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मिजोरम पर लगातार दो भूकंप का असर काफी नुकसान

  • सड़कों में दरारें-भवन क्षतिग्रस्त; मोदी ने दिया मदद का भरोसा

  • बारह घंटे में भूकंप के दो तेज झटके से दहला

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : मिजोरम सोमवार सुबह भूकंप के जोरदार झटके से दहल उठा। भूकंप की

तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.3 दर्ज की गई है ।भूंकप के तेज झटके आज सुबह मिजोरम में

महसूस किए गए हैं। मिजोरम में भूकंप चंपई से 27 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में आया,

जिसकी तीव्रता रिक्टसर स्कैिल पर 5.5 बताई जा रही है। मिजोरम के मुख्यमंत्री

जोरामथंगा ने बताया कि 12 घंटे में भूकंप के दो झटके आए। नुकसान का आकलन जिला

प्रशासन की ओर किया जा रहा है। अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

हालांकि, भूकंप से कई मकान, चर्च बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। जगह-जगह सड़कों पर

दरारें आ गईं। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिजोरम के मुख्यमंत्री से बात की और

हर संभव मदद का भरोसा दिया। राज्य के मुख्यमंत्री ने पीएम और गृह मंत्री की ओर से

मदद की भरोसा दिए जाने पर आभार जताया है। भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग

घरों से बाहर निकल आए। इससे पहले, रविवार को भी शाम 4:10 बजे 5.1 तीव्रता का

झटका आया था।

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का जोरदार झटका सुबह 4:10 बजे

आया। इसका केंद्र भारत-म्यांमार सीमा पर चंपई जिले में जोखावथर था। झटके राजधानी

आइजोल समेत राज्य के कई हिस्सों में महसूस किए गए। जोखावथर में एक चर्च समेत

कई मकान और भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हाइवे और सड़कों पर जगह-जगह दरारें आ

गईं. नुकसान का अभी आकलन किया जा रहा है। भूकंप की गहराई 20 किमी थी। इससे

पहले, रविवार को भी शाम 4:10 बजे 5.1 तीव्रता का झटका आया था। वहीं, 18 जून को भी

4.6 तीव्रता का एक झटका महसूस किया गया था।

मिजोरम के अलावा पूर्वोत्तर में भीषण भूकंपों का इतिहास है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथंगा से बात की और केंद्र की तरफ

से हर संभव मदद का भरोसा दिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोमवार को राज्य के

मुख्यमंत्री से बात की भूकंप के बाद हालात के बारे में जानकारी ली। यह उल्लेख है कि

पूर्वोत्तर में इतिहास के कुछ सबसे बड़े भूकंप आए हैं। साल 1897 में 8.2 तीव्रता का भूकंप

आया था, जिसका केंद्र शिलांग था, जबकि 1950 में असम में रिक्टर पैमाने पर 8.7 तीव्रता

का भूकंप आया था, जिसके परिणामस्वरूप ब्रह्मपुत्र नदी ने अपना रास्ता बदल दिया था।


 

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