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घर में सज रही थी मां की अर्थी, छोटी-छोटी बेटियां ढो रही थी दूर एक चुएं से पानी

बुढ़मू : घर की स्थिति किस हद तक इंसान को मजबूर कर देती है ऐसा एक वाक्या बुढ़मू

प्रखंड में मंगलवार को देखने को मिला जब छोटी-छोटी तीन बेटियों को छोड़ एक माँ ने

अपना आँचल समेट लिया और दुनिया छोड़ कर चली गयी। बता दें कि बुढ़मू प्रखंड क्षेत्र के

ओझासाड़म पंचायत के तारे महुआ टोला के रहने वाला अघनू गंझू की पत्नी बिंदिया देवी

का समय पर इलाज नही होने कारण दम तोड़ दिया। बिंदिया देवी वर्तमान में मजदूरी का

काम करती थी। जानकारी के अनुसार ठाकुरगांव के ईंट भट्ठे में मजदूरी का काम करके

अपना जीवन यापन करती थी। इस दौरान बिंदिया देवी की तबीयत अचानक खराब हो

गयी। और बिंदिया देवी की गरीबी के कारण इलाज नहीं हो सका। मिली जानकारी के

अनुसार आर्थिक स्थिति दयनिय था। इस दौरान किसी ने साथ नहीं दिया। साथ ही

जानकारी का अभाव के कारण सरकारी चिकित्सा सेवा नहीं पा सके। इस दौरान कोरोना

वायरस के कारण लॉक डाउन क्षेत्र में जारी है। इस दौरान स्थानीय मुखिया को इसकी

जानकारी लेनी चाहिए थी। लेकिन किसी ने जानकारी नही ली। जिसके कारण बिंदिया

देवी ने अपने घर में ही दम तोड़ दिया है। बिंदिया देवी अपने पीछे तीन छोटे-छोटे बेटियों

को छोड़कर इस दुनिया से चल बसी। मृतक का एक लड़की 8 वर्ष, दूसरा 6 वर्ष और तीसरा

4 वर्ष का है। जो मां के मृत्यु के बाद अनाथ हो गये। सूचना मिलने के बाद मंगलवार को

ओझासाड़म पंचायत के मुखिया के साथ पीड़ित परिवार से मिलने बुढ़मू बीडीओ संजीव

कुमार मृतक बिंदिया देवी के घर पहुंचे। और परिवार के लोगों से मुलाकात किया।

घर की दयनीय स्थिति में सहयोग बना अंतिम क्रिया का रास्ता

सहयोग हेतु 10 किलो चावल एवं सहायता राशि के रूप में 1000 रुपया नगद दिया।

जानकारी के अनुसार बुढ़मू प्रखंड के ओझासाड़म पंचायत के समाज सेवी गौतम यादव ने

हमेशा पीड़ित परिवार को सहयोग किया। गौतम यादव सूचना पाकर मृतक के घर

पहुंचकर परिजनों से मिलकर 2500 रुपए की मदद किया। और कहा कि उक्त रुपया

मृतक के अंतिम संस्कार सहित अन्य कार्य के लिए सहयोग है। साथ ही पीड़ित परिवार के

लोगों से मिलकर दु:ख व्यक्त किया। वहीं मंगलवार को समाज के नियमानुसार बिंदिया

देवी का अंतिम संस्कार गांव वालों के सहयोग से किया गया। जानकारी के अनुसार करीब

पंद्रह दिन पहले बिंदिया देवी ने एक ईट भट्ठा में कार्य करने के दौरान एक शिशु को जन्म

दिया था। जन्म के बाद ही बच्चे की मृत्यु हो गई थी और बिंदीया देवी को बुखार हो गया

था। भट्ठा संचालक के द्वारा कुछ पैसा देकर बिंदिया देवी को घर भिजवा दिया गया। 21

मई को गांव के ग्रामीणों से सहयोग लेकर अघनु अपनी पत्नी का ईलाज कराने के लिए

बुढ़मू लाया, जहां एक प्राइवेट क्लिनिक ने ईलाज करने से मना कर दिया। सीएचसी बुढ़मू

में महिला के लक्षण के आधार पर बगैर जांच (कोरोना के भय के कारण) किये दवा देकर

घर भेज दिया गया। बिंदीया देवी गांव के एक ग्रामीण के साथ उसी समय अंचलाधिकारी

एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी से मिली, तो वहां से दस किलो चावल देकर घर भेज दिया

गया। कहीं ईलाज नहीं होने के बाद गांव के झोला छाप डॉक्टर से बिंदिया देवी का ईलाज

कराया गया और अंतत: 26 मई को दिन में बिंदिया देवी इस दुनिया से विदा हो गई।

बच्चियों की परवरिश की बढ़ी चिंता

सूचना पाकर पिड़ित के परिजनों से रांची जिप उपाध्यक्ष मिली। बिंदिया देवी ईंट भट्ठा से

लौटने के बाद अपने चचेरे भैसूर देवठान गंझू के मकान में अपने पति एवं तीन छोटी-छोटी

बेटियों के साथ रहती थी। अब अघनु गंझू को यहीं चिंता सता रही है कि इनकी बच्चियों

की परवरिश कैसे होगी। मामले की जानकारी देते हुए बताया कि एक तरफ मां की अर्थी

सज रही थी तो दूसरी तरफ बिंदिया देवी की छोटी-छोटी बेटियां घर से दूर एक चुआं से

पानी ला रही थी। ऐसी स्थिती कि न मरने के पहले किसी ने साथ दिया न मरने के बाद ही।

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