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मॉब लिंचिंग पर पुलिस ने किया लोगों को जागरुक और सावधान भी







पेटरवारः मॉब लिंचिंग पर पेटरवार थाना परिसर में बोकारो एसपी और बेरमो एसडीपीओ के निर्देश पर

मॉब लिंचिंग के संदर्भ में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक, विशिष्ट अतिथि गण एवं आम लोग भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

लोगो ने विस्तारपूर्वक मॉब लिंचिंग की घटना और उसके समाज में दुष्प्रभाव पर प्रकाश डाला।

मॉब लिंचिंग पर क्या कुछ कहा लोगों और पुलिस ने देखिये वीडियो

थाना प्रभारी कहा कि मॉब लिंचिंग का अर्थ यह होता है कि जब दुश्मन को एक दूसरे के बारे में पता ही नहीं होता है।

मॉब लिंचिंग के संबंध में थाना परिसर में उपस्थित सैकड़ों की संख्या में लोगों को प्रशासन ने

उदाहरण देते हुए अपनी बातें समझाई।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कि आप अपनी जमीन के लिए किसी के साथ लड़ाई करते हैं

तो एक दूसरे के बारे में जानकारी रखते हैं कि किनके बीच में झगड़ा हो रहा है।

लेकिन मॉब लिंचिंग का विशेष अर्थ यह होता है कि है कि किसी को पता ही नहीं होता है कि

जिसको पीटा जा रहा है या यातना दी जा रही है उसका कसूर क्या है।

उसको किस लिए सजा दी जा रही है उसका जुर्म क्या है।

एक के बाद एक करके लोग पीटते जाते हैं।

प्रखंड विकास पदाधिकारी इंदर कुमार ने कहा कि अमूमन जब कोई जुर्म होता है

तो अपराधी किसी मंशा के साथ उसे अंजाम देता है।

एक को वैसे लोग पीटते हैं जिनकी कोई दुश्मनी भी नहीं होती और कसूर पता नहीं होता

लेकिन अनियंत्रित भीड़ के द्वारा जब किसी व्यक्ति को तथाकथित सजा दी जाती है

तब एक आदमी को कई लोग मार रहे होते हैं और उनकी आपस में कोई दुश्मनी नहीं रहती है।

भीड़ को पता ही नहीं है कि वह क्यों मार रहे हैं लेकिन निरुद्देश्य मारे जा रहे हैं।

इसको रोकने की जरूरत है। किस तरह से रोजमर्रा के जीवन में यदि हम अपने घर से निकलते हैं

और बीच रास्ते में एक छोटी सी घटना कब मॉब लिंचिंग का रूप ले लेती है।

उन्होंने अन्य राज्यों के उदाहरण देते हुए भी अपनी बात को समझाया।

साथ ही कहा कि जिसके साथ छेड़खानी हुई है वह एफआईआर करेगा।

उसके ऊपर उचित कानूनी कार्रवाई  होगी, गवाही होगी और उसको अपने किए की सजा दिलवाई जाएगी।

जिस भी व्यक्ति के साथ जुर्म हुआ है उसके लिए विधि संगत तरीके से कानूनी कार्रवाई करना

पुलिस का काम है ना कि इसके लिए बेकाबू भीड़ को कानून से ऊपर उठकर फैसला करने का अधिकार

कानून ने दिया है।

समाजसेवी सुधीर कुमार सिन्हा ने कहा कि मॉब लिंचिंग को किसी भी धर्म विचारधारा पंथ

या समुदाय विशेष से जोड़ कर नहीं देखा जाए।

मॉब लिंचिंग मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य है

यह मानव धर्म और मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य है।

समाज में जो भी विसंगतियां हैं, कुरीतियां है इसके निवारण के लिए एक तंत्र है और कानून है।

जैसे-जैसे सरकार को, कार्यपालिका और विधायिका के संज्ञान में समस्याएं आती हैं नित्य नए कानून बनते हैं।

बेरमो एसडीपीओ आर रामकुमार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा भी मॉब लिंचिंग के संदर्भ में विशेष दिशा निर्देश राज्य सरकार और केंद्र सरकार को दिए गए हैं जिसका अनुपालन शासन-प्रशासन के स्तर से किया जा रहा है।

आप सभी से मेरी तरफ से गुजारिश है कि इस मुद्दे को अपने घर के स्तर से भी प्रचारित व प्रसारित करना शुरू करें

और शहर के हर एक व्यक्ति तक यह बात पहुंच जाए कि जब अनियंत्रित भीड़ के द्वारा मानवता को

शर्मसार करने वाली कार्रवाई की जाती है तो व्यक्ति विशेष का क्या दायित्व होना चाहिए।

चाहे वह व्यक्ति किसी भी संस्था, सामाजिक संस्था राजनीतिक दल या किसी भी समाज विशेष,

समुदाय विशेष से जुड़ा है उसका सर्वप्रथम कर्तव्य यह होना चाहिए कि

वह किस प्रकार अनियंत्रित भीड़ द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को तुरंत रोके।

सर्वप्रथम स्थानीय प्रशासन और खासकर थाना को सूचित करें।

थाना जुडिशल सिस्टम की मूलभूत कार्यात्मक इकाई है

उस तक अपनी बात को पहुंचाएं और अविलंब इसकी सूचना दें ।



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