fbpx Press "Enter" to skip to content

अयोध्या में मसजिद निर्माण को हिंदुओं का भी व्यापक समर्थन




  • विशेष प्रतिनिधि

अयोध्याः अयोध्या में मसजिद निर्माण की प्रक्रिया जमीन हस्तांतरण के साथ ही प्रारंभ हो

गयी है। गत 2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक पांच एकड़ जमीन उत्तर

प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को सौंप दी गयी है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन

के साथ साथ अब मसजिद निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा। सुप्रीम कोर्ट ने इस

शतकों के विवाद को अपने फैसले से समाप्त करने का काम किया है। इसमें विवादित

जमीन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए सौंपने के साथ साथ मसजिद को अन्यत्र बनाने

का फैसला सुनाया गया था।

मसजिद के लिए जमीन आवंटित किये जाने के बाद इसे बनाने के लिए एक पंद्रह

सदस्यीय ट्रस्ट का गठन किया गया है। वक्फ बोर्ड द्वारा गठित इस ट्रस्ट को अब दुनिया

भर से मसजिद निर्माण के लिए मदद के प्रस्ताव आ रहे हैं। इन प्रस्तावों में से साठ

प्रतिशत से अधिक प्रस्ताव हिंदुओं के हैं, इसे देखकर ट्रस्ट के सदस्य खुद ही

आश्चर्यचकित हैं। उनलोगों का मानना है कि इस किस्म के उत्साह से ऐसा लगता है कि

मसजिद निर्माण में धन की कमी आड़े नहीं आयेगी।

अयोध्या में मसजिद के साथ साथ कई अन्य केंद्र बनेंगे

ट्रस्ट के सदस्य तथा इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के प्रवक्ता अतहर हुसैन ने

बताया है कि मसजिद परिसर में मसजिद के अलावा एक अस्पताल, एक सामुदायिक

किचन और शैक्षणिक संस्थान बनाने की योजना है। इसे पूरा करने की योजना बनकर

तैयार होने के पहले से ही आर्थिक दान का प्रस्ताव मिलना प्रारंभ हो गया था। ट्रस्ट ने काम

को गति देने के लिए अपना बैंक खाता भी खोल लिया है। वैसे कोरोना की वजह से इसके

काम अभी धीमी गति से ही चल रहे हैं। ट्रस्ट के सदस्यों ने हाल ही में एक वर्चुअल बैठक

भी की थी, जिसमें सभी मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया है। वैसे इस मुद्दे पर आगे काम

करने को लेकर कुछ मतभेद हैं, जिन्हें सुलझान की कोशिश हो रही है। दूसरी तरफ श्रीराम

मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख महंत नृत्यगोपाल दास ने यह एलान किया है कि अगर कोई दूसरे

धर्म का अनुयायी भी मंदिर निर्माण के लिए दान देना चाहेगा तो उसका स्वागत है।

उन्होंने कहा कि अयोध्या के सांप्रदायिक सदभाव को देखते हुए इसी भावना को आगे और

मजबूत बनाने की दिशा में काम करने की जरूरत है।

दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पक्षकार रहे कुछ और लोग वहां अन्यत्र मसजिद

बनाये जाने के विरोधी हैं। वह मानते हैं कि 16वीं सदी में बने मसजिद को गलत तरीके से

तोड़ा गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित ऐसे पक्षकार दूसरी जमीन पर

मसजिद बनाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने की दलील दे रहे हैं।

[subscribe2]



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from अदालतMore posts in अदालत »
More from इतिहासMore posts in इतिहास »
More from उत्तरप्रदेशMore posts in उत्तरप्रदेश »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

Be First to Comment

... ... ...
%d bloggers like this: