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पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग पर मोहन भागवत ने उठाए सवाल, कहा क्या ऐसा होना चाहिए?




  • मॉब लिंचिंग किए जाने की घटना की देशभर में आलोचना की गई
  • क्या कानून व्यवस्था किसी एक के हाथ में लिया जाना चाहिए था?

मुंबई : पालघर में 2 साधुओं समेत तीन लोगों की मॉब लिंचिंग किए जाने की घटना की

देशभर में कड़ी आलोचना की गई। राज्य सरकार ने इस मामले पर उच्चस्तरीय जांच के

आदेश देते हुए कार्रवाई की और 9 नाबालिग समेत 110 लोगों को गिरफ्तार भी किया

गया। लेकिन, पालघर मॉब लिंचिंग पर पहली बार राष्ट्रीय स्वंय सेवक प्रमुख मोहन

भागवत ने सवाल उठाया है। मोहन भागवत ने कहा, 2 साधुओं की हत्या। क्या यह होना

चहिए? क्या कानून व्यवस्था किसी एक के हाथ में लिया जाना चाहिए था? पुलिस को क्या

करना चाहिए था? ये सभी चीजें ऐसी हैं जिन पर सोचा जाना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने

आगे कहा भारत की 130 करोड़ की आबादी भारत माता के बच्चे और हमारे भाई हैं। यह

दिमाग में रखा जाना चाहिए। दोनों पक्षों की तरफ से कोई गुस्सा और डर नहीं होना

चाहिए। समझदार और जिम्मेदार लोग अपने समूहों को इससे रक्षा करें। अगर ऐसा नहीं

होता है तो क्या होना चहिए? क्या सही है और क्या गलत है यह निर्णय कौन करेगा?

पालघर मॉब लिंचिंग का पूरा मामला जाने

दरसल, महाराष्ट्र के पालघर जिले में 16 अप्रैल की रात गुजरात के सूरत जा रहे मुंबई में

कांदिवली के रहने वाले तीन लोगों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इसमें दो साधु

और एक उनका ड्राइवर था। उनके वाहन को एक गांव के पास रोका गया था। जिसके बाद

अफवाहों का सहारा लेते हुए उनपर चोर होने का शक करते हुए भीड़ ने उन्हें लाठियों से

पीट-पीटकर मार डाला था। मृतकों की पहचान चिकने महाराज कल्पवृक्षगिरी (70),

सुशीलगिरी महाराज (35) और वाहन चालक निलेश तेलगाडे (30) के तौर पर हुई है।

उमा भारती ने की पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

बीजेपी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने पालघर

मॉब लिंचिंग को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मांग की कि वह राज्य के

पालघर में साधुओं की मॉब लिंचिंग के मामले में उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी हत्या

का मामला दर्ज करें, जिन्होंने उन्हें बचाने की बजाय उन्हें मॉब के हवाले हो जाने दिया।

उमा ने सीएम ठाकरे को लिखे खत में कहा, पालघर में मॉब की तरफ से साधुओं की हत्या

हुई है, यह कानून की दृष्टि में जघन्य अपराध एवं धर्म की दृष्टि से महापाप है। आप

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं। आपने स्वयं यह कृत्य नहीं किया है, लेकिन आपके द्वारा

शासित राज्य में यह जघन्य कृत्य हुआ है। इसलिए इसमें सभी दोषियों को दंडित करना

होगा। उन्होंने कहा, जिन पुलिसकर्मियों के हाथ पकड़कर वह असहाय साधु जीवन रक्षा

की गुहार लगा रहे थे, उन पुलिसकर्मियों ने उन्हें बचाने के बजाय उन्हें भीड़ के हवाले हो

जाने दिया और वह खुद को छुड़ाकर अलग हो गए, जिससे उन साधुओं को जान से हाथ

धोना पड़ा। वे पुलिसकर्मी भी हत्या के आरोपी हैं। उन पर भी आईपीसी की धारा 302 के

तहत केस दर्ज होना चाहिए। वह चाहते तो हवाई फ़ाइरिंग कर साधुओं को बचा सकते थे।



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