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सूर्य को इससे पहले इतने करीब से कभी नहीं देखा

  • भारतीय ने फोटो देखकर पूछा यह मुंगफली की चिक्की है क्या

  • पहली बार सूरज के इतनी बारिकी से तस्वीर खींची गयी

  • छोटा दाना भी आकार में टेक्सास से भी बड़ा इलाका

  • लाखों मील ऊपर तक उछलती है प्लाज्मा किरणें

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सूर्य को इतने करीब से देखना अपने आप में एक अजीब

अनुभव था। अत्याधुनिक टेलीस्कोप की बदौलत दुनिया को इस सूर्य

को इतने करीब से देख पाने का यह अवसर पहली बार प्राप्त हुआ है।

पृथ्वी से लगातार सूर्य की तरफ नजर रखते टेलीस्कोप में पहली बार

ऐसी तस्वीर और वीडियो देखी गयी है।

देखें नेशनल साइंस फाउंडेशन का वीडियो

वैज्ञानिक इसे देखकर सूर्य की संरचना और उसके अंदर की

गतिविधियों का अनुमान लगाना चाहते हैं। वैसे भी सूर्य के बारे में और

अधिक जानकारी हासिल करने के लिए पहले से ही नासा ने अपना

पार्कर सोलर प्रोव भेजा है।

यह अंतरिक्ष यान सूर्य के चारों तरफ चक्कर काटता हुआ उसके करीब

पहुंच रहा है। एक निश्चित दूरी तक पहुंचने के बाद वह वहां से फिर

पृथ्वी पर वापस लौट आयेगा, ऐसी योजना बनायी गयी है।

लेकिन सूरज की इस तस्वीर के बारे में एक भारतीय की टिप्पणी सबसे

अधिक चर्चा में आयी है।

सोशल मीडिया ट्वियर पर जब इसकी तस्वीर और वीडियो पोस्ट की

गयी तो उस पाठक ने इसे मुंगफली की चिक्की है क्या बताया।

लोगों ने इस टिप्पणी का भी काफी आनंद उठाया है। याद रहे कि

तस्वीर में सूर्य के काफी करीब की गतिविधियां तस्वीर में कुछ वैसी ही

वाकई नजर आ रही है, जो वास्तव में मुंगफली की चिक्की जैसी नजर

आती है।

उल्लेखनीय है कि सर्दी के इस मौसम में चिक्की की मांग अधिक होती

है। इसे मुंगफली के दानों को गुड़ में मिलाकर बनाया जाता है। देश के

कुछ हिस्सों में यह इसी मौसम में काफी लोकप्रिय भी होता है। इसी

वजह से उस सोशल मीडिया में मौजूद भारतीय की इस टिप्पणी को

अनेक लोगों ने पसंद किया है।

सूर्य को देखने का अवसर टेलीस्कोप ने दिया

पृथ्वी पर जीवन प्रदान करने के सबसे प्रमुख माध्यम सूरज की तरफ

पृथ्वी के कई टेलीस्कोप तैनात किये गये हैं। इस बार हवाई द्वीप पर

तैनात टेलीस्कोप ने यह फोटो अपने कैमरे में कैद की है।

इस क्रम में एक छोटा सा वीडियो भी सार्वजनिक किया गया है। जिसमें

सूर्य के अंदर हो रहे निरंतर विस्फोट के बाद की स्थिति को दर्शाया गया

है। इसे देखकर वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि सोने के रंग की यह

तस्वीर वहां की बहुत कुछ स्थिति बयान करती है। इसके गहन

अध्ययन से हमारे सौर जगत में हो रहे नुकसान और अन्य विषयों को

समझने में भी आसानी होगी। जिस टेलीस्कोप ने इस तस्वीर को

दुनिया तक पहुंचाया है, वह यह दर्ज करने में सफल रहा है कि विस्फोट

की वजह से वहां गैस के बड़े बड़े गुबार उठ रहे हैं। इससे पहले अब तक

ऐसी तस्वीर कभी भी देखने को नहीं मिली थी। फोटो में काफी छोटे

मुंगफली के दाना जितना नजर आने वाले इलाकों के बारे में भी

वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सिर्फ तस्वीर के वैज्ञानिक

अध्ययन और विश्लेषण से यह अनुमान लगाया गया है कि वहां के हर

विस्फोट के बाद जो प्लाज्मा ऊपर की तरफ उछलकर आ रहा है, वह

ठंडा होने तक करीब दस हजार 800 डिग्री तापमान तक पहुंच रहा है ।

अंतरिक्ष में शीतल होने के बाद वे फिर से नीचे बारिश की तरफ बरस

रहे हैं और यह क्रम निरंतर चल रहा है। मुंगफली के दानों के आकार

वाले इलाकों के बारे में स्पष्ट है कि वह दिखने में भले ही छोटे दिख रहे

हैं क्योंकि वे काफी दूरी से हैं। वास्तव में हर ऐसे दाने का आकार

विशाल है। इनमें से हर दाना भौगोलिक आकार में अमेरिका के

टेक्सास से बड़ा है।

तस्वीर का हर छोटा दाना भी कई हजार किलोमीटर का है

जो तस्वीर उपलब्ध हुई है, उसके विश्लेषण के बाद यह नतीजा

निकाला गया है कि इस टेलीस्कोप ने जो फोटो कैद की है, वह

अनुमानित तौर पर सूर्य को 30 किलोमीटर की चौड़ाई तक के इलाकों

को दर्ज कर रही है। इससे स्पष्ट है कि तस्वीर में जिस इलाके को दर्ज

किया गया है वह दरअसल कितना बड़ा है। नेशनल साइंस फाउंडेशन

ने इन तस्वीरों को जारी किया है। दुनिया मे काफी पहले से ही सौर

आंधी से विश्व की संचार व्यवस्था ध्वस्त होने की आशंका व्यक्त की

जा रही है। अब इन तस्वीरों और उनसे जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण से

वैज्ञानिक इसके बारे में और अधिक जानकारी हासिल कर पायेंगे।

इन्हीं आंकड़ो के आधार पर वैज्ञानिक वहां के चुंबकीय प्रभाव और

अन्य मुद्दों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। सूर्य की तरफ लगातार

नजर रखने वाले इस टेलीस्कोप को भी सूर्य के प्रभाव से बचाने के लिए

वैज्ञानिकों को अलग इंतजाम करना पड़ा है। इस टेलीस्कोप की तस्वीरें

खराब ना हो और उपकरण भी सही तरीक से काम करता रहे, इसके

लिए वैज्ञानिकों ने एक सात मील लंबी पाइपिंग लगायी है। इसमें

उपकरण को निरंतर ठंडा रखने का इंतजाम किया गया है।

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