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यूपी के पंचायत चुनाव पर किसान आंदोलन का प्रभाव

यूपी के पंचायत चुनाव में सबसे अधिक निर्दलीय विजयी हुए हैं। इस चुनाव में एक तरफ

जहां सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा समर्थित सदस्यों को ज्यादातर जनता ने नकारा तो वहीं सपा

कोविड-19 के बिगड़े माहौल और भाजपा के विरोध का फायदा उठाते हुए अपने सदस्यों को

जिताने में कामयाब रही। खास बात यह रही कि जीते हुए सदस्यों में सबसे ज्यादा

निर्दलीय हैं। अब जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में निर्दलीय पर निर्भर होकर भाजपा

और सपा चुनाव मैदान में जंग लड़ेगी। परिणाम यह बताते हैं कि यूपी के 75 जिलों में कुल

3050 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी और सपा से ज्यादा निर्दलीयों ने जीत दर्ज की। जिला

पंचायत सदस्यों के 3047 सीटों में सपा 759, भाजपा 768, बसपा 319, कांग्रेस 125, रालोद

69, आप 64 और निर्दलीयों को 944 सीटें मिली हैं। खास बात यह है कि निर्दलीय जीते हुए

प्रत्याशी सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज होकर चुनाव लड़े थे। ऐसा ही

समाजवादी पार्टी के भी कई सदस्यों को पार्टी का समर्थन नहीं मिला था। वह भी नाराज

होकर मैदान में उतरे और चुनाव जीतकर पहुंचे हैं। लेकिन असली मुद्दा इस यूपी के

पंचायत चुनाव में किसान आंदोलन के प्रभाव का रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में

भाजपा को इस बात का एहसास हो चुका होगा कि किसानों को नाराज कर उसने अपने

लिए खाई खोद ली है। पंचायत चुनाव को सत्तारूढ़ दल बीजेपी और दूसरी पार्टियां

विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल बता रही थीं। सूत्रों के अनुसार, बगावती तेवर,

विधायकों की पसंद को तरजीह देना, संगठन और जनप्रतिनिधियों में तालमेल का अभाव

ने टारगेट भेदने में बीजेपी चूक गई। वेस्ट यूपी की राजधानी कहे जाने वाले जिले मेरठ में

बीजेपी को झटका लगा है।

यूपी के पंचायत चुनाव से विपक्ष को ऑक्सीजन मिला

33 वॉर्डों में से बीजेपी समर्थित सिर्फ छह कैंडिडेट जीते। एसपी के सात, बीएसपी के नौ

और आरएलडी के छह कैंडिडेट को जीत मिली। सपा ने कहा, जनता ने पंचायत चुनाव में

यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियां और व्यवस्था और उसके

द्वारा किए गए कार्यों को जनता पसंद नहीं कर रही है। इनके द्वारा लोगों को प्रताड़ित

किया जा रहा है, वह जनता ने नकार दिया है। नफरत की राजनीति किसी भी कीमत पर

जनता पसंद नहीं करती। भारतीय जनता पार्टी की पॉलिटिक्स फेल हो गई है। जिला

पंचायत, ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत के परिणाम से यह साबित हो गया है कि भारतीय

जनता पार्टी की जुमलेबाजी वादाखिलाफी सब दिखावा है। विधानसभा चुनावों में बहुत बुरा

प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा, पंचायत चुनाव में

कांग्रेस पार्टी ने संतोषजनक प्रदर्शन किया है। उनकी पार्टी के 270 जिला पंचायत सदस्य

और समर्थित जीते हैं। 571 जिला पंचायत सदस्य दूसरे नंबर पर रहे। 711 कांग्रेस के

प्रत्याशी समर्थक तीसरे पायदान पर रहे हैं। हमारी नेता प्रियंका गांधी के नेतृत्व में प्रदेश में

क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत के पदाधिकारी चुनाव जीते हैं। जिस तरीके से लगातार जनता

के हित में कांग्रेस प्रदेश की कानून व्यवस्था के खिलाफ बेरोजगारी के खिलाफ संघर्ष कर

रही है। वह जनता पसंद कर रही है। आने वाले समय में इसका परिणाम उत्तर प्रदेश के

विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा। लेकिन असली मुद्दा तो यूपी के पंचायत

चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन का था।

त्रिस्तरीय चुनाव में भाजपा विरोधी दल अधिक सक्रिय

इस त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जिला पंचायत में तय लक्ष्य 80

फीसदी सीटों को नहीं भेद सकी। माना जा रहा कि कमजोर रणनीति और किसान

आंदोलन की तपिश से वेस्ट यूपी में कमल एक तरह से मुरझा गया। किसान बेल्ट मेरठ,

बागपत, सहारनपुर, शामली, मथुरा, अलीगढ़ आदि जिलों में बीजेपी चुनाव में काफी कम

सीट हासिल कर पाई। सियासी जानकार इस बदलाव को बीजेपी के लिए अगले साल होने

वाले विधानसभा चुनाव में खतरे के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। बिजनौर में एसपी और

आरएलडी गठबंधन ने बीजेपी को पछाड़ दिया। एसपी को 20, आरएलडी को तीन, किसान

कैंडिडेट को दो, बीएसपी को 10 और बीजेपी को आठ सीटें मिल चुकी हैं। बाकी निर्दलीय के

खाते में चली गई। उधर, सहारनपुर में बीएसपी ने 18 और बीजेपी ने 14 में दम भरा।

कांग्रेस ने छलांग लगा 13 सीटों पर दबदबा रखा। आजाद समाज पार्टी समेत कई निर्दलीय

भी मजबूत रहे। शामली में 19 सीटों में से बीजेपी चार पर मजबूत रही। पांच पर आरएलडी

दो पर एसपी और बाकी पर निर्दलीय का परचम रहा। बागपत में जिला पंचायत के बीस

वॉर्डों में से 8 पर आरएलडी, 4-4 पर बीजेपी और एसपी, एक पर बीएसपी और तीन पर

निर्दलीय जीते। यानी यूपी के पंचायत चुनाव के बाद भाजपा ने किसान आंदोलन पर

अपनी रुख की वजह से विरोधियों को यह समझने का अवसर प्रदान कर दिया है कि वह

अपराजेय नहीं हैं।

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