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मुजीब वर्ष में बांग्लादेश के संथाल समुदाय को भी पक्के मकान मिले

  •  शेख हसीना ने कई हजार जनजातियों को दिया घर

  • यहां भी पीढ़ियों बसे हुए हैं संथाल समुदाय के लोग

  • झारखंड के लोगों को शायद पता भी नहीं होगा इसका

  • प्रधानमंत्री खुद इस योजना की नियमित समीक्षा करती हैं

राष्ट्रीय खबर

ढाकाः मुजीब वर्ष का आयोजन इस साल बांग्लादेश में बड़े ही धूमधाम से बनाया जा रहा

है। इसी आयोजन के तहत बांग्लादेश के इलाके में रहने वाले संथाल जनजाति के लोगों को

भी सरकारी लाभ पहुंचा है। प्रधानमंत्री शेख हसीना के विशेष देखरेख में कई हजार संथाल

परिवारों और पाटनी समुदाय के लोगों को भी सरकार ने पक्के मकान बनाकर दिये हैं।

सबसे अच्छी बात यह है कि इन मकानों को कुछ इस तरीके से बनाया गया है, जैसे संथाल

गांव बसते हैं। मुख्यधारा से अलग थलग रहने वाले जनजाति परिवार मुख्य तौर पर कृषि

आधारित जीवन यापन करते हैं। लेकिन खेती का फसल बंटवारा पद्धति लागू होने की

वजह से उनकी आर्थिक स्थिति दिनोंदिन खराब होती चली गयी थी। खेती का काम नहीं

होने के दौरान ऐसे लोग बांस आधारित उपयोग के सामान बनाकर अपना परिवार पाल रहे

थे। इनकी तरफ पहली बार प्रधानमंत्री शेख हसीना का ध्यान गया था। इसीलिए मुजीब

वर्ष के मौके पर इन परिवारों को भी पक्के मकान मिले हैं।

मुजीब वर्ष में जनजाति समुदाय को पक्के मकान दिये गये

बांग्लादेश के गाईबांधा जिला के गोबिंदगंज इलाके के कामदिया अनुमंडल के चांगरा गांव

इसका जीता जागता उदाहरण है। जहां संथाल परंपरा को ध्यान में रखते हुए पक्के मकान

बनाकर उन्हें सौंप दिये गये हैं। वैसे बांग्लादेश में भी संथाल परिवार बसते हैं, इसकी

जानकारी शायद झारखंड के संथालों को बेहतर ढंग से नहीं होगी। वैसे उत्तर बंगाल और

असम के इलाकों में बसे आदिवासियों को बांग्लादेश के इस इलाके में बसे जनजाति

समुदाय की थोड़ी बहुत जानकारी है। लेकिन बांग्लादेश का यह वर्ग किसी तरह जीवन

यापन कर रहा था। पक्का मकान बनने की वजह से उनमें आशा की नई उम्मीद जगी है।

शेख हसीना के इस उपहार से चांगरा गांव की एलिजाबेथ मुर्मू उत्साहित हैं। 38 वर्षीय इस

महिला ने कहा कि पहले किसी तरह जीवन यापन होता था। मिट्टी के घर में और आर्थिक

संकट की वजह से हर मौसम कठिनाई ही रहती थी। अब प्रधानमंत्री की इस मदद से सभी

के जीवन में बहुत संतोष आयेगा। साथ ही अपना पक्का मकान होना भी एक सम्मान के

जैसा ही है। इस गांव के पचास संथाल परिवारों को शेख हसीना के निर्देश पर पक्का मकान

बनाकर दिया गया है। इसी तरह गायबांधा और रंगपुर के इलाकों में रहने वाले जनजाति

परिवार के लोगों को भी मकान मिले हैं। वे सभी मानते हैं कि यह दरअसल सिर्फ मकान

नहीं है बल्कि सरकार की तरफ से उन्हे दिया गया सम्मान है । एलिजाबेथ के पति

बाथुराम हाजदार दिनाजपुर के विरामपुर के निवासी है। वह भी किसान हैं जबकि

एलिजाबेथ अपने पुत्र और दो बेटियों को लेकर गांव में ही रहती है। उनकी बड़ी बेटी

शताब्दी दिनाजपुर के सेंट फिलिप हाई स्कूल से हायर सेकेंडरी पास कर चुकी हैं।

शताब्दी अब अपने दोस्तों को घर बुलाय सकती है

उसने कहा कि इससे पहले कभी दोस्तों को यह नहीं बता पाती थी कि मिट्टी के घर में

कितनी कठिनाई से हमलोग रहते हैं। हर वक्त खुद को छोटा महसूस करते थे। अब दोस्तों

को यह बता सकूंगी कि हमारा भी अपना पक्का मकान है। अब तो उन्हें घर पर भी बुला

सकती हूं।

संथालों की तरह यहां पाटनी समुदाय भी बसा है। इसी समुदाय से वरिष्ठ नागरिक विनोद

बिहारी दास ने कहा कि शेख हसीना ने जो उपकार किया है, उसे भूलाया नहीं जा सकता है।

गांव की दूसरी महिला सावित्री रानी दास भी इस मकान से खुश हैं। उनके पति का निधन

करीब चालीस वर्ष पूर्व हुआ था। अपने गांव में बांस से बने उपकरण तैयार कर बेचते हुए

उन्होंने अपने दोनों बेटों को बड़ा किया है। वह भी कहती हैं कि अब लगता है कि हमलोग

भी इंसान हैं। वे चाहती हैं कि शेख हसीना ही आजीवन बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनी रहें।

शेख हसीना खुद कर रही है इसकी निगरानी

मुजीब वर्ष के मौके पर मैदानी इलाक में रहने वाले करीब तीन हजार से अधिक जनजाति

समुदाय के लोगों को पक्का मकान बनाकर देने का निर्देश शेख हसीना ने दिया था। सभी

के लिए नया और पक्का मकान बन रहा है। कुछ लोग तो अपने नये मकान में जा चुके हैं।

इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव तोजफ्फल हसन मियां ने कहा कि जनजाति

समुदाय के लोगों को पक्का मकान देने के अलावा भी स्कूल जाने वाले सभी बच्चों को

साइकिल और छात्रवृत्ति दी गयी है ताकि वे नियमित पढ़ाई कर सकें। चट्टग्राम इलाके में

बसे जनजाति समुदाय के लोगों के लिए भी साढ़े चाह हजार मकान बनाये गये हैं।

महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस पूरी परियोजना के देखरेख खुद प्रधानमंत्री शेख हसीना

ही कर रही हैं और वह नियमित तौर पर प्रगति प्रतिवेदन के जरिए काम की समीक्षा करती

रहती हैं।

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