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मिजोरम में शरण लेने वाले म्यांमार के 38 सौ लोगों में 18 सांसद भी

  • वहां की सेना को चीन ने उपलब्ध कराये दमन के हथियार

  • भारत के खिलाफ वहां की सेना को भड़क रहा है चीन

  • शरण लेने वालों में अधिकांश पुलिस कर्मी हैं वहां के

  • जनता के साथ क्रूरता का विरोध करे भारत सरकार

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: मिजोरम में शरण लेने वाले म्यांमार से भागकर आये शरणार्थयों में वहां के 18

सांसद भी है।

वहां से भाग कर मिजोरम में शरण लेने वालों में करीब अस्सी प्रतिशत वहां के पुलिस कर्मी

भी हैं। भारतीय खुफिया ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार म्यानमार के नागरिक और 18 सांसद

मिजोरम में शरण लेने का समाचार मिलने के बाद चीन सरकार ने म्यांमार सैन्य सरकार

को भारत के विरोध भड़का रहा है। आधिकारिक सूत्र ने कहा, भारतीय खुफिया ब्यूरो ने

अपनी यह रिपोर्ट गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को भेज दी है। दूसरी ओर,एक वरिष्ठ

पुलिस अधिकारी ने आज कहा, म्यांमार के 3800 से अधिक लोगों में से कम से 18 कानून

निर्माता फरवरी में सैन्य अधिग्रहण के बाद नजरबंदी से बचने के लिए अपने देश से भागने

के बाद मिजोरम में शरण ले रहे हैं ।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि 18 सांसद (सांसद) म्यांमार के चिन राज्य और सगिंग क्षेत्र

से हैं और वे नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) पार्टी से ताल्लुक रखते हैं, जिसने

नवंबर 2020 का चुनाव जीता था। सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि

म्यांमार से कम से कम 3,800 लोग मिजोरम में घुस आए हैं और फिलहाल राज्य के

विभिन्न हिस्सों में शरण ले रहे हैं। उन्होंने कहा, 3,800 लोगों में से 80 प्रतिशत पुलिस

कर्मी हैं, जबकि 20 प्रतिशत शिक्षक, फायरब्रिगेड और नौकरशाहों जैसे अन्य सरकारी

कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश शरणार्थियों को स्थानीय गैर सरकारी संगठनों

द्वारा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि कुछ ग्रामीणों द्वारा आश्रय प्राप्त कर रहे

हैं।

मिजोरम में शरण देने वालों में स्थानीय संगठन भी हैं

उन्होंने कहा कि चंघाई जिले में म्यांमार के नागरिकों की संख्या 558 है, इसके बाद

सियाहा जिला है, जो 414 रखे। अधिकारी के मुताबिक, म्यांमार के नागरिक इस समय

राज्य की राजधानी आइजोल समेत 9 जिलों में शरण ले रहे हैं। उन्होंने कहा, राज्य की

राजधानी आइजोल में 866 म्यांमार के नागरिक हैं। मिजोरम के छह जिले- चंघाई,

सियाहा, लावंगतलाई, सेरचिप, हनाथियल और सैतुल म्यांमार के साथ 510 किलोमीटर

लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। इस बीच, पूर्वोत्तर में विभिन्न छात्र संगठनों की

एक छत्र संस्था पूर्वोत्तर छात्र संगठन (एनईओ) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता

वाली राजग सरकार से आग्रह किया है कि वह संकटग्रस्त म्यांमार में रक्तपात और

जनहानि को रोके। बयान में कहा गया, सोमवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए आयोजित

संगठन की बैठक में केंद्र से आग्रह किया गया कि वह पड़ोसी देश में रक्तपात और

जनहानि को रोकने के लिए म्यांमार के सैन्य शासकों को अपनी हैसियत से प्रबल हो।

साथ ही केंद्र से तख्तापलट प्रभावित देश में लोकतंत्र की तत्काल बहाली की मांग करने का

आग्रह किया। नेसो ने मोदी सरकार से आग्रह किया कि वह म्यांमार के उन नागरिकों की

दुर्दशा का ठीक से समाधान करे, जिन्होंने संबंधित राज्य सरकारों की सहमति से संभावित

उत्पीड़न से भागते हुए मिजोरम, नगालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में शरण ली है।

वहां के लोगों की एक ही संस्कृति और इतिहास भी रहा है

इसमें कहा गया है कि म्यांमार के क्षेत्र और चिन राज्य के जातीय समूहों ने चार पूर्वोत्तर

राज्यों के स्वदेशी समुदायों के साथ एक ही संस्कृति, जातीयता और इतिहास साझा किया

है, जो पड़ोसी देश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को साझा करते हैं। छात्र संगठन ने केंद्र से

आग्रह किया कि जब तक उन्हें स्थिति में सुधार नहीं हो जाता, तब तक उन्हें म्यांमार

के नागरिकों को आवश्यक अस्थायी सहायता प्रदान की जाए। भारतीय खुफिया ब्यूरो की

रिपोर्ट के अनुसार चीन की हुकूमत म्यांमार के सैनिकों की क्रूरता का साथ निभा रही है।

म्यांमार की सैन्य सरकार को चीन का साथ मिल रहा है।

म्यांमार को दमन के लिए चीन ने उपलब्ध कराये हैं उपकरण

यूरोपीय यूनियन के शीर्ष राजनयिक ने रविवार को कहा कि म्यांमार के खिलाफ 

अंतरराष्ट्रीय बिरादरी द्वारा उठाए  जाने वाले कदमों पर रूस और चीन अड़ंगा लगा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर देश में लोकतंत्र की बहाली होती है तो म्यांमार को आर्थिक

सहायता करने पर विचार करेगा। राजनयिक का यह आरोप बेबुनियाद नहीं है। दरअसल,

प्रदर्शनकारियों की निगरानी करने के लिए म्यां मार की सेना चीन के ड्रोनों का इस्तेबमाल

कर रही है। इसकी जानकारी ब्रिटिश मिलिट्री इंटेलिजेंस पब्लिकेशन जेन्स इंटरनेशनल

डिफेंस रिव्यू की रिपोर्ट में दी गई है। मार्च महीने में मांडले शहर में ये चीनी ड्रोन्स देखे गए

थे।इस रिपोर्ट के मुताबिक तस्वीरों में दो तरह के ड्रोन दिखाई दे रहे थे। यह ड्रोन कम

ऊंचाई पर उड़ते दिख रहे थे। इन ड्रोन की आवाज मंडल के लोगों ने सुनी। मंडेली शहर में

नागरिक सैन्य तख्तापलट का विरोध कर रहे हैं। मंडाली म्यांमार का दूसरा सबसे बड़ा

शहर है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें चीन निर्मित सीएच-3ए ड्रोन है। इस ड्रोन का विकास

चीन ने ही विकसित किया है। चीन ने म्यांमार को 10 से 12 ड्रोन दिए थे। इन ड्रोन का

इस्तेमाल म्यांमार की वायुसेना कर रही है। चीन दुनिया में तेजी से हथियार सप्लायर

के रूप में उभरा है। इतना ही नहीं, जब से चीन ने ड्रोन का निर्यात शुरू किया है, उसने

लोकतंत्रों की तुलना में गैर- लोकतांत्रिक देशों को ज्यादा आपूर्ति की है। गैर लोकतांत्रिक

देशों में इन चीनी ड्रोन की मांग बढ़ी है। इस ड्रोन का नाम केहांग है। चीनी में इसकी

मुलाकात इंद्र धनुष से होती है। इसका वजन न्यूनतम 650 किलो है। इसकी पेलोड 

क्षमता 180 किलोग्राम है। यह 12 घंटे और 19685 फीट की ऊंचाई पर रहकर अपने काम

को अंजाम दे सकता है।

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