कहा कि

खुफिया निदेशक को यह तुरंत हल करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से

इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक अरविंद कुमार को फिर से शुरू करने के लिए कहा है। मंत्रालय

के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, नागा शांति वार्ता “पिछले छह वर्षों में, आरएन रवि एक

वार्ताकार के रूप में अपने स्तर से नागा समूहों से बात कर रहे थे। उल्लेख है कि

एनएससीएन (आईएम) की पृथक नगा झंडे और संविधान की मांग के कारण 2020 में

नगा शांति वार्ता अंजाम तक नहीं पहुंच सकी।

नगा समूहों के साथ शांति स्थापित करने पर गंभीर है मोदी

पिछले वर्ष अक्टूबर में केंद्र की नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (इसाक-

मुईवाह) और सात संगठनों वाले नगा नेशनल पोलिटिकल ग्रुप्स (एनएनपीजी) के साथ

अलग-अलग वार्ता के समापन के बाद कई लोगों को उम्मीद थी कि इस मसले का हल

निकल आएगा। एनएससीएन (आईएम) ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बदले

पृथक नगा झंडे और संविधान की मांग दोहराई जबकि एनएनपीजी की कामकाजी समिति

ने कहा कि वह ऐसी किसी भी शर्त के बिना समझौते के लिए तैयार है।

गृह मंत्रालय द्वारा असम राइफल्स को नगालैंड में एनएससीएन-आईएम के खिलाफ

अभियान शुरू करने का निर्देश देने के बाद इस विद्रोही समूह की कड़ी प्रतिक्रिया सामने

आई है। एनएससीएन-आईएम ने आरोप लगाया कि सात दशक पुरानी नगा समस्या का

स्थायी समाधान निकालने के लिए केंद्र दृढ़ नहीं है। उसने कहा कि समूह के धैर्य को उसकी

कमजोरी नहीं मानना चाहिए। एनएससीएन-आईएम ने चेतावनी दी है कि इसके परिणाम

दोनों पक्षों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

एनएससीएन-आईएम ने केंद्र से स्थिति से संवेदनशीलता के साथ निपटने और भारतीय

सुरक्षा बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को उसके खिलाफ अभियान छेड़ने के लिए

प्रोत्साहन नहीं देने को कहा। नगालैंड में उग्रवाद की दशकों पुरानी समस्या से निपटने के

लिए 18 साल में 80 दौर की वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में प्रारूप

समझौते पर दस्तखत हुए थे।

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