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सिमडेगा में पुलिस के सामने ही हुई मॉब लिंचिंग, देखें वीडियो




  • महिला ने अपने घटनाक्रम का पूरा विवरण दिया
  • बचाने के लिए थाना प्रभारी के पैर भी पकड़े थे
  • मॉब लिंचिंग कानून पारित होने के बाद हत्या
राष्ट्रीय खबर

सिमडेगाः सिमडेगा में मॉब लिंचिंग की घटना के बारे में पुलिस गलतबयानी कर रही है। बता दें कि झारखंड के सिमडेगा में मॉब लिंचिंग का एक ऐसा मामला सामने आया है,जिसमें पुलिस पर आरोप है कि सारी परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस मूकदर्शक बनी रही।




लोगों ने मिलकर पेड़ काटने वाले एक लकड़हारे को जिंदा जला डाला। अभी हाल ही में झारखंड राज्य में प्रिवेटेंशन ऑफ लिंचिंग एक्ट 2021 पारित हुआ है। इसके बाद भी सूबे में ऐसा भयावह अपराध देखने को मिल रहा है।

वीडियो में देखिये क्या कह रही है महिला

घटना का विवरण देती हुए उक्त व्यक्ति की पत्नी ने पुलिस की भूमिका पर ही सवाल उठा दिया और न्याय की मांग की। उसके मुताबिक जब उस व्यक्ति को बेरहमी से पीटा जा रहा था तो वह खुद पुलिस के पैर पकड़कर उसे बचाने की गुहार लगा रही थी।

सिमडेगा एसपी का कहना है कि घटना से संबंधित दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। गांव वालो के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही हैं।

दूसरी तरफ महिला साफ तौर पर यह कह रही है कि घटना के वक्त वहां पुलिस मौजूद होने के बाद भी मूक दर्शक बनी रही। महिला के मुताबिक उसने पुलिस से कमसे कम हवाई फायरिंग कर भीड़ को भगाने का अनुरोध करते हुए थाना प्रभारी के पैर तक पकड़े थे। इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि दरअसल पुलिस ने इस मामले में अपनी जिम्मेदारी नहीं निभायी।

सिमडेगा पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभायी

महिला के इस बयान से यह भी स्पष्ट हो गया है कि इस घटना के बारे में पुलिस अधिकारियों ने पूर्व में गलतबयानी की है। पुलिस बल के घटनास्थल पर मौजूद होने की बात खुद महिला कर रही हैं।




बता दें कि कोलेबिरा थाना इलाके के बेसराजारा बाजार के निकट मंगलवार को लगभग दो बजे के करीब सैकड़ों उग्र ग्रामीणों ने पूर्व नक्सली की हत्या कर शव को जला दिया। उग्र ग्रामीणों ने पूर्व नक्सली की मां और पत्नी के सामने ही हत्या कर शव को जला दिया।

पूर्व नक्सली द्वारा जंगलों से लकड़ी की कटाई को लेकर ग्रामीण काफी दिनों से नाराज थे। छपरीडिपा निवासी संजू प्रधान पूर्व माओवादी था। जेल से छूटने के बाद वह लकड़ी का व्यवसाय कर रहा था। जिससे ग्रामीण काफी नाराज थे। कई बार ग्रामीणों ने जंगलों की कटाई नहीं करनी की बातें कही थी।

लेकिन, संजू प्रधान लगातार जंगलों की कटाई कर तस्करी का काम करता था। इससे ग्रामीण खासे नाराज थे। मंगलवार को ग्रामीणों ने बंबलकेरा पंचायत भवन में बैठक कर उक्त घटना को अंजाम देने का निर्णय लिया। बैठक के बाद कई टोले के ग्रामीण बेसराजरा बाजार टांड़ के पास रह रहे संजू प्रधान के घर के अंदर पहुंचे। उस वक्त उनका पूरा परिवार घर के पास ही था। घर में संजू और उसकी पत्नी सपना देवी थी। सबसे पहले दो लोग घर में घुसे और जबरन उसे घर से निकालना चाहा।

मारने के बाद वहीं पर उसे जला भी दिया

जाने से इनकार करने पर सभी ग्रामीण उसके घर पहुंचे और उसे घर से निकालकर पीटते हुए घर से करीब 100 कदम की दूरी पर उसे ले गये। वहां मारपीट कर परिजनों के सामने ही उसकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं हत्या के बाद उसके ही घर में रखी लकड़ी को चिता बनाकर उसे जलाकर राख कर दिया।

बाद में पुलिस ने संजू प्रधान के जले हुए शव को अपने कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। वहीं, पुलिस घटना को लेकर तहकीकात में जुट गयी है। दूसरी ओर, परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस गांव में कैंप कर रही है।

एसपी डॉ शम्स तबरेज ने कहा कि घटना में जो भी दोषी होंगे उन्हें बख्शा नहीं जायेगा। झारखंड ऐसा चौथा राज्य है जहां मॉब लिंचिंग अधिनियम है लेकिन ऐसी घटना बार बार देखने को मिल जाती है जिनसे पूरा देश शर्मसार होता है। झारखंड सरकार ने 2019 में तबरेज अंसारी की लिंचिंग के बाद उठ रही मांग के कानून बनाया था। राज्स्थान मणिपुर बंगाल के बाद झारखंड चौथा राज्य है जहां मॉब लिंचिंग के खिलाफ हाल ही में कानून बना है।



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