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मप्र में भाजपा ने भी अपने विधायक हटा लिये, सियासी हलचल तेज







नईदिल्लीः मप्र में सियासी हलचल तेज होने के साथ साथ अब भाजपा भी अपनी पार्टी के

विधायकों को अलग रखने में जुट गयी है। दरअसल कल रात दो भाजपा विधायकों को मप्र

के मुख्यमंत्री कमलनाथ के आवास पर देखे जाने के बाद भाजपा नेतृत्व भी सेंधमारी से डर

गया है। दरअसल भाजपा के अंदर भी दोबारा सरकार गठन को लेकर मतभेद स्पष्ट तौर

पर उजागर हो चुके है। मप्र में कांग्रेस विधायकों को पहले ही अन्यत्र हटा लिया गया है। वे

फिलहाल राजस्थान सरकार के इलाके में हैं। जबकि खबर है कि मप्र में से भाजपा

विधायक अब हरियाणा ले जाये गये हैं।

मध्यप्रदेश विधानसभा के सोलह मार्च से प्रारंभ होने वाले बजट सत्र की तैयारियों के बीच

सियासी गतिविधियां लगातार जारी हैं और प्रमुख दल अपने विधायकों को टूटने से बचाने

के लिए राज्य से बाहर रखे हुए हैं। सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के लगभग 90 विधायकों को

राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास दो रिसार्ट में रखे जाने की सूचनाएं हैं। इसके

अलावा भाजपा के एक सौ से अधिक विधायकों को दिल्ली के पास हरियाणा राज्य में आने

वाले एक बड़े होटल में ठहराए जाने की खबर है। दरअसल इस पूरे प्रकरण में पूर्व

मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के उस बयान से खलबली मची हुई है जिसमें उन्होंने कई

विधायकों को दोबारा पार्टी के पाले मे लौट आने की बात कही गयी थी। दूसरी तरफ बागी

विधायक अब भी कर्नाटक में ही हैं और दिग्विजय सिंह के बयान के बाद वीडियो संदेश

जारी कर श्री सिंधिया के साथ होने का दावा कर रहे हैं। इन लोगों को बंगलूर में सख्त

सुरक्षा प्रबंधों के बीच ठहराए गए हैं। बंगलूर में रुके विधायक कांग्रेस से नाता तोड़कर

भाजपा का दामन थामने वाले श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक हैं।

मप्र में विधानसभा के सत्र के पूर्व गहमागहमी तेज

माना जा रहा है कि राज्य के बाहर ठहराए गए ‘सुरक्षित’ विधायकों के राजधानी भोपाल

लाने के बारे में दोनों ही दलों के रणनीतिकार तय करेंगे, जो फिलहाल राज्यसभा निर्वाचन

और सोलह मार्च से प्रारंभ होने वाले विधानसभा सत्र की स्थितियों पर नजर रखे हुए हैं।

दूसरी ओर राजनैतिक प्रेक्षकों की नजरें अब राज्यपाल लालजी टंडन और विधानसभा

अध्यक्ष एन पी प्रजापति पर भी हैं। राज्यपाल होली के बाद आज लखनऊ से भोपाल लौट

रहे हैं। दूसरी ओर श्री प्रजापति को दो दिन पहले भाजपा विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल

ने वेंगलुरु में मौजूद 19 कांग्रेस विधायकों के त्यागपत्र सौंपे थे और तब अध्यक्ष ने

आश्वासन दिया था कि वे इन पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।

इसके अलावा तीन अन्य कांग्रेस विधायकों ने भी अपने त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष को

भेज दिए हैं। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से जारी सियासी सरगर्मियों के बीच

मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी सरकार पर आए संकट को दूर करने के लिए भोपाल में रहकर

अपने प्रमुख सलाहकारों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क में रहकर रणनीति

बनाकर उसे अंजाम देने में जुटे हैं। इसमें उनका साथ मुख्य रूप से पूर्व मुख्यमंत्री

दिग्विजय सिंह दे रहे हैं। दोनों ही नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सरकार सदन में बहुमत

साबित कर देगी। राज्य विधानसभा का बजट सत्र 16 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण

के साथ प्रारंभ होगा। यह सत्र 13 अप्रैल तक प्रस्तावित है। सत्र का उद्देश्य मुख्य रूप से

वित्त वर्ष 2020 21 के वार्षिक बजट को पेश और फिर पारित कराने का कार्य पूर्ण करना

है। लेकिन राज्य में मौजूदा हालातों के मद्देनजर यह हंगामेदार और शुरूआती दिन शक्ति

परीक्षण के भी साबित होने की संभावना है

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