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हिमाचल प्रदेश के पौंग झील में फिर एक साथ 22 प्रवासी पक्षिओं की मौत

  • पूरे क्षेत्र के लिए एडवायजरी जारी

  • एक किलोमीटर के दायरे में जाना बंद

  • शवों के सैंपल जांच के लिए भेजे गये हैं

शिमला: हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिले में पौंग झील में फिर से बर्ड फ्लू की आहट होने से

वन्यजीव विभाग की चिंता बढ़ गयी है। पौंग बांध अभयारण्य के तहत नगरोटा सूरियां

बीट में पिछले दो दिन में कुल 22 प्रवासी पक्षी मृत मिले हैं। वन विभाग के वाइल्ड लाइफ

विंग ने मृत पक्षियों के सैंपल जालंधर लैब में भेज दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो

पाएगा कि प्रवासी पक्षियों की मौत बर्ड फ्लू के कारण हुई है या फिर कोई ओर वजह है।

उल्लेखनीय है कि जनवरी में अंतरराष्ट्रीय रामसर वेटलैंड पौंग बांध में विदेशी परिंदों की

मौत बर्ड फ्लू के कारण हुई थी। इस दौरान करीब 20 विदेशी प्रजातियों के 5000 हजार से

अधिक परिंदों की मौत हुई थी। इस कारण सरकार ने पौंग झील में लोगों की आवाजाही पर

प्रतिबंध लगा दिया था। कांगडा जिला उपायुक्त राकेश प्रजापति ने हिमाचल प्रदेश के

वन्य प्राणी विभाग व पशुपालन विभाग के अधिकारियों से बैठक कर जिले के चार

उपमंडलों इंदौरा, फतेहपुर, जवाली व देहरा में मछली, मुर्गे व अंडों की बिक्री पर प्रतिबंध

लगाया था। इसके अलावा पोल्ट्री फार्मों में भी विशेष एहतियात बरतने की सलाह प्रशासन

ने दी और पौंग बांध के एक किलोमीटर क्षेत्र को अलर्ट जोन जबकि उसके आगे के क्षेत्र को

सर्विलांस जोन बनाया था।

हिमाचल प्रदेश में पहले भी ऐसा वायरस हमला हुआ था

बता दें कि इससे पहले भी कई बार बर्ड फ्लू ने देश में दस्तक दी है। कोरोना संकट के दौरान

भी कई बार इस तरीके से अचानक ही ढेर सारी पक्षियों के मर जाने के बाद सावधानी बरती

जा रही है। पहली बार जब इस बीमारी का हमला भारतवर्ष में हुआ था तो जानकारी औ र

तैयारी के अभाव में लाखों पक्षी काल कवलित हो गये थे। इससे देश का मुर्गी और बत्तख

पालन उद्योग भी तबाह हो गया था। इसी वजह से ऐसी सूचनाओं पर अब पूरे देश में

त्वरित कार्रवाई की जाती है ताकि आगे और नुकसान होने के पहले ही बीमारी के प्रसार को

रोका जा सके।

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