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माउंट सेमारू का ज्वालामुखी विस्फोट प्रारंभ हो गया इंडोनेशिया में




जकार्ताः माउंट सेमारू से ज्वालामुखी विस्फोट के संकेत मिलते ही हजारों लोग जान बचाकर वहां से भाग निकले हैं। इंडोनेशिया के पूर्वी प्रांत जावा में इस ज्वालामुखी से राख और धुआं निकलते ही लोगों का पलायन प्रारंभ हो गया था। अब तक की सूचना के मुताबिक अचानक से ऐसा होने की वजह से 13 लोगों की मौत हो गयी है जबकि 41 अन्य लोग घायल हो गये हैं।




वीडियो में देखिये यह ज्वालामुखी विस्फोट

आसमान पर काफी ऊंचाई तक राख और धुआं उठता हुआ काफी दूर से साफ साफ नजर आ रहा है। सरकारी सूचना के मुताबिक माउंट सेमारू ज्वालामुखी से राख और धुआं निकलने के बाद वहां के करीब रहने वाले तीन सौ परिवारों को तुरंत अन्यत्र हटा लिया गया है।

लुमाजांग जिला के उप प्रमुख इंदाह अमपेरावाटी ने जानकारी दी है कि अधिकांश लोग गर्म राख की चपेट में आकर घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। वैसे माउंट सेमारू ज्वालामुखी के पास बसे गांव कुराह कोबोकान में एक व्यक्ति मारा गया है।




इस इलाके में कई गांवों तक अभी राहत दल नहीं पहुंच पाया है क्योंकि वहां राख की वजह से सड़क पर कीचड़ बन गया है और अनेक सड़कों पर बड़े बड़े पेड़ भी गिर गये हैं। लेकिन वहां के लोगों को भी ज्वालामुखी से यथा संभव दूर चले जाने का निर्देश दिया जा रहा है। इंडोनेशिया की सरकार ने अपनी सेना को भी अतिरिक्त मदद के लिए तैयार रहने के निर्देश जारी कर दिया है।

माउंट सेमारू से दोपहर तीन बजे अचानक विस्फोट होने लगा

मिली जानकारी के मुताबिक स्थानीय समय के अनुसार दोपहर तीन बजे अचानक से ज्वालामुखी से राख निकलने के बाद पूरे इलाके में गंधक की महक फैल गयी थी। इससे लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ होने लगी थी। राख के गिरने से आस पास की सड़कों पर जहां नमी अधिक थी, वहां कीचड़ ही कीचड़ हो गया।

इसके बीच ही लोग ज्वालामुखी से निकलते राख और धुआं को देखकर ही इसमें विस्फोट की आशंका से पैदल भी भागने लगे। जिसके हाथ जो सामान लगा वह उसे लेकर भाग निकला। बाद में यह जानकारी मिली कि आस पास के गांवों के तमाम घरों में राख की मोटी पर्त जमा हो गयी है। गर्म राख की चपेट में आने की वजह से ही अनेक लोग जल गये हैं।

अब सरकार की तरफ से अन्य गांवों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने तथा जो लोग घर छोड़कर भाग निकले हैं, उनके लिए भोजन जैसी व्यवस्था करने का काम चल रही है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि दरअसल इंडोनेशिया देश ही दो महाद्वीपों के बीच स्थित रिंग ऑफ फायर के ठीक ऊपर बसा है। इसके नीचे पहले से ही बहुत अधिक टेक्टोनिक प्लेटों का टकराव होता रहता है।



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