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भवानीपुर विधानसभा के उपचुनाव में पचास हजार से ज्यादा या कम की अटकलबाजी




ममता की जीत को तय मान चुके हैं दूसरे दल भी
कांग्रेसी नेता अधीर मानते हैं कि ममता जीत रही हैं
दोनों दलों ने इसी रणनीति पर काम किया है
भाजपा नेता ने भाजपा को कटघरे में खड़ा किया
राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः भवानीपुर विधानसभा के उपचुनाव में ममता बनर्जी कितने वोटों से विजयी होंगे, इसपर अटकलबाजी का दौर जारी है। पक्ष और विपक्ष दोनों के बयानों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के इस सीट पर जीतने को लेकर संशय की स्थिति नहीं है।




यहां तक कि भाजपा के नेता जय बंदोपाध्याय का बयान फिर से भाजपा के लिए ही बड़ा झटका सा है। दूसरी तरफ परोक्ष तौर पर कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी दूसरे तरीके से यह मान लिया है कि भवानीपुर विधानसभा के उपचुनाव में ममता बनर्जी जीतने जा रही है।

स्थानीय स्तर पर अब यह अटकलबाजी जोरों पर है कि जीत का अंतर पचास हजार से अधिक होगा या कम।

नंदीग्राम के चुनाव में ममता बनर्जी के पराजित होने तथा पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को प्रचंड जीत मिलने के बाद ही यह तय हो गया था कि ममता बनर्जी अपनी पुरानी सीट से ही दोबारा चुनाव लड़ेंगी।

इसी वजह से इस सीट से चुनाव जीतने वाले शोभनदेव ने इस्तीफा भी दे दिया था। चुनाव प्रचार में आगे होने के दौरान ही तृणमूल कांग्रेस के नेता इस रणनीति पर काम कर रहे थे कि इस बार जीत का अंतर को बढ़ाना है।

दूसरी तरफ काफी देर से चुनावी मैदान में उतरी भारतीय जनता पार्टी की रणनीति जीत के अंतर को कम करना था। अब चुनाव समाप्त होने के बाद जीत तय होने के बीच यह आकलन हो रहा है कि इस बार ममता बनर्जी इस सीट से पचास हजार से कम अथवा अधिक वोटों से जीत पायेंगे।

भवानीपुर विधानसभा के उपचुनाव में कम मतदान

दरअसल खराब मौसम की वजह से भवानीपुर विधानसभा के उपचुनाव में मतदान का प्रतिशत कम रहा है। इसी वजह स हार जीत के अंतर को स्पष्ट तौर पर समझ पाना कठिन हो गया है।

इस सीट के कुछ इलाकों पर भाजपा का प्रभाव होने उम्मीद में भाजपा खेमा यह मान रहा है कि वे जीत के अंतर को कम करने में सफल होंगे।




दूसरी तरफ तृणमूल खेमा मान रहा है कि शोभनदेव की जीत से आगे बढ़ते हुए वे पचास हजार से अधिक वोटों से चुनाव जीतेंगी।

इस अटकलबाजी के बीच ही भाजपा नेता जय बंदोपाध्याय ने यह बयान दिया है कि फिर से भाजपा ने अपनी वही गलती दोहरायी है, जो राज्य के विधानसभा चुनाव में की गयी थी।

बंगालियो के इलाके में गैर बंगालियों के सहारे चुनाव लड़ने क कवायद ही गलत रणनीति है। खासकर इसी मुद्दे पर जब मतदाताओं ने भाजपा को विधानसभा चुनाव में नकार दिया था तो उसे दोबारा से आजमाने की आवश्यकता नहीं थी।

दूसरी तरफ इस बयान का खंडन नहीं करने के बाद भी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को ममता को जीताने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

अब वैसे भी कांग्रेस की इस राज्य में कोई राजनीतिक भूमिका नहीं है। इसलिए अधीर रंजन के पास भी कोई काम नहीं बचा है।

इस बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने खुद स्वीकार किया है कि ममता बनर्जी ने पहले भी यहां से चुनाव जीता है और इस बार के जो राजनीतिक हालात हैं, उससे वह फिर से जीतने जा रही हैं।

कुल मिलाकर भवानीपुर विधानसभा के उपचुनाव में जीत का अंतर पचास हजार से कम या ज्यादा होगा, यही अभी चर्चा का विषय बना हुआ है।



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