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मुंगेर मूर्ति विसर्जन गोली कांड की जांच पर हाईकोर्ट नाराज

  • मृतक के पिता ने दायर की थी क्रिमिनल रिट याचिका

  • अदालत का आदेश सभी संबंधित अफसर हटाये जाएं

  • अब जांच हाईकोर्ट की निगरानी में सीआईडी करेगी

  • गोली चलने के बाद अचानक हिंसा भड़क उठी थी

दीपक नौरंगी

भागलपुरः मुंगेर मूर्ति विसर्जन गोली कांड के मामले में जांच में जुड़े वर्तमान एसपी सहित

सभी पुलिस अधिकारियों का तबादला करने का आदेश हाई कोर्ट ने दिया है। पिछले साल

अक्टूबर में मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ा मामला हुआ था मां दुर्गा प्रतिमा की

विसर्जन में बवाल के दौरान 18 साल के अनुराग पोद्दार की गोली लगने से मौत हो गई थी।

इस वीडियो में समझ लीजिए घटनाक्रम को

उस वक्त सरकार के बदले चुनाव आयोग के निर्देश पर वहां से डीएम और एसपी का

तत्काल तबादला किया गया है। पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में बुधवार को एक बड़ा

आदेश दिया है। इस केस की सुनवाई हाईकोर्ट ने सरकार के रवैए और पुलिस की जांच को

लेकर सख्त नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने मुंगेर के वर्तमान एसपी और कोतवाली

थाना प्रभारी और केस से जुड़े तमाम पुलिस अफसरों का ट्रांसफर करने का आदेश दे दिया

है। हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि सीआईडी की जांच अब हाईकोर्ट की निगरानी में

होगी।

मृतक के पिता हाई कोर्ट में दाखिल किया था क्रिमिनल रिट पिछले साल अक्टूबर से लेकर

इस साल फरवरी महीने तक पुलिस की जांच में किसी प्रकार का कोई ठोस नतीजा सामने

नहीं आया है करीब 4 महीने का वक्त पुलिस ने यूं ही निकाल दिया दरअसल अनुराग

पोद्दार के पिता अमरनाथ पोद्दार ने 6 जनवरी 2021 को पटना हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिट

दाखिल किया था मानस प्रकाश इस केस में अमरनाथ पधार के एडवोकेट है इनके अनुसार

एसपी और इस केस में जुड़े पुलिस वालों को मुंगेर से हटाए जाने के साथ दो बड़े निर्देश

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की बेच की तरफ से दिए गए हैं।

मुंगेर मूर्ति विसर्जन के गोली चालन के बाद भड़की थी जनता

मुंगेर में गोली कांड हुआ तो हालत बेकाबू थे शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए पूरे

मामले की जांच करने के लिए अक्टूबर महीने में ही चुनाव आयोग ने एसपी लिपि सिंह को

हटाकर मानव जीत सिंह ढिल्लों को मुंगेर का नया एसपी बनाया था लेकिन 4 महीने तक

इस संवेदनशील केस में पुलिस ने जांच में कुछ नहीं हुई इसके बाद अमरनाथ पोद्दार ने

पटना हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे थे अब केस सीआईडी के अधिकारी जांच करेंगे सीआईडी

की पूरी जांच हाई कोर्ट की निगरानी में होगी सीआईडी की टीम को जांच रिपोर्ट सौंपने के

लिए 1 महीने का समय दिया गया है मानस प्रसाद के अनुसार एडवोकेट जनरल के

माध्यम से सीआईडी ने अपनी तरफ से 54 पॉइंट कोर्ट को बताए हैं जिन पर वह अपनी

जांच करेगी तत्काल देना होगा मृतक के परिवार को दस लाख रुपये का मुआवजा

एडवोकेट के अनुसार अपनी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि गोलीकांड में अनुराग की

कोई भूमिका नहीं थी। इस कारण उसके पिता को दस लाख रुपये का मुआवजा तत्काल

दिया जाए। एक महीने के बाद सीआईडी की क्या रिपोर्ट देती है वह देखा जाएगा। पिता ने

के एडवोकेट को कोर्ट ने कहा है अगर जांच के दौरान आपको कुछ पता चलता है तो आप

उसे कोर्ट की जानकारी में दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट ने शुरू की हुई

थी सुनवाई अमरनाथ पोद्दार ने पटना हाईकोर्ट में एडवोकेट मानस प्रसाद के जरिए

क्रिमिनल रिट 6 जनवरी 2021 को फाइल किया था। जिसके बाद अनुराग की मां ने

जनवरी महीने में एडवोकेट आलोक श्रीवास्तव के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अपील की

थी। इस पर 25 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में 2 महीने में पिता की अपील की सुनवाई पूरी

करने का निर्देश हाईकोर्ट को दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट में सुनवाई

तब जाकर यहां इस मामले में सुनवाई शुरू हुई है पहली सुनवाई 12 फरवरी को हुई थी तब

राज्य सरकार ने 10 मार्च को इस केस में जवाब मांगा गया था एडवोकेट के अनुसार कोर्ट

के में जवाब दाखिल करने से पहले राज्य सरकार ने इस केस की जांच सीआईडी को खुद

सौंप दी थी एसपी लिपि सिंह के बाद मुंगेर के एसपी बने मानव सिंह ढिल्लों के बारे में

बताया जाता है कि वह विवादों में कम रहे हैं लेकिन मामला इतना हाई प्रोफाइल था

जिसके कारण वर्तमान एसपी मानव सिंह ढिल्लों ऐसे हाई फाइल मामले में क्या कर

सकते थे? सभी जानते हैं कि इस पूरे मामले में दोषी कौन है मामला इतना बड़ा है यह कि

हाईकोर्ट ने इसमें बड़ा निर्णय लेना पड़ा है।

मुंगेर के पूर्व एसपी लिपि सिंह की परेशानियां भी बढ़ सकती है?

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुंगेर की पूर्व एसपी लिपि सिंह के मुसीबतें बढ़ सकती है पिछले

साल मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन की घटना वीभत्स तस्वीरें सामने आयी थीं। पुलिस के

साथ कैसे कुछ सादे लिबास वाले गुंडे लोगों पर बर्बर तरीके से लाठियां बरसा रहे थे। चुनाव

का समय था लिहाजा प्रशासन की कमान चुनाव आयोग के हाथ में थी। चुनाव आयोग ने

लिपि सिंह का ट्रांसफर कर आईएएस असंगवा चुआ आवो को इसकी जांच सौंपी थी। मगध

के पूर्व कमिश्नर ने जांच रिपोर्ट कई महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया है जिसके कारण

कहीं ना कहीं मगध के कमिश्नर को भी परेशानी हुई मगध कमिश्नर का भी तबादला कर

दिया गया। जिसको लेकर सरकार के आईएएस अधिकारी में यह बात काफी चर्चा भी हुई

सूबे में जब फिर से नीतीश कुमार की सरकार बनी तो लिपि सिंह को सहरसा का बनाया

गया। सभी आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच में यह बात काफी सुर्खियों में

आई कि सरकार को करीब 1 साल तक रुकना चाहिए था इतने विवाद में रहने के बाद भी

तुरंत ही आईपीएस अधिकारी लिपि सिंह की पोस्टिंग करना इसी तौर पर यह साफ जाहिर

हो गया है कि इनके पिता जो जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र प्रसाद सिंह है जो बिहार के

मुखिया नीतीश कुमार के काफी करीबी हैं इसके बावजूद सरकार कहीं ना कहीं दबाव में थी

इसीलिए बिहार के मुखिया नीतीश कुमार ने इस मामले में कोई बड़ा एक्शन नहीं लेकर

लिपि सिंह को सहरसा का एसपी बना दिया इसको लेकर कई तरह की बात आज भी

सुर्खियों में बनी हुई है।

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