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मुंगेर का चंडिका स्थान हर तरफ से उपेक्षा का शिकार

दीपक नौरंगी

मुंगेरः मुंगेर का चंडिका स्थान भी एक ऐसी धार्मिक जगह है जो मुंगेर को विश्व में अलग

पहचान दिलाती है। दरअसल मुंगेर का चंडिका स्थान देश के अन्यतम शक्तिपीठों में से

एक है। कहा जाता है कि यहां पर सती की बायीं आंख गिरी थी। वैसे इस धार्मिक स्थान के

बारे में कई और ऐतिहासिक कहानियां भी हैं। लेकिन फिलहाल तो यह धर्मस्थल सरकारी

उपेक्षा का शिकार है।

वीडियो में जानिये इस शक्तिपीठ की उपेक्षा का कहानी

अभी कोरोना लॉक डाउन की वजह से मंदिर वैसे भी देश के अन्य धार्मिक स्थलों की तरह

बंद हैं। लेकिन मंदिर से जुड़े लोगों को फिर से बरसात की चिंता सताने लगी है। इसकी

खास वजह पूरे मुंगेर के गंदे पानी का नाला मंदिर के ठीक बदल में होना है। ऊपर से इस

नाले की कोई निकासी भी नहीं है। इस वजह से जब पानी अधिक हो जाता है तो नाले का

सारा पानी ऊपर आकर मंदिर को डूबो देता है। कई बार यह स्थिति दो से तीन महीनों तक

की हो जाती है। सब पर कृपा लुटाने वाली मां ही सरकारी उपेक्षा की शिकार हैं। लेकिन

सरकारी उपेक्षा की वजह से मंदिर की छत चू रही है जबकि धर्मशाला धराशायी होने को है।

मंदिर के ठीक बगल में गंदे पानी का नाला भी श्रद्धालुओं के लिए कठिन चुनौती है। वैसे

स्थानीय लोग मानते हैं कि यहां पीने का पानी का अभाव होने की वजह से ही देश विदेश से

आने वालों को काफी परेशानी होती है।

मुंगेर का चंडिका स्थान चुनाव में भी मुद्दा बनेगा

मंदिर की छत को किसी तरह काम चलाऊ मरम्मत कर टिकाये रखा गया है लेकिन वहां

की धर्मशाला पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और किसी भी दिन धराशायी भी हो सकती है।

सरकारी इंतजाम के लिए अनेकों बारे इस बारे में पत्राचार किये गये लेकिन कहीं से कोई

ठोस पहल नहीं हुई। लिहाजा अगले विधानसभा चुनाव में सुशासन सरकार के मुखिया को

मुंगेर में इसी सवाल से परेशान होना पड़ सकता है।

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