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मुंगेर गोलीकांड में जांच रिपोर्ट चुनाव आयोग को समर्पित की गयी

  • घटना की जांट रिपोर्ट में एक लाइन गड़बड़ी

  • लिपि सिंह को सत्ता का करीबी माना जाता है

  • हिंसा भड़कने के बाद आयोग ने उन्हें हटाया था

  • मगध आयुक्त का तबादला होने की अटकलें तेज

दीपक नौरंगी

भागलपुरः मुंगेर गोलीकांड में अंततः लीपापोती ही होने जा रही है। अंदरखाने से मिल रही

सूचनाओं के मुताबिक इस रिपोर्ट में एक लाइन का उल्लेख करने की वजह से अब मगध

प्रमंडल के आयुक्त पर भी गाज गिर सकती है। उनका तबादला होने की अटकलें तेज हो

चुकी हैं।

वीडियो में देखिये इसकी पूरी रिपोर्ट

याद रहे कि मुंगेर में दुर्गापूजा विसर्जन जुलूस के दौरान एक व्यक्ति के मारे जाने के बाद

काफी हंगामा हुआ था। लेकिन हंगामा होने तक राज्य सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई

नहीं की गयी थी। पुलिस पर हमला और कई गाड़ी जलाये जाने के बाद भड़की हिंसा की

वजह से इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग द्वारा हस्तक्षेप किया था। आयोग के निर्देश पर ही

मुंगेर के डीएम और एसपी को हटाया गया था।

दरअसल तब भी मुख्यालय के बैठे अधिकारी यह मान कर चल रहे थे कि नीतीश कुमार के

शासन में मुंगेर की एसपी रही लिपि सिंह पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है। ऐसा इसलिए

है क्योंकि लिपि सिंह के पिता राजनीतिक तौर पर नीतीश कुमार के काफी करीबी हैं। बीच

में यह चर्चा भी आयी थी लिपि सिंह मुंगेर में ही जमी हुई हैं और उनके नजदीकी लोगों को

यह उम्मीद थी कि नीतीश कुमार के दोबार मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में उन्हें फिर से

मुंगेर में ही पदस्थापित कर दिया जाएगा। राजनीतिक घटनाक्रम भी अब इसी तरह इशारा

कर रहे हैं।

मुंगेर गोलीकांड को लेकर काफी विवाद पहले से ही है

सूत्रों की मानें तो मुंगेर गोलीकांड पर मगध प्रमंडल के आयुक्त की रिपोर्ट की एक लाइन

ही उनके लिए परेशानी का सबब बनने जा रही है। यूं तो इस रिपोर्ट में लीपापोती कर दी

गयी है। इस गोलीचालन के संबंध में चुनाव आयोग को भेजी गयी रिपोर्ट में सिर्फ एक

लाइन में इस बात का उल्लेख किया गया है कि दुर्गापूजा विसर्जन जुलूस के दौरान हिंसा

भड़कने के बाद भी पुलिस के वरीय अधिकारी वहां काफी देर से पहुंचे थे। यह एक लाइन ही

लिपि सिंह के मामले में उन्हें परेशानी में डालने के लिए पर्याप्त है। लोग मान रहे हैं कि

लिपि सिंह के खिलाफ इतना सा उल्लेख भी मगध प्रमंडल के आयुक्त के लिए परेशानी का

सबब बन सकता है। इन्हीं समीकरणों के आधार पर यह माना जा रहा है कि पूरे मामले की

लीपापोती होने के क्रम में उनका शीघ्र ही तबादला भी कर दिया जाएगा।

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