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सरहदों को लांघकर पहुंचे विदेशी मेहमानों के कलरव है पक्षी बिहार में

बलरामपुरः सरहदों को लांघकर बेरोक टोक हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके आये विदेशी मेहमानों के कलरव

से सोहेलवा वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र का पक्षी बिहार गुंजायमान होने लगा है। शान्ति का संदेश लेकर आये विदेशी

मनमोहक मेहमान पक्षियों के झुंड बलरामपुर जिले के सोहेलवा वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र के पक्षी बिहार में पहुंचना

शुरू हो गये है।

यूरोपीय व एशियाई देश साइबेरिया, अफगानिस्तान व अन्य देशों से आये रंग बिरंगी विदेशी मेहमान पक्षी अपनी

चहचहाहट और मनमोहक अटखेलियों से पर्यटकों को खूब लुभा रहे है। शरद ऋतु शुरू होते ही विदेशी पक्षी भोजन

की तलाश में आसमान की कई हजार किलोमीटर दूरी नापते हुए यहां के पक्षी विहार तक पहुंचने लगते हैं।

दीपावली के बाद यहां करीब 20 हजार स्थानीय पक्षियों जमावड़ा हो गया था। शांत और एकांत स्थल पक्षियों के

लिए मुफीद और सुरक्षित होने के कारण वह यहां पानी और पेड़ों पर आराम से अठखेलियां करते रहते हैं।

इन दिनों साइबेरिया में जबरदस्त बर्फबारी से पक्षियों को भोज्य पदार्थ का अकाल पड़ने लगता है।

साइबेरियन पक्षी भोजन की तलाश मे भटककर यहां के पक्षी बिहार में नवम्बर आने शुरू हो जाते है।

चार महीने पश्चात मार्च मास में बसंत ऋतु का आगमन होते ही अपने गंतव्य स्थान पर लौट जाते है।

इस दौरान पक्षी बिहार में पर्यटकों की सख्या बढ़ने लगती है और इससे वन विभाग को काफी लाभ होता है।

वन विभाग सूत्रों ने शनिवार को यहां बताया कि विदेशी मेहमान दीपावली के बाद से ही यहां आना शुरू हो गये थे।

सरहदों को लांघकर आये मेहमानों में कुछ दुर्लभ प्रजाति भी

उन्होंने बताया कि दुर्लभ जाति व प्रजातियों के पण्कौआ, पिहो, जांघिल, ड्बारु, तिवारी, नीलसर, लालसर,

सीकपर, पिंटेल, सलही, बारंकटा, बगुला, मैना, तोता, सारस, मोर और अन्य सुरीले पक्षियों ने पक्षी बिहार

की हवाओं को भी संगीतमय सुरीली बना दिया है।

अफगानिस्तान से आये हाईबैक्टेल ने पर्यटको को सम्मोहित कर जैसे अपनी मृदु वाणी के वश मे कर कैद कर रखा है।

लुभावने ये विदेशी पक्षी लौटते समय प्रजनन भी करते है।

पक्षियों के संग वन क्षेत्र में पाये जाने वाले दुर्लभ सर्प, वन्यजीव भी पर्यटकों को दिलखुश हरकतों से लुभा रहे है।

सूत्रों के अनुसार, नेपाल, दिल्ली व अन्य कई स्थानों पर फैले बर्ड फ्लू के कारण विदेशी पक्षियों में वायरस की

आशंका को देखते हुये फिलहाल पर्यटकों को दूर से ही पक्षियों को निहारने की सलाह दी जा रही है।

बहेलियो और शिकारियों की टेढ़ी नजर से पक्षियों को बचाये रखने के लिये वनरक्षकों को सतर्क कर दिया गया है।

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