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नबीनगर प्लांट परियोजना में 85 प्रतिशत बिजली बिहार को

  • जून से मिलने लगेगी 1683 मेगावाट बिजली

  • 565 मेगावाट की एक इकाई चालू हो गयी

  • जून 2021 तक दो अन्य इकाइयां भी चालू

  • हजारों स्थानीय लोगों को मिला है रोजगार

औरंगाबाद: नबीनगर प्लांट का असली लाभ बिहार को अगले साल से मिलने जा रहा है।

देश की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई

नबीनगर पावर जेनरेटिंग कंपनी (एनपीजीसी) की सुपर थर्मल पावर परियोजना से बिहार

को अगले वर्ष जून से 1683 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी। एनपीजीसी के मुख्य

कार्यकारी अधिकारी विजय सिंह ने गुरुवार को बताया कि औरंगाबाद जिले के बारुन और

नवीनगर प्रखंड की सीमा पर स्थापित एनपीजीसी की सुपर थर्मल पावर परियोजना की

पहली इकाई से बिहार को अभी 565 मेगावाट से अधिक बिजली मिल रही है और जून

2021 तक इस परियोजना की दोनों इकाइयों के चालू हो जाने से 1683 मेगावाट बिजली

बिहार को मिलने लगेगी। उन्होंने बताया कि परियोजना की दूसरी इकाई से दिसंबर से

बिजली का व्यवसायिक उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा। इस इकाई में 660 मेगावाट बिजली

उत्पादन होगा। इस इकाई से व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की सभी तैयारियां अंतिम

चरण में हैं और इसके परीक्षण का सभी कार्य लगभग पूरा किया जा चुका है। श्री सिंह ने

बताया कि इस परियोजना में 660-660 मेगावाट की कुल तीन इकाइयां स्थापित की जा

रही हैं और इसके तीनों इकाइयों से कुल 1980 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जिसका

85 प्रतिशत बिहार को मिलना है। उन्होंने बताया कि पहली इकाई से अभी 660 मेगावाट

बिजली का उत्पादन हो रहा है जबकि दूसरी इकाई दिसंबर से और तीसरी इकाई जून 2021

से चालू हो जाएगी। इन तीनों इकाइयों के चालू हो जाने से बिहार बिजली के मामले में और

बेहतर स्थिति में हो जाएगा।

नबीनगर प्लांट का निर्माण 28 सौ एकड़ जमीन पर

मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना के निर्माण पर कुल 17000 करोड़

रुपये से अधिक की लागत आई है और इसका निर्माण 2800 एकड़ से अधिक भू भाग में

किया गया है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के बनने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से

हजारों की संख्या में स्थानीय कामगारों को रोजगार मिल रहा है तथा क्षेत्र की आर्थिक

स्थिति को सुदृढ़ करने में मदद मिली है। श्री सिंह ने बताया कि यह परियोजना सुपर

क्रिटिकल तकनीक पर आधारित है और इससे प्रदूषण नहीं के बराबर होता है। उन्होंने

बताया कि एनपीजीसी की ओर से परियोजना विस्थापित क्षेत्र तथा आस-पास के इलाके में

पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कार्यक्रम के तहत 60 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं।

इनमें सड़क पेयजल स्वास्थ्य शिक्षा एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित योजनाएं

शामिल हैं। अभी कंपनी की ओर से औरंगाबाद को रोहतास जिले से जोड़ने वाली एक

महत्वपूर्ण सड़क मेंह इंद्रपुरी का नवनिर्माण कराया जा रहा है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी

ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान एनपीजीसी की ओर से जरूरतमंदों की सहायता के लिए

खाद्य सामग्री का पैकेट, सैनिटाइजर और मास्क उपलब्ध कराए गए। साथ ही कोविड-19

से बचाव के लिए जिला प्रशासन को पीपीई किट और मास्क सुलभ कराया गया है।


 

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