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बच्चे को जन्म देने जंगल छोड़ गांव चला गया मादा गैंडा

प्रतिनिधि

अलीपुरदुआरः बच्चे को जन्म देने के लिए जंगल से निकलकर मा गैंडे ने गांव की खेत में

बच्चे को जन्म दिया। जलदापाड़ा अभयारण्य के बाहर निकलकर अपने बच्चे को जन्म

देने के बाद माता की हालत बिगड़ गयी थी। वैसे उसकी हालत बिगड़ते ही आस पास के

गांव वाले और वन विभाग के लोग उसे बचान में जुट गये। आम तौर गैंडा मादा जंगल के

अंदर ही पानी के स्थान के करीब अपने बच्चे को जन्म देती है। जंगल से बाहर आकर गांव

की खेती की जमीन पर इस किस्म की घटना पहली बार घटी है। गांव की नदी के बांध पर

विदुर विश्वास के खेत पर आने के बाद गैंडा ने बच्चे को जन्म दिया। वैसे पहले से ही वन

विभाग की नजर इस मादा गैंडे पर थी। लोगों ने उसकी हालत दूर से ही देखी और उसकी

स्थिति में गिरावट नजर आते ही उसे बचाने में सारे लोग जुट गये। यह सारा वाकया

सीधाबाड़ी गांव की है।

बच्चे को जन्म की सूचना पर वन विशेषज्ञ हैरान

सूचना पर वन विभाग के विशेषज्ञ भी वहां भागे भागे पहुंचे। सबसे पहले गैंडा शावक को

सुरक्षित रखने के लिए मां से अलग किया गया। लेकिन बीमार होने के बाद भी मादा को

काबू करना लोगों के वश में नहीं था। इसीलिए उसे नींद की गोली मारकर बेहोश किया

गया। आकार में विशाल और वजन में काफी भारी होने की वजह से उसे वहां से उठाने के

लिए क्रेन का सहारा लेना पड़ा। क्रेन के सहारे इस बीमार मादा को जंगल के भीतर ही ले

जाया गया है। वन विशेषज्ञों के मुताबिक ग्रामीणों की भीड़ की वजह से भी इस जंगली

जानवर के उत्तेजित होने का खतरा होता है। बेहोशी से मुक्त होने के बाद खुद को अपने

स्वाभाविक इलाके में पाकर मादा थोड़ी बेहतर रहेगी। वैसे जंगल के अंदर भी इसके ईलाज

के लिए नजरदारी का इंतजाम किया गया है। इस घटना ने वन्य प्राणी विशेषज्ञों को भी

हैरान कर रखा है क्योंकि आम तौर पर गैंडे कमसे कम ऐसे अवसरों पर अक्सर अपने

स्वाभाविक परिवेश में ही बने रहते हैं। यह मादा गैंडा जंगल छोड़कर गांव की तरफ क्यों

चली आयी, यह बात अब तक समझ में नहीं आयी है।

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