झारखंड में आबादी के अनुपात में मुसलमानों को दें टिकट : मजलिस-ए-उलेमा

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वरीय संवाददाता
रांची : झारखंड में अब तक जितनी भी सरकारें बनी हैं, सभी ने अल्पसंख्यकों को नजर अंदाज ही किया है।

झारखंड में सभी पार्टियों ने सरकार बनने से पहले योजनाओं को पूरा करने की बात तो ही लेकिन सरकार बनते ही भूल गयीं।

सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को लागू नहीं करना सरकार की नकारात्मक सोच को दर्शाता है।

उपयुक्त बातें मुस्लिम मजलिस उलेमा झारखंड के अध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल्लाह अजहर कासमी ने कहा।

वे गुरुवार को मंटू चौक स्थित मिल्ली कम्यूनिटी हॉल में संवाददाताओं से बातें कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के पार्टी सुप्रीमो को उनकी पार्टी के संगठन में मुस्लिम नेताओं की अब तक की गई अपेक्षा से अवगत कराया जाएगा।

सार्थक समर्थन देकर और सार्थक समर्थन लेकर बहुसंख्यक समाज और अल्पसंख्यक समाज के सामाजिक व राजनीतिक रिश्ते को मजबूत बना कर

लोकतंत्र को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।

बहलाने और दहलाने वाली राजनीति के विपरीत वैकल्पिक रास्ता ढूंढा जाएगा।

उन्होंने कहा कि एनडीए गठबंधन और महागठबंधन की आड़ में

राजनीतिक पार्टियों द्वारा कराए जा रहे नकारात्मक गोलबंदी

और मतदाताओं के सौदेबाजी पर लगाम लगाए जाने की भी कोशिश की जाएगी।

मुस्लिम समाज की उपेक्षा का दंश झेलने को विवश नजर आता है।

झारखंड में गठबंधन और महागठबंधन बनाने के अभ्यास के क्रम में

धड़ल्ले से मुस्लिम अल्पसंख्यकों की जा रही घोर उपेक्षा से अल्पसंख्यक समाज का जागृत जनमानस आहत है।

इस मौके पर सरपरस्त काजी उजैर कासमी, उपाध्यक्ष कारी जान मोहम्मद मुस्तकी,

मौलाना अनिसूर रहमान और कारी रिजवान अहमद, मौलाना तौफीक अहमद

कादरी, मौलाना मोहम्मद खालिद, मौलाना उमर फारूक कासमी, मौलाना सरफराज

नदवी, मौलाना शकील राही, मौलाना अशरफ, मौलाना इरफानी, मौलाना रफीक

समेत कई उलेमा मौजूद थे।

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