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सड़क दुर्घटना रोकने में कारगर होगी यह विधि







  • अदृश्य इलाके से रोशनी की गतिविधि को भांपता है यंत्र
  • छाया कैमरे पर आधारित पद्धति का प्रदर्शन किया जाएगा
  • तेज गति पर नियंत्रण के लिए भी हो रहा है अनुसंधान
  • एमआइटी शोधकर्ताओं ने विकसित की बचाव की नई पद्धति
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सड़क दुर्घटना मौत का सबसे प्रमुख कारणों में से

एक है। दरअसल तेज रफ्तार की गाड़ियों में सड़क पर अक्सर

ही जोरदार टक्कर तब होती है जब वे एक दूसरे को आते हुए

देख नहीं पाते हैं। एमआइटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी पद्धति

विकसित कर ली है, जिससे सड़क के इस खतरे को काफी हद

तक टाला जा सकेगा। जिस तकनीक को विकसित किया गया है,

उससे लैश कोई भी वाहन किसी कोण से आते हुए अन्य वस्तु

को पहले ही भांप लेता है। इसी पूर्वानुमान की वजह से वह खुद

को रोक भी सकता है। गाड़ियों में भी इस विधि को आजमाया

गया है। परीक्षण में यह विधि सफल हुई है।

वीडियो में देखिये कैसे काम करती है यह विधि

इसे प्रयोगशाला में विकसित करने के दौरान सबसे पहले

वैज्ञानिकों ने इसे प्रयोगशाला के अंदर ही आजमाया था।

एक गलियारे से आते रोबोट को इस तकनीक से लैश किया गया था।

गलियारे के मुहाने पर नजर नहीं आने वाले छोर पर खड़े व्यक्ति

अथवा गतिविधियों को यह रोबोट भांप गया और उसके खुद को

रोक लिया। शोधकर्ताओं ने इस विधि के बारे में बताया है कि नजर

नहीं आने वाले कोण से भी इसे किसी वस्तु के गतिमान होने का

एहसास अपने संयंत्रों की वजह से हो जाता है।

मैसाच्यूट्स इंस्टिटियूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इस विधि

का सार्वजनिक प्रदर्शन करने की भी तैयारी कर ली है।

इंटैलिजेंट रोबोट्स एवं सिस्टम्स (आइआरओएस) के अंतर्राष्ट्रीय

सम्मेलन में इसका प्रदर्शन करने के पहले इसे एक पार्किंग में भी

आजमाया गया है। जिसमें यह सफल रहा है।

प्रयोगशाला के गलियारे में इसका परीक्षण एक व्हील चेयर पर

किया गया था। बाद में पार्किंग में इसे एक गाड़ी पर आजमाया गया था।

सड़क दुर्घटना रोकने के लिए रोशनी का सहारा

इस विधि को विकसित करने वालों ने बताया है कि दरअसल पहले से

विकसित लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (एलआइडीएआर) विधि से यह

तरीका ज्यादा तेज है। परीक्षण में इसे पूर्व विकसित विधि से आधा

सेकंड पहले प्रतिक्रिया देने का परिणाम दर्ज किया गया है। इसके

बारे में बताया गया है कि दरअसल इस विधि की सफलता का राज

शैडो कैम है। यह छाया कैमरा अपने रास्ते के सामने की जमीन पड़ने

वाली वाली छाया को भांप लेता है। इसी पूर्वानुमान की वजह से यंत्र

अपने साथ चलने वाले वाहन को रोक देता है। इस विधि के काम करने

के बारे में बताया गया है कि दरअसल यह तकनीक प्रकाश किरणों में

होने वाले बदलाव को इस यंत्र का कैमरा पकड़ लेता है।

इसी हरकत की सूचना यंत्र के सेंसर तक पहुंचने की वजह से यंत्र

गति को रोक देता है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि किसी अदृश्य इलाके

से आने वाले परावर्तित रोशनी जब अचानक कम हो जाती है तो यंत्र सामने

होने वाली गतिविधि को समझ लेता है। आम लोगों की समझ के मुताबिक

इस गतिविधि की सूचना पहुंचते ही यंत्र के अंदर ट्रैफिक की लाल लाइट

जैसी स्थिति बन जाती है। फिर सब कुछ ठीक होने पर यंत्र फिर से हरा

सिग्नल देने लगता है।

इस बारे में प्रकाशित एक शोध प्रबंध के सह लेखक डेनियेला रुस कहती हैं

कि रोबोट्स जब किसी ऐसे इलाके में काम कर रहे होते हैं, जहां अन्य

रोबोट अथवा इंसान भी हैं।

ट्राफिक सिग्नल की तरह हरा और लाल संकेत देता है

वैसी स्थिति में इस किस्म की टक्कर को रोकना ज्यादा जरूरी होता है।

वरना दो रोबोटों अथवा रोबोट के साथ इंसान की टक्कर ऐसे चौराहे नूमा

गलियारों में हो सकती है। इस विधि से कारगर होने से उस स्थिति को

पूरी तरह रोका जा सकेगा। प्रयोगशाला में रोबोट पर आजमाने के बाद

जब गाड़ियों के ऊपर इसका परीक्षण किया गया तो वहां भी अदृश्य कोण

से आने वाली गाड़ी की रोशनी को भांपकर यंत्र लगा वाहन अपने को

रोककर खड़ा हो गया। इससे दोनों गाड़ियों की टक्कर रुक गयी।

इस अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक अब इसे और विकसित करना चाहते हैं

ताकि तेज रफ्तार की परिस्थितियों में भी इसका सही और समुचित

उपयोग किया जा सके। इसके लिए रोशनी की गतिविधियों को पकड़ने

की बारिक पद्धति को और बेहतर बनाने के तौर तरीकों पर काम चल रहा है।



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