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राज्य के दो लाख मत्स्य पालकों पर संकट के बादल, घटा उत्पादन

  • कोरोना संकट ने राज्य के मत्स्य पालन पर भी डाला कुप्रभाव
  • सात हजार मेट्रिक टन उत्पादन कम होने की सूचना
  • लॉक डाउन में जाल नहीं डाल पाये मछुआरे
  • अगले साल का लक्ष्य भी अब पूरा होना कठिन

रांची : राज्य के दो लाख के करीब मत्स्य पालकों पर भी कोरोना का संकट

छाया है। इन सभी पर लॉक डाउन की वजह से मंदी की मार पड़ी है। दरअसल

इस लॉक डाउन की अवधि में मछली उत्पादन कम होने से इसके स्पष्ट संकेत

मिले हैं। सरकारी आंकड़ों में करीब सात हजार टन मछली का उत्पादन घटा

है। इस लॉक डाउन की अवधि में मछुआरे तालाब अथवा डैमों में जाल भी नहीं

जाल पाये हैं। दूसरी तरफ जो अपने तालाब में मत्स्य पालन का काम करते हैं, वे

भी तालाब की देखभाल नहीं कर पाये हैं। इससे अब मछली पालन का कारोबार

फिलहाल संकटपूर्ण स्थिति में नजर आ रहा है। पचास दिन से अधिक के इस

लॉक डाउन में आगे क्या फैसला होगा, इस पर घोषणा में अब भी चौबीस घंटे

शेष हैं। इस बीच इस ग्रामीण और लघु उद्योग के भरोसे जीवन यापन करने वाले

करीब दस लाख लोगों के लिए भी यह भोजन का संकट बनकर आया है। इस

घटनाक्रम से विभागीय अधिकारी भी अब यह मान रहे हैं कि इस साल मछली

उत्पादन सा लक्ष्य पूरा नहीं होने जा रहा है। साथ ही भावी योजनाओं पर भी इस

कोरोना महामारी से हुई लॉक डाउन का असर जारी रहने की आशंका है।

राज्य में 2 लाख 30 हजार एमटी (मीट्रिक टन) मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य

मत्स्य विभाग के अनुसार 2019-20 में 2 लाख 30 हजार एमटी (मीट्रिक टन)

तक मछली के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। फरवरी 2020 तक फिश

प्रोडक्शन की गति ठीक थी। मार्च में लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही मछली

उत्पादन से जुड़े काम ठप हो गए। केंद्र सरकार की पहल पर 20 अप्रैल से

कृषि, पशुपालन संबंधी कार्यों के लिए अनुमति मिली। पर मछुआरों को इसका

लाभ उठाने में चुनौती बनी रही। ऐसे में लॉकडाउन के बाद से अब तक 7 हजार

एमटी की कमी हो चुकी है। इससे इस साल मछली उत्पादन का टारगेट पूरा

नहीं हो सका है। इस बार यह आंकड़ा 2 लाख 23 हजार तक ही सिमट कर रह

गया है। विभाग के मुताबिक मत्स्य उत्पादन के भरोसे लगभग 2 लाख परिवार

रोजी रोटी कमाते हैं। इसके अलावा 7500 मत्स्य मित्र भी हैं। लॉकडाउन खत्म

होने के बाद से मछली उत्पादन में सुधार का माहौल बनना पुन: शुरू होगा।

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