fbpx Press "Enter" to skip to content

म्यांमार सेना और आराकाम सेना के बीच भीषण संघर्ष

  • एक सौ से अधिक के हताहत होने की सूचना

  • भारत के खिलाफ चीन की हरकत उजागर

  • आतंकवादी समूहों को भी हथियार की मदद

  • चीन समर्थित आतंकवादियों के खिलाफ अभियान

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: म्यांमार सेना ने इस सप्ताह सोमवार को अराकान सेना के खिलाफ अपनी

कार्रवाई तेज कर दी। अराकान सेना पश्चिमी रखाइन राज्य में सबसे बड़ा आतंकवादी

समूह है। यहां पहुंची रिपोर्ट के मुताबिक  म्यांमार सेना यानी थल, वायु और नौसेना बलों

की तीनों विंग ने आतंकवादी समूह के खिलाफ समन्वित कार्रवाई किया। राथडांग

टाउनशिप में सोमवार को तड़के म्यांमार सेना (तामदाव) और अराकान सेना (एए) के बीच

ताजा झड़पें हुईं, जिसमें दोनों पक्षों को भारी जनहानि का सामना करना पड़ा । इसमें एक

सौ से अधिक के मारे जाने अथवा घायल होने का अंदेशा है। इस संघर्ष में कौन किसका

पक्ष से हताहत हुए हैं यह अभी तक पता नहीं चला । इसमें म्यांमार की सेना और चीन

समर्थित अराकान सेना ने कुछ नहीं बताया। म्यांमार के सैन्य अभियानों के प्रत्यक्षदर्शी ने

बताया कि वायु सेना के जेट विमानों ने जमीनी सैनिकों और नौसैनिक बलों की मदद से

पहाड़ में स्थित अराकान सेना की चौकियों पर तीन बार बमबारी की थी।

म्यांमार सेना ने कहा पहाड़ अब उनके कब्जे में

एक तरफ जहाँ म्यांमार की सेना ने कहा कि उसने 24 अक्टूबर को पहाड़ी को कब्जे में

लिया था। वहीं अराकान सेना ने कहा कि उन्होंने वापस से 25 अक्टूबर को पहाड़ी पर

कब्जा कर लिया। निवासियों क रिपोर्ट के अनुसार, राथडांग टाउनशिप में क्याकटन और

आंगथरजी के गांवों के पास झड़पें हुई और बुधवार 28 अक्टूबर तक जारी रहीं ।”संघर्ष

भयंकर थे, शायद राथेदंग में अब तक कट्टर राथडांग के उच्च सदन के कानूनविद यू

खिन मेंग लैट ने इरावदी को बताया, सोमवार को सेना ने लड़ाकू विमानों के साथ

बमबारी की और हर दिन गोलाबारी हुई है ।निवासियों के अनुसार, दोनों पक्ष क्याकटन

और हट्सवे गांवों के बीच आंगथरजी के पास एक पहाड़ी पर नियंत्रण हासिल करने के लिए

लड़ रहे हैं । म्यांमार की सेना ने आज कहा कि यह लड़ाई इसलिए हुई क्योंकि एचटीवे के

पास पहाड़ी पर एए सैनिक पोन्नागुन-राथेडांग-बुथिडांग सड़क और सिटवे-बुथिडांग-

राथडांग जलमार्ग को अवरुद्ध कर रहे थे । अराकान आर्मी’ चीनी हथियारों के बल पर

भारत के म्यामांर में बनाए जा रहे कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के काम को

बहुत ज्यादा प्रभावित किया है। अराकान आर्मी को ये हथियार चीन से अवैध ट्रांसफर और

तस्करी के जरिए मिल रहे हैं। गौरतलब है कि इस वर्ष 2020 के जून में ही जब कलादान

प्रोजेक्ट का मुख्य हिस्सा रखाइन और जिन राज्यों में पूरा होने वाला था, अराकान आर्मी

ने उन इलाकों में अपना अभियान शुरू कर दिया।

अराकान आर्मी के विरोध से कलादान प्रोजेक्ट को नुकसान

अराकान आर्मी के इस कदम से कलादान प्रोजेक्ट को पूरा करने में बहुत परेशानी का

सामना करना पड़ा है। बीते 23 जून को थाईलैंड की सेना ने म्यांमार की सीमा के पास चीन

में बने की हथियारों की खेप पकड़ी थी। इसमें एके 47 असॉल्ट राइफल, मशीन गन और

एंटी टैंक बारुदी सुरंगें, ग्रेनेड और विस्फोटक शामिल हैं। ये हथियार करीब 10 लाख डॉलर

की कीमत के थे। ये हथियार अराकान आर्मी और अराकान रोहिंग्या आर्मी को दिए जाने

थे। ये दोनों ही रखाइन राज्य में स्थित हैं।

बता दें कि ‘अराकान आर्मी’ को म्यांमार की सरकार ने आतंकी संगठन का दर्जा दिया है

और दोनों पक्षों के बीच एक साल में 600 बार झड़प हुई है। यह ज्यादातर झड़प 48 करोड़

डॉलर के कलादान प्रोजेक्ट के पास हुई है। एक अधिकारी के मुताबिक, इस बात का संदेह है

कि चीन उग्रवादी गुटों को उकसा रहा है। दरअसल, भारत का कलादान प्रोजेक्ट चीन-

म्यांमार इकनॉमिक कॉरिडोर का जवाब है जो रखाइन राज्य के क्याउकप्यू पोर्ट पर है।

एक अन्य भारतीय अधिकारी के अनुसार, चीन आराकान आर्मी के जरिए भारत के

कलादान प्रोजेक्ट के रास्ते में रुकावटें डालना चाहता है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from आतंकवादMore posts in आतंकवाद »
More from उत्तर पूर्वMore posts in उत्तर पूर्व »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from रक्षाMore posts in रक्षा »

One Comment

Leave a Reply

... ... ...
%d bloggers like this: