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जनता का मिजाज इस बार बदला बदला सा नजर आता है




  • असली मुद्दों पर नेताओं से जवाब चाहते हैं मतदाता
  • जनता अपनी बात कहने लगी है अब
  • आप की गारंटी से परेशान दूसरे दल
  • गोवा में ममता बनर्जी की उल्टी गंगा

राष्ट्रीय खबर




नईदिल्लीः जनता का मिजाज शायद बदल गया है। इसे भी सोशल मीडिया का सकारात्मक पक्ष कहा जा सकता है कि जनता के लिए राजनीतिक दल जो राजनीतिक मसला परोस रहे हैं, उसके बदले बार बार जनता अपने असली मुद्दों पर उत्तर मांग रही है। जाहिर तौर पर इससे सभी राजनीतिक दलों को परेशानी है क्योंकि किसी को भी इस तरीके से जनता के सवालों का उत्तर देने का कोई पूर्वाभ्यास नहीं रहा है। बाबा विश्वनाथ के दरबार में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों में भीड़ जबर्दस्त रही है। लेकिन इसी भीड़ में मौजूद लोग रैली की समाप्ति के बाद अपने असली मुद्दों पर श्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते पाये गये हैं। दूसरी तरफ बार बार भाजपा की तरफ से उत्तरप्रदेश में हिंदू मुसलमान का माहौल फिर से पैदा करने की कोशिशों को भी इस बार गति मिलता नजर नहीं आ रहा है। तमाम किस्म की चर्चा के बीच ही आम जनता का बहुमत अब महंगाई, पेट्रोल की कीमतों, रोजगार और आम जनता के लिए क्या कुछ होने वाला है, इन सवालों का जबाव चाहते हैं। यह परेशानी सिर्फ मोदी या योगी आदित्यनाथ की नहीं है। उत्तरप्रदेश के विधानसभा के चुनाव में प्रमुख विपक्ष के तौर पर उभर चुके अखिलेश यादव की जनसभाओं के बाद भी यही सवाल जनता को मथ रहा है।




जनता का मिजाज हर जनसभा के बाद स्पष्ट होता है

पंजाब में तमाम राजनीतिक दलों से अलग आम आदमी पार्टी ने अपनी गारंटियों की घोषणा कर सभी दलों को संकट में डाल रखा है। अब तो आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखंड में भी हर महिला को एक हजार रुपये प्रति माह देने की चौथी गारंटी का एलान कर भाजपा और कांग्रेस को परेशान कर दिया है। दरअसल इस बार के चुनाव में वैसे राज्य जो दिल्ली के करीब हैं, दिल्ली के बदलाव से प्रभावित नजर आ रहे हैं। लोगों का स्वाभाविक सवाल है कि जब एक केंद्र शासित प्रदेश में इतना कुछ हो सकता है तो अन्य राज्यों में इतने दिनों में ऐसा क्यों नहीं हो पाया है। पंजाब की बात करें तो कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अब वाकई कांग्रेस को झटका देने का काम प्रारंभ कर दिया है। यूं तो कैप्टन यह कह रहे हैं कि उनका मकसद चुनाव जीतना है लेकिन उनके इस कथन से कांग्रेस के वोट कम हो रहे हैं, यह भी जगजाहिर है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू के बीच का विवाद अब तक पार्टी को पटरी पर लौटने नहीं दे रहा है। किसान आंदोलन के समाप्त होने के बाद पंजाब के किसान अपने घरों को लौट चुके हैं। इन ग्रामीण इलाकों से जो संकेत सुनाई पड़ रहे हैं, वे भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। आंदोलन जारी रहने के दौरान इन किसानों का भाजपा समर्थकों और खास तौर पर कुछ चैनलों की तरफ से जो अपमान किया गया था, वह अब गले की हड्डी बना हुआ है।  

ममता बनर्जी ने गोवा में दिया उल्टा प्रस्ताव

गोवा की बात करें तो वहां ममता बनर्जी उल्टी गंगा बहाने की बात करने लगी हैं। उन्होने कहा है कि अगर भाजपा को परास्त करने के लिए कांग्रेस को लगता है तो वह टीएमसी के साथ गठबंधन में शामिल हो सकती है। यानी ऐसा कहकर ममता बनर्जी दोनों राष्ट्रीय दलों को यह संदेश दे रही है कि अगले लोकसभा चुनाव तक टीएमसी को वह तीसरे विकल्प के तौर पर पेश करने के अपने अभियान में जुटी हुई हैं। लेकिन फिलहाल तो हर बड़ी पार्टी की चिंता उत्तरप्रदेश ही है क्योंकि वहां का चुनाव परिणाम पूरे देश की राजनीति पर जबर्दस्त प्रभाव डालता है, यह पहले से ही प्रमाणित तथ्य है।



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