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म्यांमार के शरणार्थियों के प्रवेश पर सरकार ने रोक लगायी फिर हटायी

  • वहां के सैन्य शासन साथ चल रही भारत सरकार

  • मणिपुर के चार जिलों में निगरानी बढ़ेगी

  • पूर्वोत्तर में इस निर्देश पर लोगों को हैरानी

  • असम चुनाव में भाजपा के खिलाफ यह मुद्दा

विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः म्यांमार के शरणार्थियों को भारत की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जाए।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ऐसा  निर्देश जारी किया है। केंद्र सरकार के इस निर्देश के तुरंत बाद

मणिपुर के सीमावर्ती सभी जिलाधिकारियों को सतर्क इस आदेश के जारी होने के कुछ ही

देर में इससे असम के चुनाव में होने वाले राजनीतिक नुकसान का अंदेशा होते ही आनन

फानन में फिर से इस आदेश को  वापस भी ले लिया गया है। वैसे केंद्रीय गृह मंत्रालय का

यह आदेश पूरी दुनिया को हैरान कर गया है। भारत में इससे पहले के किसी भी प्रधानमंत्री

अथवा सरकार ने शरणार्थियों के मामले में ऐसा कठोर फैसला कभी नहीं लिया था।  

भारत ने पहले कभी ऐसा नहीं किया था इसलिए दुनिया को हैरानी

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहल जो आदेश जारी किया था उसमें यह भी कहा गया है कि

म्यांमार के शरणार्थियों के लिए  कोई राहत शिविर भी नहीं चलाये जाए। इस आदेश के

पहले ही म्यांमार के अनेक पुलिस वाले देश छोड़कर भारत भाग आये हैं। बिना हथियार के

भारत में शरण लेने वाले इन पुलिस वालो ने सैन्य आतंक के भय से देश छोड़ा है। उनलोगों

ने अपने देश की जनता पर अकारण ही गोली चलाने से इंकार कर दिया था। मिली

जानकारी के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय का आदेश जारी होने के बाद मणिपुर के चांडेल,

तेगूनाउपाल, उखरूल और चूरचंद्रपुर जिला के अधिकारियो को शरणार्थियों के आने पर

निगरानी करने को कहा गया है। वैसे केंद्रीय गृह मंत्रालय का यह आदेश समूचे पूर्वोत्तर

और खास तौर पर बांग्लादेश युद्ध के दौरान भारत की भूमिका की सराहना करने वालों के

लिए हैरत की बात है। इस बात की चर्चा होने लगी है कि ऐसा अमानवीय फैसला भारत

सरकार कैसे कर सकती है। दुनिया में पहले से ही म्यांमार के सैनिक शासन की आलोचना

हो रही है।

म्यांमार में दूसरे विश्वयुद्ध में जापान की सेना पर वर्मा (अब का म्यांमार) की सेना के

विजय दिवस पर भारतीय सेना भी शामिल हुई थी। यह समझा जा रहा है कि वहां की चुनी

हुई सरकार को सैन्य विद्रोह के हटा देने के बाद भी भारत म्यांमार की वर्तमान सैन्य सत्ता

के साथ बेहतर तालमेल बनाकर चलना चाहती है। इसी वजह से म्यांमार के शरणार्थियों के

प्रवेश पर रोक लगायी गयी है। 

म्यांमार के शरणार्थियों का आदेश विवाद बढ़ते ही वापस लिया गया

वैसे केंद्रीय गृह मंत्रालय का यह आदेश असम मे जारी चुनाव में भी भाजपा के खिलाफ जा

सकता है, इसका अंदेशा है। संयुक्त राष्ट्र में म्यांमार के राष्ट्रदूत की पूरी दुनिया से अपील

के बाद भारत सरकार का यह फैसला पश्चिमी देशों को भी भारतीय कूटनीति और विदेश

नीति पर नये सिरे से विचार करने पर मजबूर कर रहा है। स्थानीय स्तर पर ऐसे फैसले को

अमानवीय मानने की चर्चा प्रारंभ हो चुकी है। असम के विधानसभा चुनाव में विरोधी दल

इसे भाजपा का असली हिंदू प्रेम बताकर प्रचार करनेमें जुट गये हैं। इससे कहीं न कहीं

भाजपा को फिर से असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। गत शुक्रवार को वहां

सेना के गोली चालन से एक सौ से अधिक लोगों के मारे जाने और नरसंहार की शाम ही

वहां के सैन्य अधिकारियों द्वारा पार्टी आयोजित करने की भी दुनिया भर में निंदा हो रही

है। समझा जाता है कि म्यांमार की वर्तमान सैन्य सरकार को खुश रखने के लिए ही गृह

मंत्रालय ने आनन फानन में ऐसा फैसला लिया है।

म्यांमार के शरणार्थियों को शरण नहीं देने के अपने आदेश को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने

वापस ले लिया है। इस बारे में सफाई दी गयी है कि पूर्व के आदेश को गलत ढंग से समझा

गया था। इसी वजह से विवादों से बचने के लिए उस पूरे आदेश को ही वापस लिया जाता

है। सरकार की तरफ से यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसी परिस्थितियों में मानवीयता

के आधार पर आने वाले शरणार्थियों को जो राहत प्रदान की जाती है, वह व्यवस्था पूरी

तरह बहाल रहेगी।

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