fbpx Press "Enter" to skip to content

म्यांमार की आराकान सेना को आईएसआई की मदद के प्रमाण मिले

  • भारत और बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
विशेष प्रतिनिधि

ढाकाः म्यांमार की आराकान सेना के नाम पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई

सक्रिय हो रही है। आराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी के नाम पर वहां सक्रिय संगठन के

पीछे पाकिस्तान की यह एजेंसी है, इसकी भनक सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं बल्कि भारतीय

सुरक्षा एजेंसियों को भी हो चुकी है। इसी वजह से अब दोनों देशों ने संयुक्त रुप से इस

किस्म की आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान चलाने की कार्ययोजना भी तैयार

कर ली है।

कॉक्स बाजार से मिला था पहला सुराग

दरअसल बांग्लादेश के कॉक्सबाजार इलाके में स्थापित रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में नशा

और ड्रग्स के कारोबार की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद उस पर नजर रखी जा रही थी।

इस कारोबार में अदृश्य ताकतों के शामिल होने की भनक मिलने के बाद उसके तार

म्यांमार की आराकान सेना के साथ जुड़े हुए पाये गये थे। दूसरी तरफ ढाका में हुए एक

आतंकवादी हमले की जांच की कड़ी भी यहीं से जाकर जुड़ गयी थी। यह पता चला था कि

बांग्लादेश में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जेएमबी ने वहां के 40 रोहिंग्या युवकों को इस

किस्म की आतंकवादी कार्रवाइयों के लिए प्रशिक्षण दिया था। वर्ष 2016 में हुए एक

आतंकवादी हमले के तार इससे जुड़े थे। अब पहली बार इस बात की पुष्टि हुई है कि इन

आतंकवादी संगठनो के पीछे भी दरअसल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का

ही हाथ है। वह अन्य देशों के मुखौटा संगठनों की मदद से यहां पैसे भेज रहा है और दूसरे

माध्यमों से हथियार भी उपलब्ध करा रहा है। कश्मीर सीमा पर भारत के अत्यंत सख्त

तेवर की वजह से अब आईएसआई ने अपनी रणनीति बदली है। दूसरी तरफ

अफगानिस्तान में भी वह इसी तरीके से सक्रिय है, उसकी पुष्टि म्यांमार के आराकान

सेना की गतिविधियों से ही हो चुकी है। म्यांमार में सरकार और सेना के अत्याचार की

वजह से वहां से भागकर आये रोहिंग्या शरणार्थियों को रहने की जगह दी गयी है।लेकिन

अब वहां आतंकवादी संगठनो की पैठ होने के बाद बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियां भी इन

शरणार्थी शिविरों पर लगातार निगरानी कर रही हैं।

म्यांमार की आराकान सेना पर बांग्लादेश की नजर

भारत ने भी बांग्लादेश में अपने नये राजदूत के तौर पर विक्रम दोराइस्वामी को भेजा है।

वह पूर्व राजदूत रीवा गांगुली दास का स्थान ले चुके हैं। इसके अलावा उत्तर पूर्वी भारत के

साथ नौ परिवहन की योजनाओं पर बांग्लादेश काम कर रहा है। बांग्लादेश के कई

बंदरगाहों का इस्तेमाल भारत कर रहा है। लिहाजा भारत और बांग्लादेश का जो रिश्ता वर्ष

1971 के मुक्ति संग्राम के वक्त से बना हुआ है, वह इन साजिशों से कमजोर होने की कोई

उम्मीद नहीं है।

अलबत्ता इस बीच आराकाम सेना के नाम पर सक्रिय आतंकवादी संगठन म्यांमार में

लगातार हमले कर रहे हैं। यहां तक कि कोरोना काल में भी मई 2020 में इसी आतंकवादी

संगठन के हमले में सेना का एक कर्नल और एक पुलिसवाला घायल हुआ है। वहां के कई

स्कूलों पर भी इस आतंकवादी संगठन ने हमला किया था। म्यांमार की सेना, जिसे

तातमादेव कहा जाता है, इस आतंकवादी संगठन के प्रति काफी सतर्क है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from आतंकवादMore posts in आतंकवाद »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from बांग्लादेशMore posts in बांग्लादेश »
More from म्यांमारMore posts in म्यांमार »

Be First to Comment

Leave a Reply