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बड़कागांव में आंदोलन के बीच चौथे दिन विधायक अंबा ने दी चेतावनी

  • कंपनी खुद को जनता से ऊपर नहीं समझेः अंबा प्रसाद

रांचीः बड़कागांव के चेपाकला, सोनबरसा, आराहारा तथा सीकरी में नौकरी मुआवजा

प्रदूषण इत्यादि के समस्या को लेकर किया जा रहा है । सत्याग्रह के आज चौथे दिन भी

कंपनी के सभी तरह के कार्यों को बंद रखा गया है। ज्ञात हो कि बड़कागांव प्रखंड के

एनटीपीसी तथा त्रिवेणी सैनिक से प्रभावित गांव जुगरा, चेपा,सोनबरसा, सिंदवारी, नगड़ी,

डाडी कला, चुरचू तथा सीकरी सहित दर्जनों गांव के लोग कंपनी के तानाशाही रवैये से

त्रस्त होकर नौकरी मुआवजा तथा प्रदूषण सहित 12 सूत्री मांग को लेकर अधिकार

सत्याग्रह कर रहे हैं । अंबा प्रसाद ने लोगों की समस्याओं पर कहा कि हम विकास के

विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर क्षेत्र का विनाश अपनी आंखों के सामने हो वो

हम देख नहीं सकते । कंपनी 12 मांगों में से एक मांग के अनुसार त्रिपक्षीय वार्ता में

शामिल होने की जगह बिचौलियों और लठैत के माध्यम से लोगों को डराने धमकाने तथा

मारपीट करने का कार्य किया जा रहा है। मेरे विरोधियों द्वारा मेरे विरुद्ध भी षड्यंत्र किया

जा रहा है। कुछ दिन पूर्व कंपनी के भारी वाहन के चपेट में आने के कारण दो ग्रामीण

गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसकी जानकारी मुझे हुई तो मैं स्वयं घटनास्थल पर

पहुंची वहां पहुंचने पर महिलाओं ने बताया कि यहां हर रोज भारी वाहन चलने के कारण

प्रदूषण फैल रहा है बिमारी फैल रही है, हमारी जमीन कंपनी के द्वारा जबरन कब्जा किया

जा रहा है । जब हम मुआवजे की बात करते हैं तो कंपनी द्वारा पाले गए कतिपय लोगों के

द्वारा हमारे साथ मारपीट गाली-गलौज तथा जान से मारने की धमकी दी जाती है। कंपनी

को समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि होता है । इसीलिए कंपनी अपने

आप को जनता के ऊपर नहीं समझे ।

बड़कागांव में जनता के दर्द को समझना ही होगा

अपने रवैया में बदलाव कर जनता के दर्द को समझे । जिनकी जमीन कंपनी के द्वारा

अधिग्रहण किया गया है उनको रोजगार देने की बात माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने

भी कही थी । कंपनी उस पर अमल करें और जो लोग आज बेरोजगार है, जिनकी जमीन

कंपनी ने अधिग्रहण किया है उनके साथ त्रिपक्षीय वार्ता कर उनको नौकरी सुनिश्चित करें

। और पूर्व में जिन लोगों को काम पर रखा गया है और उनको किसी भी तरह का प्रमाण

नहीं दिया गया है उनको कंपनी प्रमाण पत्र निर्गत करें, बाहरी लोगों को बाहर करे तभी

जनता अपना आंदोलन को वापस लेगी अन्यथा अनिश्चितकाल के लिए यह विस्थापित

प्रभावित अधिकार सत्याग्रह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए गांधीवादी तरीके से

शांतिपूर्वक जारी रहेगा।


 

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