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मॉनसून ने दस्तक तो दी पर अनिश्चय की स्थिति




  • केरल में हो रही है जोरदार बारिश
  • म्यांमार से भी बढ़ रहे हैं बादल
     अगला एक सप्ताह महत्वपूर्ण
  • शालिनी टी एस
    तिरुअनंतपुरम: केरल तक दक्षिण पश्चिमी मॉनसून की आमद हो चुकी है।

केरल में इसके देर से पहुंचने के पूर्व यह समय से दो दिन पहले ही

अंडमान के इलाकों तक बरसने लगी थी। उसके बाद से मॉनसून की

गतिविधियां ठहर सी गयी। वह अपेक्षित गति से हिमालय की पहाड़ियों तक

नहीं बढ़ी। दूसरी तरफ समुद्र में बने मॉनसून के बाद पूर्वी छोर पर बढ़ते हुए

भारत के पड़ोसी देश म्यांमार के रास्ते हिमालय की तरफ बढ़ने लगे हैं।

इसी बीच नये सिरे से एक समुद्री तूफान के पैदा होने की वजह से भी

आसमानी हवा के रुख और तेवर में बदलाव हुआ है। इस वजह से

मौसम वैज्ञानिक मान रहे हैं कि मॉनसून के फिर से गति पकड़ना और

हिमालय की तरफ यानी उत्तर भारत की तरफ अग्रसर होने इस तूफान के

असर पर भी निर्भर है। यह तूफान समुद्र में गति पकड़ता जा रहा है।

उसके अंतत: भारत के पश्चिमी इलाका गुजरात में तट पर आ टकराने की उम्मीद है।

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि वायुमंडल के ऊपरी सतह पर ठंडे हवा के

इलाकों में इन तूफानों से उत्पन्न परिस्थितियों का जोरदार प्रभाव पड़ता है।

इसलिए तूफान और मॉनसूनी बादल के बीच दो सप्ताह से जारी जंग के

बाद मॉनसून के बादल आगे बढ़ पाये हैं। अब नये सिरे से तूफानी मौसम ने

धरती से काफी ऊंचाई पर फिर से हवाओं को उत्तर पूर्व की तरफ बढ़ने से

रोक रखा है। वैसे भारतीय जमीन के उत्तरी इलाके में अब भी भीषण गर्मी का

प्रकोप ही मॉनसून को आगे बढ़ने के लिए आमंत्रित कर रहा है।

केरल में मॉनसून के पहुंचते ही जो बारिश हुई है, उससे कई बांध अभी से ही

भरने के करीब पहुंच चुके हैं

दो के गेट तो दो दिन की बारिश के बाद ही

खोलने की नौबत आ चुकी है। दरअसल यहां आयी बाढ़ के बाद से ही

यहां का जलस्तर अपेक्षाकृत अधिक होने की वजह से इन डैमों में

जल संधारण की क्षमता पहले से ही कम है।

मौसम वैज्ञानिक अगले सात दिनों तक इसकी गतिविधियों पर लगातार

नजर रखने की तैयारी कर चुके हैं। ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है

क्योंकि इसी बारिश पर अधिकांश भारतीय कृषि निर्भर है। इस बीच

अगर मॉनसून आगे की तरफ बढ़ते हुए अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों तक

फैल गया तो उसके बाद उसका आगे बढ़ना तय हो जाएगा।

ऐसा इसलिए होगी क्योंकि मॉनसून के बादल उसके बाद

उत्तरी भारत में चल रही गर्म हवा के संपर्क में आने के बाद गति पकड़ लेंगे।

वैज्ञानिकों ने इस बात की भी जानकारी दी है कि बंगाल की खाड़ी में

भी निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की वजह से उस तरफ से बारिश आगे

बढ़ चुकी है। जो म्यांमार होते हुए उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों तक

अपना असर दिखायेगी। वहां के बादल भी हिमालय से टकराने के

बाद उत्तर भारतीय राज्यो में फैलते चले जाएंगे। इन दोनों

कारणों से मॉनसून के लिए अगला एक सप्ताह अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।



Rashtriya Khabar


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