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दो दर्जन से अधिक मजदूरों को नहीं मिली किसी सरकार की मदद

  • स्थानीय पत्रकार की मदद के बाद पैदल ही नालंदा के लिए बढ़े

चांडिलः दो दर्जन से अधिक मजदूरों को राहत पहुंचाने की सारी सरकारी कोशिश आज

बेकार साबित हुई। दरअसल यहां के स्थानीय लोगों ने छोटे छोटे बच्चों के साथ पैदल जा

रहे 25-30 लोगों को देखा तो रोककर जानकारी ली। स्थानीय लोगों ने वहां के पत्रकार

बसंत कुमार साहू को सबसे पहले इसकी सूचना दी। इस सूचना पर खुद श्री साहू वहां

पहुंचे। मजदूरों से हुई बात-चीत से पता चला कि वे टाटा लंग प्रोडक्ट लिमिटेड, गम्हरिया

में तीन-चार महीने से काम कर रहे थे। अचानक लॉक डाउन होने के बाद कंपनी से कोई

खोज खबर नहीं ली। इनलोगों को वेतन भी नहीं मिला। मजबूरी में वे कंपनी से पैदल ही

अपने गांव नालंदा जिला की तरफ निकल पड़े हैं। एक मजदूर राधेश्याम पासवान ने कहा

कि उसे पैदल ही रसोलपुर, थाना हिलसा जाना है। राधेश्याम पासवान ने चाण्डिल

अनुमंडल पदाधिकारी को 943130002 में मेरे सामने फोन किया उन्होंने कुछ भी मदद

नहीं करने कि बात कही। मैं बसंत कुमार साहू पत्रकार चांडिल ने स्वंय नालन्दा D.M को

फोन किया लेकिन फोन नहीं उठाया। इसके बाद मैंने बिहार पंचायत राज उपसचिव

ओमप्रकाश यादव को फोन किया । उन्होंने नालन्दा D.M, 9473191214 , आपदा प्रबंधन

विभाग नालन्दा 06112233168 नम्बर दिया। D.M नालन्दा फोन नहीं उठाया , आपदा

प्रबंधन विभाग नालन्दा फोन उठाया , उन्होंने सरायकेला खरसावां उप विकास आयुक्त

9430381370 एवं 9798302485 नम्बर दिया । 9798302485 में एक महिला उठायी ,

उन्होंने 9798302486 नम्बर दिया ।

दो दर्जन से अधिक की जिम्मेदारी सभी ने टाल दी

इनसे बात किया तो ये साहेब बोले कि अनुमंडल पदाधिकारी चांडिल से बात किजिए। इस

तरह सरकारी पदाधिकारियों ने अपने जिम्मेदारी को कोई नहीं लिया। इस कोशिश में यह

स्पष्ट हो गया कि जब देश का भविष्य गढ़ने वाले मजदूर वाकई समस्या में पड़े होते हैं तो

कोई सरकार उनकी मदद से लिए आगे नहीं आती। स्थानीय प्रशासन भी अगर चाहे तो

इन मजदूरों को अगली व्यवस्था होने तक क्वारेंटीन के खाली इलाकों में रख सकता था।

अंततः पत्रकार बसंत साहू ने सभी को खाना खिलाने के बाद दो हजार रुपये दिये। उसके

बाद लाचार मजदूर फिर से पैदल ही नालंदा के लिए निकल पड़े।


 

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