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तक्षशिला से ज्यादा प्राचीन बौद्ध मंदिर मिला पाकिस्तान में




राष्ट्रीय खबर




नईदिल्लीः तक्षशिला के बारे में हम सभी इतिहास और धर्म की वजह से पहले से ही परिचित है। इसे अन्यतम प्राचीन इतिहास का एक हिस्सा और सांस्कृतिक विरासत समझा जाता है। अब पहली बार पाकिस्तान में ऐसे बौद्ध मंदिर का पता चला है जिसकी उम्र इस तक्षशिला से भी अधिक है।

प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम में स्थित खैबर पख्तुनवा इलाके के स्वात जिला में इसका पता चला है। वहां के बारीकोट तकसील के बाजिरा शहर में खनन के दौरान इसके पुरातत्व के अवशेष पाये गये हैं। इस बारे में जानकारी रखने वालों के मुताबिक यह अब तक दुनिया में पाया गया सबसे प्राचीन बौद्ध मंदिर का क्षेत्र है।

यह करीब 23 सौ वर्ष पुरानी है। वहां मंदिर के अलावा भी पुरातत्व के महत्व की कुछ अन्य चीजों का भी पता चला है। वैसे इस बात के ऐतिहासिक प्रमाण पहले से ही थे कि प्राचीन काल में यहां बौद्ध धर्म के लोग थे। अफगानिस्तान के मध्य इलाके मंइ स्थित बामियान में भी पहाड़ी पर बौद्ध प्रतिमाओं की खुदाई थी।

इसे देखने अनेक पर्यटक भी आया करते थे। तालिबान ने अपने पूर्व शासन काल के दौरान उन्हें ध्वस्त कर दिया था। तक्षशिला से प्राचीन जो बौद्ध मंदिर अब पाकिस्तान में मिला है, उसकी खोज पाकिस्तान के लिहाज से सबसे पुरानी है।




तक्षशिला से प्राचीन धरोहरों पर अभी काम जारी है

वहां चलाये गये खनन कार्य के दौरान 27 सौ से अधिक साक्ष्य एकत्रित किये गये हैं, जो उस प्राचीन काल की स्थिति में बौद्ध धर्म के वहां होने का संकेत देते हैं। वहां जो चीजें मिलने की जानकारी सार्वजनिक की गयी है, उनमें उस प्राचीन काल की मुद्रा, अंगूठी, बरतन और ग्रीक के राजा मेनांदर अथवा मिलिंद के जमाने के खरोष्ठी लिपि में लिखे गये संकेत भी हैं।

बता दें कि इस ग्रीक राजा को बौद्ध भिक्षु नागसेन ने बौद्ध धर्म में दीक्षित किया था। पाली धर्म के साहित्य में इसका लगातार उल्लेख किया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक इटली के खोजखर्ता डॉ लुका मारिया अलिवेरी ने अपनी देखरेख में यह खनन कार्य कराया है।

वह कहती हैं कि स्वात के इलाके में जो अवशेष मिले हैं, वे निश्चित तौर पर तक्षशिला से पुराने काल के हैं। इस खोज के बाद वहां के म्युजियम के निदेशक डॉ अब्दुस सामाद ने भी उम्मीद जतायी है कि आस पास के इलाकों से अभी और प्राचीन अवशेष भी मिल सकते हैं।

फिलहाल इटली और खैबर पख्तुनबा के शोधकर्ता इस इलाके में काम कर रहे हैं। इटली के विशेषज्ञ पाकिस्तान के इन प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों को फिर से खोजने तथा उन्हें वैज्ञानिक तरीके से परिभाषित करने का काम कर रहे हैं।



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